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मेडिकल कॉलेज: 80 लाख में ध्वस्त होगा ढांचा, 265 करोड़ से बनेगा नया भवन
Sat, 30 Sep 2023 12:30 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Sat, 30 Sep 2023 12:30 AM IST
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रुद्रपुर में मेडिकल काॅलेज का निर्माणाधीन ढांचा। संवाद
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रुद्रपुर। निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज का ढांचा ध्वस्त करने के लिए 80 लाख रुपये का टेंडर निकाल दिया गया है। वहीं भवन के ध्वस्त होने के बाद 265 करोड़ रुपये की लागत से ग्रेटर नोएडा की लीसा इंजीनियर्स कंपनी नया निर्माण शुरू करेगी। मेडिकल कॉलेज में विद्यार्थियों के लिए छात्रावास, एकेडमिक बिल्डिंग, एडमिनिस्ट्रेशन ब्लॉक आदि का निर्माण होगा।
मेडिकल कॉलेज के चहारदीवारी का भूमि पूजन बुधवार को ही पेयजल निगम के अधिशासी अभियंताओं ने कर दिया है। पेयजल निगम की ओर से निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज ने ध्वस्त करने के लिए 80 लाख रुपये का टेंडर निकाला है। बता दें कि, मेडिकल कॉलेज छात्रावास के 14 भवनों की नींव, ढांचा और कॉलम को ध्वस्त किया जाएगा। वर्षों पहले मेडिकल कॉलेज के छात्रावास, प्रशासनिक भवन, चिकित्सकों के आवास निर्माण का जिम्मा ईपीआईएल कंपनी को दिया गया था। शिकायत मिलने के बाद शासन की ओर से पेयजल निर्माण इकाई को कार्यदायी संस्था बना दिया गया। उसके बाद पेयजल निगम ने आईआईटी रुड़की से पुराने निर्माण की जांच कराई तो विशेषज्ञों ने छात्रावास की नींव और ढांचे पर कई आपत्तियां लगाई थीं। स्वास्थ्य सचिव ने निर्माणाधीन भवन को ध्वस्त कर नए सिरे से निर्माण करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद पेयजल निगम के अभियंताओं ने मेडिकल कॉलेज के ढांचे को तोड़ने के लिए मुख्यालय में प्रस्ताव भेजा था।
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मेडिकल कॉलेज को ध्वस्त करने के लिए मुख्यालय में प्रस्ताव भेजा था। अनुमति मिलने के बाद लगभग 80 लाख रुपये का टेंडर निकाल दिया गया है। भवन को ध्वस्त करने के बाद नए सिरे से दूसरी कंपनी 265 करोड़ रुपये की लागत से इसका निर्माण करेगी। -एससी भट्ट, सहायक अभियंता, पेयजल निर्माण निगम।
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मेडिकल कॉलेज के चहारदीवारी का भूमि पूजन बुधवार को ही पेयजल निगम के अधिशासी अभियंताओं ने कर दिया है। पेयजल निगम की ओर से निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज ने ध्वस्त करने के लिए 80 लाख रुपये का टेंडर निकाला है। बता दें कि, मेडिकल कॉलेज छात्रावास के 14 भवनों की नींव, ढांचा और कॉलम को ध्वस्त किया जाएगा। वर्षों पहले मेडिकल कॉलेज के छात्रावास, प्रशासनिक भवन, चिकित्सकों के आवास निर्माण का जिम्मा ईपीआईएल कंपनी को दिया गया था। शिकायत मिलने के बाद शासन की ओर से पेयजल निर्माण इकाई को कार्यदायी संस्था बना दिया गया। उसके बाद पेयजल निगम ने आईआईटी रुड़की से पुराने निर्माण की जांच कराई तो विशेषज्ञों ने छात्रावास की नींव और ढांचे पर कई आपत्तियां लगाई थीं। स्वास्थ्य सचिव ने निर्माणाधीन भवन को ध्वस्त कर नए सिरे से निर्माण करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद पेयजल निगम के अभियंताओं ने मेडिकल कॉलेज के ढांचे को तोड़ने के लिए मुख्यालय में प्रस्ताव भेजा था।
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मेडिकल कॉलेज को ध्वस्त करने के लिए मुख्यालय में प्रस्ताव भेजा था। अनुमति मिलने के बाद लगभग 80 लाख रुपये का टेंडर निकाल दिया गया है। भवन को ध्वस्त करने के बाद नए सिरे से दूसरी कंपनी 265 करोड़ रुपये की लागत से इसका निर्माण करेगी। -एससी भट्ट, सहायक अभियंता, पेयजल निर्माण निगम।
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