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15 घंटे का रमजान का पहला रोजा
Wed, 08 May 2019 01:00 AM IST
yashwant yashwant
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो
Published by: yashwant yashwant
Updated Wed, 08 May 2019 01:00 AM IST
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हाजी मोहम्मद सगीर।
- फोटो : अमर उजाला
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माहे रमजान का पहला रोजा 15 घंटे का रहा। सहरी खाने के बाद रोजेदारों ने मस्जिद में फज्र की नमाज अदा की और माहे रमजान का इस्तकबाल किया। इबादतगाहों से लेकर बाजार तक माहे रमजान की रौनक छा गई है।
सोमवार की शाम चांद के दीदार के साथ मुकद्दस रमजान का आगाज हुआ। मंगलवार को तड़के सहरी खाकर 3:54 बजे लोगों ने रोजा रखा और शाम को 6:54 बजे इफ्तार किया। कड़ी धूप और गर्मी के बावजूद भूखे प्यासे रहकर रोजेदारों ने मस्जिदों में पांच वक्त की नमाज का अहतमाम किया और इबादत करते हुए मुल्क की खुशहाली के लिए दुआ में हाथ उठाए।
हाजी मोहम्मद सगीर ने बताया कि इस्लाम के मानने वालों के लिए रोजा एक अहम इबादत है। रोजे की हालत में रोजेदार को हर समय यह अहसास होता है कि उसका अल्लाह उसे देख रहा है तो वह गलत कामों से बचता है। बताया कि रोजे का असल मकसद यही है कि इंसान गलत कामों को छोड़कर अल्लाह की बंदगी करे। एक माह रोजे रखने के बाद रब को बंदे से उम्मीद होती है कि वह बाकी जिंदगी भी रोजेदार की तरह गुजारे, जिसमें वह गलत कामों से बचा रहे। उन्होंने बताया कि रमजान में लोगों को गरीबों एवं जरूरतमंदों की अधिक से अधिक मदद करनी चाहिए।
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इबादत और तिलावत में गुजरा पहला रोजा
जसपुर। मुकद्दस रमजान का पहला दिन अल्लाह की इबादत और तिलावत में बीता। शाम को इफ्तार के वक्त मस्जिदों से लेकर खानकाह और अन्य जगहों पर रोजेदारों के लिए सामूहिक रोजा इफ्तार का इंतजाम किया गया।
मंगलवार को मौसम का मिजाज भी बेहद तल्ख रहा। अधिकतम तापमान 38 डिग्री सेल्सियस रहा। इसके बावजूद रोजेदारों के हौसले में कोई कमी नजर नहीं आई। पांचों वक्त की नमाजों के लिए मस्जिदों में भीड़ जुटती रही। बुजर्गों से लेकर मासूम बच्चों ने भी रोजा रखकर खुद के प्रति अपनी मोहब्बत का नजराना पेश किया।
दादा ने पूरी कराई बुशरा की जिद
जसपुर। ग्यारह वर्षीय बुशरा रहमान ने कहा कि पहला रोजा इबादत और तिलावत में गुजरा। भूख प्यास का एहसास ही नहीं हुआ। मां और दादा से जिद करके रोजा रखा था। दरअसल बुशरा के वालिद का इंतकाल हो चुका है। बुशरा बोली पापा होते तो और अच्छा होता।
रोजा रखकर खुश हुआ समीर
जसपुर। मोहम्मद समीर की उम्र 13 साल है। वे 9वीं कक्षा में पढ़ते हैं। उनके लिए यह दूसरा रमजान है जिसमें वह रोजे रख रहे हैं। समीर ने कहा कि खुश हूं कि रोजा रखने का मौका मिला।
रोजा रखकर तिलावत भी की
जसपुर। चौदह साल के मो.समीर अंसारी ने कहा कि गर्मी के दिनों में रोजा रखना बहुत अच्छा लगा। मैने दिन में नमाज पढ़ी और कुरान की तिलावत भी की। रोजे की खुशी में भूख प्यास जरा भी नहीं सताई।
इशाना को बड़ी बहन से मिली प्रेरणा
जसपुर। दस वर्षीय इशाना परवीन ने कहा कि परिवार के साथ इफतार करना अच्छा लगता है। अभी से वे रोजा रखने की आदत बना रही हैं। बड़ी बहन से रोजा रखने की प्रेरणा मिली है।
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सोमवार की शाम चांद के दीदार के साथ मुकद्दस रमजान का आगाज हुआ। मंगलवार को तड़के सहरी खाकर 3:54 बजे लोगों ने रोजा रखा और शाम को 6:54 बजे इफ्तार किया। कड़ी धूप और गर्मी के बावजूद भूखे प्यासे रहकर रोजेदारों ने मस्जिदों में पांच वक्त की नमाज का अहतमाम किया और इबादत करते हुए मुल्क की खुशहाली के लिए दुआ में हाथ उठाए।
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हाजी मोहम्मद सगीर ने बताया कि इस्लाम के मानने वालों के लिए रोजा एक अहम इबादत है। रोजे की हालत में रोजेदार को हर समय यह अहसास होता है कि उसका अल्लाह उसे देख रहा है तो वह गलत कामों से बचता है। बताया कि रोजे का असल मकसद यही है कि इंसान गलत कामों को छोड़कर अल्लाह की बंदगी करे। एक माह रोजे रखने के बाद रब को बंदे से उम्मीद होती है कि वह बाकी जिंदगी भी रोजेदार की तरह गुजारे, जिसमें वह गलत कामों से बचा रहे। उन्होंने बताया कि रमजान में लोगों को गरीबों एवं जरूरतमंदों की अधिक से अधिक मदद करनी चाहिए।
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इबादत और तिलावत में गुजरा पहला रोजा
जसपुर। मुकद्दस रमजान का पहला दिन अल्लाह की इबादत और तिलावत में बीता। शाम को इफ्तार के वक्त मस्जिदों से लेकर खानकाह और अन्य जगहों पर रोजेदारों के लिए सामूहिक रोजा इफ्तार का इंतजाम किया गया।
मंगलवार को मौसम का मिजाज भी बेहद तल्ख रहा। अधिकतम तापमान 38 डिग्री सेल्सियस रहा। इसके बावजूद रोजेदारों के हौसले में कोई कमी नजर नहीं आई। पांचों वक्त की नमाजों के लिए मस्जिदों में भीड़ जुटती रही। बुजर्गों से लेकर मासूम बच्चों ने भी रोजा रखकर खुद के प्रति अपनी मोहब्बत का नजराना पेश किया।
दादा ने पूरी कराई बुशरा की जिद
जसपुर। ग्यारह वर्षीय बुशरा रहमान ने कहा कि पहला रोजा इबादत और तिलावत में गुजरा। भूख प्यास का एहसास ही नहीं हुआ। मां और दादा से जिद करके रोजा रखा था। दरअसल बुशरा के वालिद का इंतकाल हो चुका है। बुशरा बोली पापा होते तो और अच्छा होता।
रोजा रखकर खुश हुआ समीर
जसपुर। मोहम्मद समीर की उम्र 13 साल है। वे 9वीं कक्षा में पढ़ते हैं। उनके लिए यह दूसरा रमजान है जिसमें वह रोजे रख रहे हैं। समीर ने कहा कि खुश हूं कि रोजा रखने का मौका मिला।
रोजा रखकर तिलावत भी की
जसपुर। चौदह साल के मो.समीर अंसारी ने कहा कि गर्मी के दिनों में रोजा रखना बहुत अच्छा लगा। मैने दिन में नमाज पढ़ी और कुरान की तिलावत भी की। रोजे की खुशी में भूख प्यास जरा भी नहीं सताई।
इशाना को बड़ी बहन से मिली प्रेरणा
जसपुर। दस वर्षीय इशाना परवीन ने कहा कि परिवार के साथ इफतार करना अच्छा लगता है। अभी से वे रोजा रखने की आदत बना रही हैं। बड़ी बहन से रोजा रखने की प्रेरणा मिली है।