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प्राकृतिक संरचना को छेड़ना खतरे से खाली नहीं : डॉ. बिष्ट
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पंतनगर में पहाड़ दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में बोलते जैव प्रोद्योगिकी के निदेशक।
- फोटो : RUDRAPUR
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उच्च शिक्षा उन्नयन समिति के उपाध्यक्ष डॉ. बहादुर सिंह बिष्ट ने कहा कि प्रकृति की एक अपनी संरचना है। इसको छेड़ना खतरे से खाली नहीं है।
शुक्रवार को जैव प्रौद्योगिकी परिषद हल्दी में अंतरराष्ट्रीय पहाड़ दिवस पर बतौर मुख्य अतिथि डॉ. बिष्ट ने कहा कि प्रकृति और जैव विविधता के लिए कार्य करना प्रत्येक मनुष्य की प्राथमिकताओं में होना जरूरी है।
परिषद के निदेशक प्रो. डीके सिंह ने कहा कि हिमालयन क्षेत्र जैव संपदा का धनी है लेकिन अधिक मानवीय हस्तक्षेप के कारण इसका विघटन तेजी से हो रहा है। पर्यावरण हित में जहां जरूरी न हो, वहां हस्तक्षेप से बचना चाहिए। आईसीएआर-एनबीपीजीआर के पूर्व वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं विभागाध्यक्ष जर्म प्लाजम डॉ. मनोरंजन दत्ता ने कहा कि भविष्य में स्वस्थ पीढ़ियों के लिए जैव विविधता का संरक्षण बहुत जरूरी है। जैव विविधता के संरक्षण के लिए वर्तमान में जो फासले हैं, उनको भरने की आवश्यकता है। जैव संपदा पर सबका समान अधिकार है, इसलिए इसके संरक्षण में सबकी बराबर सहभागिता जरूरी है।
आईसीएआर-एनबीपीजीआर के विषय विशेषज्ञ डॉ. आईएस बिष्ट ने कहा कि प्रयोगशाला में शोध के साथ किसानों के ज्ञान को तवज्जो देना भी जरूरी है। परिषद के वैज्ञानिक अधिकारी व कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. मणिंद्र मोहन ने ग्लोबल वार्मिंग से जैव विविधता पर होने वाले नुकसान पर प्रकाश डाला।
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कार्यक्रम का संचालन परिषद् के वैज्ञानिक डॉ. सुमित पुरोहित ने किया। इस दौरान डॉ. कंचन कार्की, ओपी वार्ष्णेय, पूनम सिंह, मीना नेगी, सचिन शर्मा, चंद्र शेखर, केशव सिंह, अनुज कुमार, ललित मिश्रा, मनोज सिंह कनवाल, भूपाल सिंह, रेनू, लक्ष्मण, प्रदीप, महेंद्र व सभी शोधार्थी मौजूद थे।
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शुक्रवार को जैव प्रौद्योगिकी परिषद हल्दी में अंतरराष्ट्रीय पहाड़ दिवस पर बतौर मुख्य अतिथि डॉ. बिष्ट ने कहा कि प्रकृति और जैव विविधता के लिए कार्य करना प्रत्येक मनुष्य की प्राथमिकताओं में होना जरूरी है।
परिषद के निदेशक प्रो. डीके सिंह ने कहा कि हिमालयन क्षेत्र जैव संपदा का धनी है लेकिन अधिक मानवीय हस्तक्षेप के कारण इसका विघटन तेजी से हो रहा है। पर्यावरण हित में जहां जरूरी न हो, वहां हस्तक्षेप से बचना चाहिए। आईसीएआर-एनबीपीजीआर के पूर्व वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं विभागाध्यक्ष जर्म प्लाजम डॉ. मनोरंजन दत्ता ने कहा कि भविष्य में स्वस्थ पीढ़ियों के लिए जैव विविधता का संरक्षण बहुत जरूरी है। जैव विविधता के संरक्षण के लिए वर्तमान में जो फासले हैं, उनको भरने की आवश्यकता है। जैव संपदा पर सबका समान अधिकार है, इसलिए इसके संरक्षण में सबकी बराबर सहभागिता जरूरी है।
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आईसीएआर-एनबीपीजीआर के विषय विशेषज्ञ डॉ. आईएस बिष्ट ने कहा कि प्रयोगशाला में शोध के साथ किसानों के ज्ञान को तवज्जो देना भी जरूरी है। परिषद के वैज्ञानिक अधिकारी व कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. मणिंद्र मोहन ने ग्लोबल वार्मिंग से जैव विविधता पर होने वाले नुकसान पर प्रकाश डाला।
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कार्यक्रम का संचालन परिषद् के वैज्ञानिक डॉ. सुमित पुरोहित ने किया। इस दौरान डॉ. कंचन कार्की, ओपी वार्ष्णेय, पूनम सिंह, मीना नेगी, सचिन शर्मा, चंद्र शेखर, केशव सिंह, अनुज कुमार, ललित मिश्रा, मनोज सिंह कनवाल, भूपाल सिंह, रेनू, लक्ष्मण, प्रदीप, महेंद्र व सभी शोधार्थी मौजूद थे।