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अब पेड़ों पर लदे होंगे फाइबर से भरपूर 800 ग्राम के अमरूद
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पंतनगर में पेड़ पर लदे अमरूद दिखाते वैज्ञानिक।
- फोटो : RUDRAPUR
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पंतनगर। अब वह दिन दूर नहीं जब अमरूद के पेड़ सात-आठ सौ ग्राम तक के फाइबर से भरपूर फलों से लदे होंगे। जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने बड़े आकार के अमरूद उत्पादन की तकनीक विकसित करने में सफलता हासिल की है।
स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ने के साथ ही वैश्विक स्तर पर गुणवत्तायुक्त फलों की मांग बढ़ गई है। इन फलों की लगातार बढ़ती मांग के साथ बाजार की प्रतिस्पर्धा ने किसानों को अधिक मात्रा में उत्पादन करने के लिए प्रोत्साहित किया है। अमरूद अपने फाइबर, उच्च पोषण और औषधीय गुणों के कारण वर्तमान परिदृश्य में बहुत ही महत्वपूर्ण फसल बनकर उभरा है। लगभग चार वर्ष पहले रायपुर (छत्तीसगढ़) से मुलायम मांसल, बड़े आकार और कम बीज वाले अमरूद की प्रजाति वीएनआर-बीही पंतनगर विवि में लाई गई थी।
इसे पीएफडीसी परियोजना के तहत एचआरसी पत्थरचट्टा में उच्च तकनीक (उच्च घनत्व रोपण, ड्रिप फर्टिगेशन और मल्चिंग) से लगाया गया। अमरूद कम पानी की जरूरत वाली फसल है। इसमें मिट्टी जनित रोगों के लगने सहित बाढ़ के दौरान फलों की गुणवत्ता में कमी आ जाती है। वैज्ञानिकों ने इसके पौधे प्लास्टिक मल्चिंग के साथ रोपे और विभिन्न ड्रिप फर्टिगेशन उपचारों के बाद मूल्यांकन किया। साथ ही इसमें उर्वरकों की अनुशंसित खुराक (आरडीएफ) के साथ अनुमानित पानी की आवश्यकता का 100, 80 और 60 प्रतिशत प्रयोग किया गया। अपरिपक्व अवस्था में भी बड़े आकार और नरम गूदा होने के बावजूद यह प्रजाति बारिश के मौसम में बीमारियों और कीटों से प्रभावित पाई गई।
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यह है तकनीक
पंतनगर। तकनीक विकसित करने वाले उद्यान विभाग के प्राध्यापक डॉ. वीपी सिंह, प्राध्यापक सिंचाई एंड ड्रेनेज इंजीनियरिंग डॉ. पीके सिंह एवं सह प्राध्यापक डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि नमी के कारण इस क्षेत्र में उगाई जाने वाली अमरूद की प्रमुख किस्में अधिक हैं। तराई में उच्च तापमान बना रहता है। इसका मुकाबला करने के लिए फसल नियमन अभ्यास (विवि द्वारा विकसित एक पत्ती जोड़ी प्ररोह प्रूनिंग तकनीक) का पालन पूरे बाग में किया गया। यहां 80 प्रतिशत डीआई और 100 माइक्रोन प्लास्टिक मल्च के साथ 100 प्रतिशत आरडीएफ युक्त उर्वरक की खुराक दी गई। सर्दियों का मौसम वीएनआर-बीही के उच्च गुणवत्ता वाले अमरूद उगाने के लिए सबसे अच्छा पाया गया। इसके अलावा वैज्ञानिकों ने फर्टिगेशन शेड्यूल में 50 ग्राम बोरेक्स जोड़ने की भी संस्तुति की। इस तकनीक से अलग-अलग फलों का वजन 500 से 750 ग्राम के बीच पाया गया। इस प्रजाति के उत्पादन से अन्य पारंपरिक किस्मों की तुलना में कई गुना अधिक कीमत मिलती है।
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स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ने के साथ ही वैश्विक स्तर पर गुणवत्तायुक्त फलों की मांग बढ़ गई है। इन फलों की लगातार बढ़ती मांग के साथ बाजार की प्रतिस्पर्धा ने किसानों को अधिक मात्रा में उत्पादन करने के लिए प्रोत्साहित किया है। अमरूद अपने फाइबर, उच्च पोषण और औषधीय गुणों के कारण वर्तमान परिदृश्य में बहुत ही महत्वपूर्ण फसल बनकर उभरा है। लगभग चार वर्ष पहले रायपुर (छत्तीसगढ़) से मुलायम मांसल, बड़े आकार और कम बीज वाले अमरूद की प्रजाति वीएनआर-बीही पंतनगर विवि में लाई गई थी।
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इसे पीएफडीसी परियोजना के तहत एचआरसी पत्थरचट्टा में उच्च तकनीक (उच्च घनत्व रोपण, ड्रिप फर्टिगेशन और मल्चिंग) से लगाया गया। अमरूद कम पानी की जरूरत वाली फसल है। इसमें मिट्टी जनित रोगों के लगने सहित बाढ़ के दौरान फलों की गुणवत्ता में कमी आ जाती है। वैज्ञानिकों ने इसके पौधे प्लास्टिक मल्चिंग के साथ रोपे और विभिन्न ड्रिप फर्टिगेशन उपचारों के बाद मूल्यांकन किया। साथ ही इसमें उर्वरकों की अनुशंसित खुराक (आरडीएफ) के साथ अनुमानित पानी की आवश्यकता का 100, 80 और 60 प्रतिशत प्रयोग किया गया। अपरिपक्व अवस्था में भी बड़े आकार और नरम गूदा होने के बावजूद यह प्रजाति बारिश के मौसम में बीमारियों और कीटों से प्रभावित पाई गई।
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यह है तकनीक
पंतनगर। तकनीक विकसित करने वाले उद्यान विभाग के प्राध्यापक डॉ. वीपी सिंह, प्राध्यापक सिंचाई एंड ड्रेनेज इंजीनियरिंग डॉ. पीके सिंह एवं सह प्राध्यापक डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि नमी के कारण इस क्षेत्र में उगाई जाने वाली अमरूद की प्रमुख किस्में अधिक हैं। तराई में उच्च तापमान बना रहता है। इसका मुकाबला करने के लिए फसल नियमन अभ्यास (विवि द्वारा विकसित एक पत्ती जोड़ी प्ररोह प्रूनिंग तकनीक) का पालन पूरे बाग में किया गया। यहां 80 प्रतिशत डीआई और 100 माइक्रोन प्लास्टिक मल्च के साथ 100 प्रतिशत आरडीएफ युक्त उर्वरक की खुराक दी गई। सर्दियों का मौसम वीएनआर-बीही के उच्च गुणवत्ता वाले अमरूद उगाने के लिए सबसे अच्छा पाया गया। इसके अलावा वैज्ञानिकों ने फर्टिगेशन शेड्यूल में 50 ग्राम बोरेक्स जोड़ने की भी संस्तुति की। इस तकनीक से अलग-अलग फलों का वजन 500 से 750 ग्राम के बीच पाया गया। इस प्रजाति के उत्पादन से अन्य पारंपरिक किस्मों की तुलना में कई गुना अधिक कीमत मिलती है।

पंतनगर में विकसित तकनीक से उगाए गए अमरूद।- फोटो : RUDRAPUR