फेल हुआ हिमालय के सूखे जलस्रोतों का ट्रीटमेंट
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हिमालयी रेंज के जलस्रोतों के रास्तों की संरचना बेहद उलझी हुई है। सूखे जलस्रोतों को रिचार्ज करने का ट्रीटमेंट फेल हो गया है।
इससे घबराए पेयजल निगम ने हाथ खड़े कर लिए हैं। निगम अब पहाड़ों के झरनों और जलस्रोतों की अंदरूनी संरचना पर शोध करवा रहा है। इसके लिए वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान से मदद मांगी है। पहाड़ों से पलायन के कारण खेती समाप्त होना भी जलस्रोत सूखने का एक बड़ा कारण माना जा रहा है।
हिमालयी रेंज के भूगर्भ जलस्रोतों की अंदरूनी संरचना का पता लगाने की पहली बार कोशिश की जा रही है। पेयजल निगम ने प्रदेश के सूखे जलस्रोतों का सर्वेक्षण कराया था, जहां पानी सूख गया था, वहां के जलस्रोतों का ट्रीटमेंट किया गया। इसके बाद वहां भूगर्भ जल सतह रिचार्ज नहीं हुई।
अभियंता का कहना है कि पहाड़ों के अंदर चट्टानों और पत्थरों की संरचना अजीब है, पानी कहां से आता है और किधर निकल जाता है, पता नहीं चलता। ऐसे में जलस्रोत रिचार्ज करने की सारी कवायद बेकार चली गई।
खेती बंद होने से जलस्रोत सूख जाते हैं
उत्तराखंड पेयजल निगम के एमडी भजन सिंह का कहना है कि चट्टानों की बनावट पता नहीं चलती। ट्रीटमेंट के बाद भी जलस्रोत रिचार्ज नहीं होते। वाडिया के विज्ञानियों से शोध करवा कर स्थिति का पता लगाया जाएगा। उत्तराखंड जलसंस्थान के महाप्रबंधक एसके गुप्ता का कहना है कि खेती बंद होने से जलस्रोत सूख जाते हैं।
खेतों में पानी भरने से जलस्रोत रिचार्ज होते हैं। जिन स्थानों पर पलायन हुआ है और खेती नहीं होती, वहां जलस्रोत अधिक सूखे हैं। खेती के लिए लोग वर्षा जल संचयन भी किया करते थे, जो अब नहीं हो पा रहा है।
जलस्रोतों का ट्रीटमेंट कारगर साबित नहीं हो रहा है। स्थिति से निपटने के उपाय किए जा रहे हैं। साथ ही खेती बंद होने से भी इसकी दिक्कत बढ़ गई है। लोगों को खेती करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
- एस. राजू, अपर मुख्य सचिव