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Udham Singh Nagar News: पारिस्थितिकी की दृष्टि से एक्वापोनिक्स एक स्थायी माॅडल
Tue, 27 Jun 2023 12:49 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Tue, 27 Jun 2023 12:49 AM IST
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पंतनगर में सम्मेलन पुस्तिका का विमोचन करते मुख्य अतिथि एवं परिषद के निदेशक।
पंतनगर। गहन शोध और नवाचार के साथ दीर्घकालीन सोच विकास के लिए अति आवश्यक है। एक्वापोनिक्स पारिस्थितिकी की दृष्टि से एक स्थायी माॅडल है जो एक्वाकल्चर के साथ बायोटेक की हाइड्रोपोनिक तकनीक को जोड़ता है। यह बात जैव प्रौद्योगिकी परिषद में आयोजित दो दिनी राष्ट्रीय सेमिनार के उद्घाटन सत्र में आईसीएआर-शीतजल मात्स्यिकी अनुसंधान निदेशालय भीमताल के निदेशक डाॅ. प्रमोद कुमार पांडेय ने कहीं।
उत्तराखंड जैव प्रौद्योगिकी परिषद (बायोटेक) एवं इंडियन सोसायटी ऑफ एनिमल प्रोडक्शन मैनेजमेंट की ओर से जैव प्रौद्योगिकी में आधुनिक चुनौतियां एवं अवसर, पशु उत्पादन में जैव प्रौद्योगिकी की भूमिका, जैव प्रौद्योगिकी में उद्यमिता विकास की संभावनाएं और वैज्ञानिक-कृषक संवाद पर विस्तार से चर्चा की गई।
बायोटेक के निदेशक डॉ. संजय कुमार ने युवाओं को नवीन विचारों के प्रति प्रेरित व जागरूक करते हुए मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया व आत्मनिर्भर भारत के लिए वैज्ञानिकों व किसानों के बीच आपसी संबंधों को मजबूत करने पर जोर दिया। साथ ही प्रयोगशाला से खेतों तक कृषि व पशुपालन में सामंजस्य बनाकर कार्य करने का आह्वान किया।
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पशु चिकित्सा विज्ञान महाविद्यालय के अधिष्ठाता डाॅ. एसपी सिंह ने बताया कि आज भी विश्व की 30 फीसदी जनसंख्या भुखमरी की समस्या से जूझ रही है। जिसका निदान जैव प्रौद्योगिकी आधारित फसलों के उत्पादन से ही संभव है। उन्होंने मिलेट्स को अच्छे पोषक व स्वास्थ्य का परिचायक बताया। कहा कि गुणवत्ता पूर्ण फसल उत्पादन से कुपोषण को कम किया जा सकता है।
डाॅ. आनंद प्रकाश चौधरी ने बताया कि भारत वैश्विक स्तर पर दुग्ध उत्पादन में पहले व मत्स्य में दूसरे स्थान पर है। भारत को पूर्ण रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए निर्यात में भागीदारी को बढ़ाना होगा। इसके लिए उद्यमिता और उद्योगों को बढ़ावा देना होगा।
कहा कि देश में 87 फीसदी से अधिक किसान ऐसे हैं, जिनके पास दो हेक्टेयर से भी कम भूमि है और वह बिना पशुपालन अपने आर्थिकी को सुदृढ़ नहीं बना सकते।
इस दौरान बायोटेक ने नैनो टेक्नोलॉजी से विकसित सैनिटाइजर भी लांच किया। सेमिनार पुस्तिका का विमोचन भी किया गया। तकनीकी सत्र में परिषद व इंडियन सोसायटी ऑफ एनिमल प्रोडक्शन एंड मैनेजमेंट की ओर से संयुक्त रूप से पशु उत्पादन एवं प्रबंधन विषय पर पूर्व विभागाध्यक्ष एलपीएम डाॅ. डीवी सिंह व वैज्ञानिक जैव प्रौद्योगिकी भारत सरकार डाॅ. पीयूष गोयल ने प्रतिभागियों को पशुधन सुधार एवं पशु उत्पादों के सतत् विकास पर विस्तार से जानकारी दी।
संचालन मनदीप रावत और डाॅ. वीना पांडे ने आभार जताया। इस दौरान वैज्ञानिक डाॅ. कंचन कार्की, डाॅ. मणिन्द्र मोहन, डाॅ. सुमित पुरोहित, डाॅ. साक्षी पैन्यूली, डाॅ. ज्योति पलोद, डाॅ. एमएस पाल, डाॅ. जेपी जयसवाल, डाॅ. एके गौर आदि थे।
वैज्ञानिक-कृषक संवाद में किसानों की समस्याओं का हुआ निवारण
पंतनगर। कार्यक्रम में किसानों की समस्याओं के हल करने के लिए वैज्ञानिक-कृषक संवाद का आयोजन किया गया। इसमें 125 किसानों ने प्रतिभाग किया और विशेषज्ञों से विभिन्न तकनीकी जानकारियां प्राप्त कीं। विशेषज्ञों में डाॅ. आरके शर्मा, डाॅ. विद्या सागर सिंह, डाॅ. गुरविन्दर सिंह एवं डाॅ. पीके पांडे ने बकरी, मुर्गी, गाय पालन को बढ़ावा देने और उनकी विभिन्न नस्लों की विस्तृत जानकारी दी। किसानों एवं पशुपालकों को घास की विभिन्न प्रजातियों और उनके पोषक तत्वों की जानकारी दी गई।
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युवाओं को दी उद्यमिता विकास की जानकारी
पंतनगर। उद्यमिता विकास पर तकनीकी सत्र का आयोजन किया गया। इसमें लगभग 100 प्रतिभागियों ने उद्यमिता विकास के लिए पूरी जानकारी प्राप्त की। विशेषज्ञ डाॅ. स्नेहा दोहरे व डाॅ. निर्देश सिंह ने तकनीकी प्रस्तुति देकर युवाओं को उद्यमिता विकास की मूलभूत चुनौतियों से अवगत कराया। डाॅ. दोहरे ने कहा कि राष्ट्र का उद्यमिता विकास से ही संभव है और एक छोटी सी रचनात्मक सोच से युवा उद्यमी बन सकता है।
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प्रतिभागियों ने ली नशा मुक्ति की प्रतिज्ञा
पंतनगर। निदेशक डाॅ. संजय कुमार ने अंतरराष्ट्रीय नशा विरोधक दिवस पर जिंदगी को हां व नशे को न थीम के तहत 400 प्रतिभागियों को नशामुक्ति की प्रतिज्ञा दिलाई। इस दौरान भविष्य में नशीली दवाओं के दुरुपयोग की रोकथाम में सहयोग का आह्वान करते हुए नशीली दवाओें के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक किया।
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उत्तराखंड जैव प्रौद्योगिकी परिषद (बायोटेक) एवं इंडियन सोसायटी ऑफ एनिमल प्रोडक्शन मैनेजमेंट की ओर से जैव प्रौद्योगिकी में आधुनिक चुनौतियां एवं अवसर, पशु उत्पादन में जैव प्रौद्योगिकी की भूमिका, जैव प्रौद्योगिकी में उद्यमिता विकास की संभावनाएं और वैज्ञानिक-कृषक संवाद पर विस्तार से चर्चा की गई।
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बायोटेक के निदेशक डॉ. संजय कुमार ने युवाओं को नवीन विचारों के प्रति प्रेरित व जागरूक करते हुए मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया व आत्मनिर्भर भारत के लिए वैज्ञानिकों व किसानों के बीच आपसी संबंधों को मजबूत करने पर जोर दिया। साथ ही प्रयोगशाला से खेतों तक कृषि व पशुपालन में सामंजस्य बनाकर कार्य करने का आह्वान किया।
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पशु चिकित्सा विज्ञान महाविद्यालय के अधिष्ठाता डाॅ. एसपी सिंह ने बताया कि आज भी विश्व की 30 फीसदी जनसंख्या भुखमरी की समस्या से जूझ रही है। जिसका निदान जैव प्रौद्योगिकी आधारित फसलों के उत्पादन से ही संभव है। उन्होंने मिलेट्स को अच्छे पोषक व स्वास्थ्य का परिचायक बताया। कहा कि गुणवत्ता पूर्ण फसल उत्पादन से कुपोषण को कम किया जा सकता है।
डाॅ. आनंद प्रकाश चौधरी ने बताया कि भारत वैश्विक स्तर पर दुग्ध उत्पादन में पहले व मत्स्य में दूसरे स्थान पर है। भारत को पूर्ण रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए निर्यात में भागीदारी को बढ़ाना होगा। इसके लिए उद्यमिता और उद्योगों को बढ़ावा देना होगा।
कहा कि देश में 87 फीसदी से अधिक किसान ऐसे हैं, जिनके पास दो हेक्टेयर से भी कम भूमि है और वह बिना पशुपालन अपने आर्थिकी को सुदृढ़ नहीं बना सकते।
इस दौरान बायोटेक ने नैनो टेक्नोलॉजी से विकसित सैनिटाइजर भी लांच किया। सेमिनार पुस्तिका का विमोचन भी किया गया। तकनीकी सत्र में परिषद व इंडियन सोसायटी ऑफ एनिमल प्रोडक्शन एंड मैनेजमेंट की ओर से संयुक्त रूप से पशु उत्पादन एवं प्रबंधन विषय पर पूर्व विभागाध्यक्ष एलपीएम डाॅ. डीवी सिंह व वैज्ञानिक जैव प्रौद्योगिकी भारत सरकार डाॅ. पीयूष गोयल ने प्रतिभागियों को पशुधन सुधार एवं पशु उत्पादों के सतत् विकास पर विस्तार से जानकारी दी।
संचालन मनदीप रावत और डाॅ. वीना पांडे ने आभार जताया। इस दौरान वैज्ञानिक डाॅ. कंचन कार्की, डाॅ. मणिन्द्र मोहन, डाॅ. सुमित पुरोहित, डाॅ. साक्षी पैन्यूली, डाॅ. ज्योति पलोद, डाॅ. एमएस पाल, डाॅ. जेपी जयसवाल, डाॅ. एके गौर आदि थे।
वैज्ञानिक-कृषक संवाद में किसानों की समस्याओं का हुआ निवारण
पंतनगर। कार्यक्रम में किसानों की समस्याओं के हल करने के लिए वैज्ञानिक-कृषक संवाद का आयोजन किया गया। इसमें 125 किसानों ने प्रतिभाग किया और विशेषज्ञों से विभिन्न तकनीकी जानकारियां प्राप्त कीं। विशेषज्ञों में डाॅ. आरके शर्मा, डाॅ. विद्या सागर सिंह, डाॅ. गुरविन्दर सिंह एवं डाॅ. पीके पांडे ने बकरी, मुर्गी, गाय पालन को बढ़ावा देने और उनकी विभिन्न नस्लों की विस्तृत जानकारी दी। किसानों एवं पशुपालकों को घास की विभिन्न प्रजातियों और उनके पोषक तत्वों की जानकारी दी गई।
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युवाओं को दी उद्यमिता विकास की जानकारी
पंतनगर। उद्यमिता विकास पर तकनीकी सत्र का आयोजन किया गया। इसमें लगभग 100 प्रतिभागियों ने उद्यमिता विकास के लिए पूरी जानकारी प्राप्त की। विशेषज्ञ डाॅ. स्नेहा दोहरे व डाॅ. निर्देश सिंह ने तकनीकी प्रस्तुति देकर युवाओं को उद्यमिता विकास की मूलभूत चुनौतियों से अवगत कराया। डाॅ. दोहरे ने कहा कि राष्ट्र का उद्यमिता विकास से ही संभव है और एक छोटी सी रचनात्मक सोच से युवा उद्यमी बन सकता है।
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प्रतिभागियों ने ली नशा मुक्ति की प्रतिज्ञा
पंतनगर। निदेशक डाॅ. संजय कुमार ने अंतरराष्ट्रीय नशा विरोधक दिवस पर जिंदगी को हां व नशे को न थीम के तहत 400 प्रतिभागियों को नशामुक्ति की प्रतिज्ञा दिलाई। इस दौरान भविष्य में नशीली दवाओं के दुरुपयोग की रोकथाम में सहयोग का आह्वान करते हुए नशीली दवाओें के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक किया।