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तरसेम हत्याकांड: मुख्य साजिशकर्ता की भूमिका में थे अनूप, दिलबाग सिंह को किया था तैयार; सरबजीत को दी सुपारी

Wed, 07 May 2025 12:26 PM IST
हीरा मेहरा अमर उजाला नेटवर्क, ऊधम सिंह नगर
अमर उजाला नेटवर्क, ऊधम सिंह नगर Published by: हीरा मेहरा Updated Wed, 07 May 2025 12:26 PM IST
सार

बाबा तरसेम सिंह हत्याकांड का मुख्य सूत्रधार बाबा अनूप सिंह आखिरकार कानून के शिकंजे में फंस गए। सूत्रों के अनुसार यह पूरा हत्याकांड डेरा कार सेवा की संपत्ति पर वर्चस्व को लेकर अंजाम दिया गया। पुलिस की टीम अनूप सिंह से पूछताछ कर रही है।

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Baba Anoop Singh was the main conspirator in Tarsem murder case
बाबा तरसेम सिंह हत्याकांड में अभियुक्त इनामी अनूप सिंह गिरफ्तार - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बहुचर्चित बाबा तरसेम सिंह हत्याकांड का मुख्य सूत्रधार बाबा अनूप सिंह आखिरकार कानून के शिकंजे में फंस गए। बाबा अनूप सिंह से संपर्क के बाद दिलबाग ने तरसेम की हत्या के लिए पंजाब के शूटर सबरजीत और अमरजीत से संपर्क किया गया। सूत्रों के अनुसार यह पूरा हत्याकांड डेरा कार सेवा की संपत्ति पर वर्चस्व को लेकर अंजाम दिया गया। पुलिस की टीम अनूप सिंह से पूछताछ कर रही है।

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28 मार्च 2024 को नानकमत्ता में बाबा तरसेम सिंह की हत्या गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई थी। इसमें नामजद शूटर अमरजीत उर्फ बिट्ट का आठ अप्रैल 2024 को हरिद्वार में एनकाउंटर कर दिया गया था। इसके अलावा शूटर सरबजीत सिंह सहित नौ अभियुक्तों को पुलिस ने विभिन्न जगहों से गिरफ्तार जेल भेजा था। पूरा हत्याकांड के केंद्र में दिलबाग, सुल्तान, सतनाम आए थे। तत्कालीन विवेचक ने गहराई से तफ्तीश की थी तो सूत्रधार के रूप में गुरुद्वारा श्री हर गोविंद सिंह रतनपुरा नवाबगंज के मुख्य जत्थेदार बाबा अनूप सिंह का नाम सामने आया था। अनूप का नाम हत्याकांड के बाद केस में बाईस्तवा दर्ज किया गया था। पुलिस ने अनूप सिंह को घटना का मुख्य साजिशकर्ता माना था। यह सामने आया था कि करीब दो साल से हत्याकांड की साजिश बुनी जा रही थी। हत्याकांड से एक साल पहले सरबजीत सिंह और अमरजीत सिंह नानकमत्ता आया था मगर वे हत्याकांड को अंजाम नहीं दे सका। सूत्र बताते हैं कि धार्मिक स्थलों में एकाधिकार के वर्चस्व में हत्याकांड को अंजाम दिया गया था। सबरजीत सिंह ने पूछताछ में बहुत ज्यादा जानकारी नहीं दी थी। लेकिन उसने दिलबाग से मुलाकात और उसके घर पर राइफल की टेस्टिंग की बात मानी थी।

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हत्याकांड में अनूप सिंह मुख्य साजिशकर्ता में शामिल है। विवेचना में यह सामने आ चुका है। इसके चलते ही अनूप के खिलाफ कुर्की की कार्रवाई के साथ ही 25 हजार का इनाम भी रखा गया था।-मणिकांत मिश्रा, एसएसपी

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14 माह बाद आए पकड़ में, पुलिस ने दिल्ली, पंजाब और यूपी की छानी थी खाक
नानकमत्ता स्थित डेरा कार सेवा में 28 मार्च 2024 को हुई वारदात के बाद हमलावरों की गोली से बाल-बाल बचे सेवादार जसवीर सिंह ने पुलिस को तहरीर सौंपी थी। इसमें हत्यारोपी अमरजीत सिंह बिट्टू और सरबजीत सिंह को नामजद करने के साथ ही हत्याकांड के षड्यंत्र में शामिल बाबा अनूप सिंह निवासी नवाबगंज थाना प्रेम नगर जिला रामपुर हाल निवासी ग्राम रतनपुरा थाना गदरपुर, गुरुद्वारा श्री नानकमत्ता साहिब प्रबंधक कमेटी के तत्कालीन अध्यक्ष हरबंस सिंह चुग एवं तराई महासभा के उपाध्यक्ष प्रीतम सिंह संधू के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने हत्याकांड का खुलासा करने के लिए एसटीएफ, एसओजी के साथ ही पुलिस की कई टीमें गठित की थी। हत्या के षड्यंत्र में शामिल नौ आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। हत्यारे अमरजीत सिंह उर्फ बिट्टू को पुलिस ने हरिद्वार में मुठभेड़ में ढेर कर दिया था। फरार चल रहा सरबजीत सिंह पुलिस मुठभेड़ में तब घायल हो गया जब पुलिस आठ अप्रैल को पंजाब से गिरफ्तार कर ला रही थी। काशीपुर के समीप पुलिस का वाहन पलटने के बाद पुलिस कर्मी का शस्त्र छीन कर भागने का प्रयास कर रहा था। पुलिस ने फरार बाबा अनूप सिंह की गिरफ्तारी के लिए दिल्ली, पंजाब और यूपी की खाक छानी थी। करीब 14 माह बाद हरिद्वार में एसटीएफ की टीम को बाबा अनूप सिंह को गिरफ्तार करने में सफलता मिली।

हत्याकांड से 22 दिन पहले बाबा तरसेम ने जताई थी अपनी हत्या की आशंका
धार्मिक डेरा कार सेवा के जत्थेदार बाबा तरसेम सिंह ने अपनी हत्या से 22 दिन पहले अपनी हत्या की आशंका जताते हुए शासन प्रशासन को पत्र लिखकर भेजा था। अमर उजाला ने 07 मार्च 2024 के अंक में प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया था। 28 मार्च 2024 को डेरा कार सेवा में घुसकर बाइक सवार दो हत्यारों द्वारा गोली मारकर बाबा तरसेम सिंह की हत्या करने से 21 दिन पहले छह मार्च को बाबा तरसेम सिंह ने अपनी हत्या होने की आशंका को लेकर शासन प्रशासन को पत्र भेजा था। बाबा तरसेम सिंह की जान की फिक्र धार्मिक डेरा कार सेवा के मुखी सचखंड वासी पंथ रतन संत बाबा हरवंश सिंह को भी थी। 18 वर्ष पूर्व वर्ष 2008 में बाबा हरवंश सिंह ने तत्कालीन सरकार , प्रदेश सचिव, पुलिस महानिदेशक, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन भेज कर डेरा कर सेवा की संपत्तियों पर कब्जा करने के लिए बाबा तरसेम सिंह की हत्या की आशंका जताते हुए सुरक्षा की मांग की थी। 

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