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Udham Singh Nagar News: हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी पर 4.72 लाख का जुर्माना
Sun, 21 Jun 2026 12:43 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Sun, 21 Jun 2026 12:43 AM IST
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रुद्रपुर। बीमाधारक को समय पर कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध न कराने पर हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी पर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने सेवा में कमी का दोषी मानते हुए 4.72 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। इसके अलावा क्षतिपूर्ति और वाद व्यय भी देने के निर्देश दिए गए हैं।
काशीपुर के गढ़ीनेगी गणेश नगर निवासी शिवम कालड़ा और अंशिका कालड़ा उर्फ गुलाटी ने उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में परिवाद दायर कर बताया था कि परिवार की सदस्य सुनीता कालड़ा के नाम से हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी ली गई थी जिसकी वैधता एक अप्रैल 2024 से 31 मार्च 2025 तक थी। बाद में पॉलिसी का नवीनीकरण भी कराया गया।
परिवाद के अनुसार, पॉलिसी में 10 लाख रुपये का रिस्क कवर उपलब्ध था। इसी दौरान सुनीता की तबीयत बिगड़ गई। उन्हें पहले काशीपुर और बाद में दिल्ली के उच्च चिकित्सा केंद्र में भर्ती कराया गया। अस्पताल में भर्ती होने के बाद बीमा कंपनी से कैशलेस सुविधा के लिए आवेदन किया गया लेकिन कंपनी ने दावा स्वीकार नहीं किया।
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परिजनों का कहना था कि कैशलेस सुविधा न मिलने के कारण इलाज में आर्थिक परेशानी झेलनी पड़ी। बाद में मरीज को ऋषिकेश एम्स ले जाया गया जहां आयुष्मान कार्ड के माध्यम से इलाज कराया गया। इलाज के दौरान सुनीता की मौत हो गई। मामले की सुनवाई के बाद आयोग के अध्यक्ष राजीव कुमार खरे, सदस्यों नवीन चंद्र चंदोला और डॉ. मनीला की खंडपीठ ने पाया कि बीमा कंपनी ने सेवा में कमी बरती। आयोग ने बीमा कंपनी को 4.72 लाख रुपये की धनराशि छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित अदा करने, पांच हजार रुपये क्षतिपूर्ति और दो हजार रुपये वाद व्यय देने का आदेश दिया है।
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काशीपुर के गढ़ीनेगी गणेश नगर निवासी शिवम कालड़ा और अंशिका कालड़ा उर्फ गुलाटी ने उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में परिवाद दायर कर बताया था कि परिवार की सदस्य सुनीता कालड़ा के नाम से हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी ली गई थी जिसकी वैधता एक अप्रैल 2024 से 31 मार्च 2025 तक थी। बाद में पॉलिसी का नवीनीकरण भी कराया गया।
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परिवाद के अनुसार, पॉलिसी में 10 लाख रुपये का रिस्क कवर उपलब्ध था। इसी दौरान सुनीता की तबीयत बिगड़ गई। उन्हें पहले काशीपुर और बाद में दिल्ली के उच्च चिकित्सा केंद्र में भर्ती कराया गया। अस्पताल में भर्ती होने के बाद बीमा कंपनी से कैशलेस सुविधा के लिए आवेदन किया गया लेकिन कंपनी ने दावा स्वीकार नहीं किया।
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परिजनों का कहना था कि कैशलेस सुविधा न मिलने के कारण इलाज में आर्थिक परेशानी झेलनी पड़ी। बाद में मरीज को ऋषिकेश एम्स ले जाया गया जहां आयुष्मान कार्ड के माध्यम से इलाज कराया गया। इलाज के दौरान सुनीता की मौत हो गई। मामले की सुनवाई के बाद आयोग के अध्यक्ष राजीव कुमार खरे, सदस्यों नवीन चंद्र चंदोला और डॉ. मनीला की खंडपीठ ने पाया कि बीमा कंपनी ने सेवा में कमी बरती। आयोग ने बीमा कंपनी को 4.72 लाख रुपये की धनराशि छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित अदा करने, पांच हजार रुपये क्षतिपूर्ति और दो हजार रुपये वाद व्यय देने का आदेश दिया है।