ऊधमसिंह नगर से खुल रहे विदेशी कनेक्शन: गदरपुर के बाद बाजपुर में सिम बॉक्स नेटवर्क का खुलासा, बढ़ी चिंता
ऊधमसिंह नगर में विदेशी आपराधिक गतिविधियां पैर पसार रही हैं। अब अपराध की कड़ी सिर्फ स्थानीय नेटवर्क तक सीमित नहीं रही है। पिछले कुछ वर्षों में जिले में सामने आए अलग-अलग मामलों ने अपराध के बदलते रास्तों की ओर इशारा किया है।
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ऊधमसिंह नगर में विदेशी आपराधिक गतिविधियां पैर पसार रही हैं। अब अपराध की कड़ी सिर्फ स्थानीय नेटवर्क तक सीमित नहीं रही हैं। पिछले कुछ वर्षों में जिले में सामने आए अलग-अलग मामलों ने अपराध के उन बदलते रास्तों की ओर इशारा किया है जिनकी कड़ियां सीमा और इंटरनेट की दुनिया तक जाती दिखाई दीं। इससे पहले वर्ष 2024 में सितारगंज में गन्ने के खेत में हुए सुतली बम के प्रयोग में पाकिस्तानी कनेक्शन सामने आया था।
कभी गदरपुर में अवैध रूप से रह रही बांग्लादेशी महिला की गिरफ्तारी ने दस्तावेज की सुरक्षा पर सवाल खड़े किए तो नानकमत्ता के बाबा तरसेम सिंह हत्याकांड में शूटरों की लोकेशन कभी बांग्लादेश तो कभी नेपाल और कनाडा दिखाए जाने से जांच एजेंसियां उलझी रहीं। बाद में शूटर हरिद्वार में मिला। अब बाजपुर में सामने आया सिम बॉक्स नेटवर्क इस पूरी तस्वीर को अपराध के नए डिजिटल रूप से जोड़ रहा है।
एसटीएफ साइबर कुमाऊं ने बाजपुर से कादिर को गिरफ्तार किया। विदेशी साइबर कॉल को भारतीय मोबाइल नंबरों के जरिए सामान्य कॉल की तरह बदलने का खेल चल रहा था। इसमें बांग्लादेश का कनेक्शन सामने आया है।
घुसपैठ से डिजिटल नेटवर्क तक बदला अपराध का चेहरा
पहले विदेशी कनेक्शन का मतलब सीमा पार से आने-जाने वाले लोगों या सामान की आवाजाही से जोड़ा जाता था। अब मोबाइल, इंटरनेट कॉल, डिजिटल प्लेटफॉर्म और वर्चुअल संचार ने दूरी की अहमियत कम कर दी है। इससे जांच एजेंसियों के सामने चुनौती भी बदल गई है। अब किसी नेटवर्क की तलाश सिर्फ सड़क, सीमा या ठिकाने तक नहीं बल्कि मोबाइल डेटा और डिजिटल संपर्कों की परतों तक पहुंच रही है।
स्थानीय सिर्फ मोहरा, चाल तो विदेशों से खेली जा रही
हथियार तस्करी से लेकर सिम बॉक्स मामले में सामने आया है कि विदेश में बैठ कर अभियुक्त स्थानीय लोगों को अपने साथ जोड़ते हैं। जिन पर पुलिस या सुरक्षा एजेंसी को शक बेहद कम होता है। यह शातिर विदेशी उन लोगों को निशाना बनाते हैं जिनका पिछला कोई आपराधिक इतिहास न हो और जो गरीब तबके का हो। पैसों की जरूरत का फायदा उठाकर यह लोग विदेश से नेटवर्क को संचालित करते हैं।
पिछले कुछ वर्षों में अपराधियों की सक्रियता बढ़ी हैं लेकिन गिरफ्तारी के आंकड़ों में भी बढ़ोतरी हुई है। किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा।- नीलेश आनंद भरणे, आईजी एसटीएफ