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Udham Singh Nagar News: मीना बाजार मेले में सिर्फ महिलाओं की दुकानदारी, पुरुषों का प्रवेश वर्जित
Fri, 23 Oct 2026 12:03 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Fri, 23 Oct 2026 12:03 AM IST
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सुल्तानपुर पट्टी में लगे मीना बाजार मेले में खरीददारी करती हुई महिलाएं
सुल्तानपुर पट्टी। नगर के साप्ताहिक बाजार में लगने वाले प्रसिद्ध मीना बाजार मेला अनूठी परंपरा के लिए प्रसिद्ध है। इस मेले में दुकानदार और खरीदार केवल महिलाएं होती हैं। यहां पुरुषों का प्रवेश पूरी तरह वर्जित रहता है।
इस ऐतिहासिक मेले की शुरुआत वर्ष 1930 में समाजसेवी ईश्वर दास ने विजयदशमी पर्व के एक दिन बाद की गई थी। इसके बाद से हर साल यह मेला दशहरे के एक दिन बाद आयोजित किया जाता है। मेले के दौरान रात में पायते वाली रामलीला मंचन की ओर से भरत मिलाप और राजतिलक के साथ रामलीला का समापन किया गया। मेले में पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। महिला पुलिस कर्मियों की विशेष तैनाती की गई थी ताकि मीना बाजार की परंपरा और सुरक्षा दोनों बनी रहें।
इनसेट
महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य
मीना बाजार मे चूड़ी, बिंदी, सिंदूर आदि शृंगार के सामान, कपड़े, खिलौने और घरेलू उपयोग की वस्तुओं की दुकानें लगती हैं। क्षेत्रवासियों के अनुसार इस मेले की शुरुआत का मकसद महिलाओं को एक ऐसा मंच देना था जहां वे बिना किसी झिझक के खरीदारी कर सकें। उन्हें छोटी-छोटी दुकानों से आत्मनिर्भर बनने की सीख भी मिलती थी।
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इस ऐतिहासिक मेले की शुरुआत वर्ष 1930 में समाजसेवी ईश्वर दास ने विजयदशमी पर्व के एक दिन बाद की गई थी। इसके बाद से हर साल यह मेला दशहरे के एक दिन बाद आयोजित किया जाता है। मेले के दौरान रात में पायते वाली रामलीला मंचन की ओर से भरत मिलाप और राजतिलक के साथ रामलीला का समापन किया गया। मेले में पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। महिला पुलिस कर्मियों की विशेष तैनाती की गई थी ताकि मीना बाजार की परंपरा और सुरक्षा दोनों बनी रहें।
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महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य
मीना बाजार मे चूड़ी, बिंदी, सिंदूर आदि शृंगार के सामान, कपड़े, खिलौने और घरेलू उपयोग की वस्तुओं की दुकानें लगती हैं। क्षेत्रवासियों के अनुसार इस मेले की शुरुआत का मकसद महिलाओं को एक ऐसा मंच देना था जहां वे बिना किसी झिझक के खरीदारी कर सकें। उन्हें छोटी-छोटी दुकानों से आत्मनिर्भर बनने की सीख भी मिलती थी।
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