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कीटों से फसल को बचाएगा सौर चालित प्रकाश प्रपंच

Wed, 08 Oct 2014 05:34 AM IST
Udham singh nagar
Udham singh nagar Updated Wed, 08 Oct 2014 05:34 AM IST
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पंतनगर। कृषि विज्ञान केंद्र ज्योलीकोट ने पर्वतीय क्षेत्रों में फसलों को कीटों से बचाने के लिए सौर चालित प्रकाश प्रपंच के साथ ही जंगली जानवरों से फसलों की सुरक्षा को यंत्र विकसित किया है। किसान मेले में इसका प्रदर्शन किया गया। केंद्र के मृदा विज्ञान विशेषज्ञ अरविंद कुमार त्यागी ने बताया कि प्रकाश प्रपंच में पीले रंग की पुरानी बाल्टी में एसएमडी लाइट के नौ बल्ब लगाए गए हैं। साथ ही बाल्टी के अंदर आधा पानी भरकर शेष हिस्से में ग्रीस लगा दिया जाता है। कीट बल्ब की रोशनी में आते हैं और ग्रीस में चिपक जाते हैं। उन्होंने बताया कि सौर ऊर्जा से चलने वाला यह उपकरण 12 घंटे से अधिक चलता है। इसे 7.2 एएच की बैटरी लगाकर स्वचालित बनाया गया है, जो रात में स्वत: चालू हो जाता है और सुबह होते ही बंद हो जाता है। यह सब्जियों और धान आदि फसल को कीटों से बचाने के लिए कम खर्च पर कारगर उपाय है। वहीं पर्वतीय क्षेत्र में जंगली जानवरों से फसल को बचाने के लिए अब तक कोई ठोस विधि नहीं है। किसान रात भर जागकर ध्वनि उत्पन्न कर जंगली जानवरों को भगाते हैं। लेकिन ज्योलीकोट कृषि विज्ञान केंद्र ने पानी चालित फसल सुरक्षा यंत्र विकसित किया है। इसमें यंत्र में लगे पंखे में पानी ऊपर से नीचे की ओर गिराया जाता है। पंखे के बगल में एक टीन का टुकड़ा लगाया जाता है। आवाज आने से जंगली जानवर डरकर खेतों की ओर रुख नहीं करते। गन्ने की नई प्रजातियों की दी जानकारी
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पंतनगर। कृषि विज्ञान केंद्र हरिद्वार के लगे स्टाल में किसानों को गन्ने की नई प्रजाति यूपी-05125 और सीओएसई-7250 की जानकारी दी गई। केंद्र के राजेश कुमार ने बताया कि जहां सामान्य प्रजाति से 600 से 700 क्विंटल प्रति हेक्टेअर गन्ने का उत्पादन होता है। वहीं, इन नई प्रजातियों से 11 सौ से 12 सौ क्विंटल प्रति हेक्टेअर गन्ने की पैदावार प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने बताया कि यूपी-05125 प्रजाति के गन्ने में चीनी की मात्रा ज्यादा होती है, इसलिए चीनी मिलों में भी इसकी मांग ज्यादा है।
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