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बन्नाखेड़ा खत्ते में 28 मवेशियों की संदिग्ध हालात में मौत

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sat, 04 Jan 2020 12:45 AM IST
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28 cattle died under suspicious conditions in Bannakheda Khate
गुलाम नवी गुर्जर। - फोटो : BAZPUR
बाजपुर। तराई पश्चिमी वन रेंज बन्नाखेड़ा के प्लॉट संख्या 29 कठानी खत्ते में संदिग्ध हालात में 28 मवेशियों की मौत हो गई। इनमें आठ दुधारू भैंसें, 12 गाभिन भैंसें और आठ पड्डे शामिल हैं, जबकि दस मवेशियों की हालत नाजुक बनी है। सूचना पर तहसीलदार जोगा सिंह ने टीम के साथ जांच की। मवेशियों की घटना से प्रशासन, जंगलात और पशु चिकित्सा विभाग में खलबली मची है।
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खत्ता निवासी गुर्जर गुलाम नवी ने बताया कि रोजाना की तरह बुधवार को उसने अपने 55 मवेशियों को चारा खिलाया था। गौशाला में बृहस्पतिवार शाम चार बजे एक भैंस मृत मिली जबकि खत्ते के इर्द-गिर्द अन्य मवेशी अचेत अवस्था में पड़े मिले। देखते ही देखते एक के बाद एक 20 मवेशियों की मौत हो गई।
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सूचना पर पशु चिकित्सक डॉ. जीएस खड़ायत, डॉ. नंदन प्रसाद, डॉ. जगमोहन कांबोज, विनोद कुमार, बहादुर राम ने मौके पर पहुंचकर मवेशियों का इलाज शुरू कर दिया। इलाज के दौरान आठ मवेशियों की मौत हो गई। टीम ने मृत पशुओं का पोस्टमार्टम भी किया। हल्का पटवारी नवाब अली ने रिपोर्ट तैयार कर तहसीलदार को सौंपी है।
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वहां हरमीत नीटू, परमजीत राजपूत, राजू, वीरेंद्र बिष्ट, दिलबाग सिंह, मनजीत सिंह, मोहन सिंह, कश्मीर सिंह, जसविंदर सिंह, जसपाल सिंह, अमर सिंह, शेर मोहम्मद, नूर अली, शरीफ अली, जाहिद अली आदि थे।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ठंड लगने से हुई मौत की पुष्टि
बाजपुर। पशु चिकित्साधिकारी डॉ. जीएस खड़ायत ने बताया कि 20 मवेशियों के पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह ठंड लगना है। खुले में रहने से मवेशियों को ठंड लगी हैै। चारे में किसी भी प्रकार के जहर की पुष्टि नहीं हुई। डॉ. खड़ायत के अनुसार 27 अन्य मवेशियों का इलाज चल रहा है।
साहब! यह कुदरत की मार है या बदकिस्मती
सुनील दिवाकर
बाजपुर। कठानी खत्ता में दुधारू सहित अन्य मवेशियों की मौत से गुर्जर गुलाम नवी का परिवार बेसहारा हो गया है। वह बिलखते हुए कह रहे थे कि साहब! इसे कुदरत की मार कहें या बदकिस्मती।
नवी 1989 में लामाचौड़ से आकर परिवार के साथ बसा था। गुर्जर का परिवार पंजाबी, मुर्रा सहित अन्य नस्लों के दुधारू गाय-भैंसों का पालन कर आजीविका चला रहा था। तीस साल के अंतराल में गुर्जर परिवार की आर्थिक स्थिति दुग्ध व्यवसाय से सुधर रही थी। गुर्जर का पूरा परिवार दिनभर पशुओं की देखभाल में लगा रहता था।
बृहस्पतिवार का दिन गुर्जर परिवार के मवेशियों के लिए काल बनकर आया। परिवार के लोग समझ नहीं पा रहे थे कि उनके साथ यह क्या हो रहा है। नवी ने बताया कि तीस साल के भीतर वंश के आधार पर मेरे पास 55 मवेशी हो गए। मैंने इनका पालन पोषण अपने जिगर के टुकड़ो की तरह किया। इनकी मौत होने से परिवार में कोहराम मचा हुआ है।

आसपास के गुर्जर परिवार भी घटना को लेकर सदमे मेें है। नवी की पत्नी जुबैदा और बेटी आमना ने बृहस्पतिवार से भोजन तक नहीं किया है। आसपास के लोगों ने भी गमगीन परिवार का हालचाल जाना।

बाजपुर के बन्नाखेड़ा रेंज में मवैशियों की मौत पर जांच पड़ताल करते तहसीलदार जोगा सिंह और अन्य।

बाजपुर के बन्नाखेड़ा रेंज में मवैशियों की मौत पर जांच पड़ताल करते तहसीलदार जोगा सिंह और अन्य।- फोटो : BAZPUR

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