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Udham Singh Nagar News: इंतजार में पथराईं आंखों से फूट पड़ी खुशी की धारा
Thu, 07 Mar 2024 01:22 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Thu, 07 Mar 2024 01:22 AM IST
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रुद्रपुर। कई दशकों से जमीन पर मालिकाना हक का इंतजार कर रहे बस्तियों के गरीबों को जब मालिकाना हक मिला तो उनकी आंखों से आंसू निकल आए। मुख्यमंत्री ने परिवारों को स्वामित्व पत्र दिए तो पंडाल में बैठे हजारों गरीब लाभार्थियों के चेहरे पर चमक देखने लायक थी। बुजुर्ग लाभार्थियों का कहना था कि अब उनको अतिक्रमणकारी नहीं कहा जाएगा।
नजूल भूमि पर 20 हजार से अधिक आबादी काबिज हैं। इनमें से ज्यादातर परिवार गरीब हैं। नजूल पर काबिज परिवार लंबे समय से मालिकाना हक की मांग कर रहे हैं। सरकारों ने कई आश्वासन तो दिया मगर धरातल पर साकार नहीं हो सका था। कई बार लोगों ने चुनाव बहिष्कार तक का ऐलान कर दिया था। मुख्यमंत्री धामी की सरकार में गरीबों की सुध ली गई और मालिकाना हक देने की प्रक्रिया को अंजाम तक पहुंचाया भी गया। बुधवार को गांधी पार्क में पहले चरण में भूमि का स्वामित्व पत्र लेने पहुंचे 2600 लोग बेहद खुश थे।
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हम स्थायी बिजली, पानी के लिए तरसते रहे। दैनिक मजदूरी कर किसी तरह जीविकोपार्जन करते हैं। हमें अतिक्रमणकारी का तमगा दिया गया। आशंका रहती थी कि न जाने कब उनको बेदखल कर दिया जाए। आज हक मिल रहा है। सबके लिए बड़ा दिन है। - कुंवर पाल, मोहल्ला रंपुरा।
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अपना आशियाना न होने के चलते व्यवसाय करने आदि को स्वनिधि योजना आदि का लाभ भी नहीं मिल पाता है। तीन गायों का पालन कर किसी तरह परिवार चलाते हैं। आज कई दशकों की मुराद पूरी हो गई। पहली बार सरकार ने अति गरीबों की सुध ली है। - हरिबाबू, मोहल्ला रंपुरा।
मेरी उम्र 90 वर्ष है। आंखों से बहुत ही कम दिखता है। मालिकाना हक का सपना देखते-देखते पति की मृत्यु हो गई। बच्चों को हम एक अदद घर भी न दे सके। जीवन की सबसे बड़ी खुशहाली आज धामी सरकार दे रही है। इसका सपना देखते-देखते आंखें पथरा गई थीं। - पार्वती देवी, मोहल्ला पहाड़गंज।
मेरे ससुर कन्हैया ई-रिक्शा चलाते हैं। पति भी मजदूरी करते हैं। महंगाई के दौर में किसी तरह परिवार का गुजारा हो रहा है। अपने आशियाने के मालिकाना हक के लिए वर्षों से मांग चल रही है। आज जाकर वह दिन आया है। इससे ऐसे परिवारों में उत्साह है। - मोनिका कोली, मोहल्ला महाड़गंज।
नजूल भूमि पर 20 हजार से अधिक आबादी काबिज हैं। इनमें से ज्यादातर परिवार गरीब हैं। नजूल पर काबिज परिवार लंबे समय से मालिकाना हक की मांग कर रहे हैं। सरकारों ने कई आश्वासन तो दिया मगर धरातल पर साकार नहीं हो सका था। कई बार लोगों ने चुनाव बहिष्कार तक का ऐलान कर दिया था। मुख्यमंत्री धामी की सरकार में गरीबों की सुध ली गई और मालिकाना हक देने की प्रक्रिया को अंजाम तक पहुंचाया भी गया। बुधवार को गांधी पार्क में पहले चरण में भूमि का स्वामित्व पत्र लेने पहुंचे 2600 लोग बेहद खुश थे।
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हम स्थायी बिजली, पानी के लिए तरसते रहे। दैनिक मजदूरी कर किसी तरह जीविकोपार्जन करते हैं। हमें अतिक्रमणकारी का तमगा दिया गया। आशंका रहती थी कि न जाने कब उनको बेदखल कर दिया जाए। आज हक मिल रहा है। सबके लिए बड़ा दिन है। - कुंवर पाल, मोहल्ला रंपुरा।
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अपना आशियाना न होने के चलते व्यवसाय करने आदि को स्वनिधि योजना आदि का लाभ भी नहीं मिल पाता है। तीन गायों का पालन कर किसी तरह परिवार चलाते हैं। आज कई दशकों की मुराद पूरी हो गई। पहली बार सरकार ने अति गरीबों की सुध ली है। - हरिबाबू, मोहल्ला रंपुरा।
मेरी उम्र 90 वर्ष है। आंखों से बहुत ही कम दिखता है। मालिकाना हक का सपना देखते-देखते पति की मृत्यु हो गई। बच्चों को हम एक अदद घर भी न दे सके। जीवन की सबसे बड़ी खुशहाली आज धामी सरकार दे रही है। इसका सपना देखते-देखते आंखें पथरा गई थीं। - पार्वती देवी, मोहल्ला पहाड़गंज।
मेरे ससुर कन्हैया ई-रिक्शा चलाते हैं। पति भी मजदूरी करते हैं। महंगाई के दौर में किसी तरह परिवार का गुजारा हो रहा है। अपने आशियाने के मालिकाना हक के लिए वर्षों से मांग चल रही है। आज जाकर वह दिन आया है। इससे ऐसे परिवारों में उत्साह है। - मोनिका कोली, मोहल्ला महाड़गंज।