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कारगिल युद्ध में घायल सैनिक की उपेक्षा करने का आरोप

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sun, 28 Jul 2019 12:48 AM IST
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Accused of neglecting injured soldiers in Kargil war
कारगिल युद्ध में घायल जवान। - फोटो : KASHIPUR
काशीपुर। कारगिल में जीत का परचम लहराने के 20 वर्षों बाद भी पूरा देश उस खुशी को जी रहा है। वहीं उस जीत को कुछ नायकों को दुश्मनों पर मिली जीत पर खुशी तो है लेकिन अपनों से मिली उपेक्षा पर अफसोस भी है। ऐसी ही एक टीस हवलदार विनोद नेगी के दिल में भी है। जम्मू-कश्मीर सरकार की ओर से की गई आर्थिक सहायता की घोषणा अब तक पूरी नहीं हुई है।
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मूलरूप से जिला चमोली के गैरसैंण निवासी हवलदार विनोद नेगी वर्तमान में मानपुर रोज स्थित आरकेपुरम कॉलोनी में परिवार के साथ रहते है। उन्होंने कारगिल युद्ध की यादों को साझा करते हुए बताया कि उनकी कंपनी (18वीं गढ़वाल) कर्नल राज बैंजल के नेतृत्व में कारगिल में पाकिस्तानी सेना से लोहा ले रही थी। इस दौरान उनकी टीम पर पाक सेना ने बम फेंक दिया था, जिससे वह और कर्नल राज घायल हो गए थे।
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इलाज के लिए उन्हें श्रीनगर और दिल्ली के अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां लंबे इलाज के बाद वह ठीक हो सके। इसके बाद सेना ने 28 अगस्त 2017 को उन्हें हवलदार पद से मेडिकल पेंशन देकर सेवानिवृत्त कर दिया। विनोद नेगी ने बताया कि सेवानिवृत के बाद उन्हें केंद्र और राज्य सरकार ने कोई सहायता नहीं दी।
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बताया कि जम्मू-कश्मीर सरकार ने सहायता देने का वादा तो किया लेकिन उसे आज तक पूरा नहीं किया। वर्तमान में वह उपनल के माध्यम से एक सरकारी विभाग में मात्र सात हजार रुपये के मासिक वेतन पर काम कर रहे हैं। उनका आरोप है कि केंद्र और राज्य सरकार से सहायता के लिए कई प्रार्थना पत्र भेज हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
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