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उत्तराखंडः जलप्रलय ने तोड़ी काश्तकारों की कमर
कर्णप्रयाग/विनय बहुगुणा
Updated Sun, 14 Jul 2013 06:44 PM IST
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आपदा ने उत्तराख्ांड की आजीविका पर भी प्रहार किया है। हरिद्वार सहित अन्य 12 जिलों में 20 हजार से अधिक हेक्टेयर कृषि भूमि कटान और बहाव से खत्म हो गई है।
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आपदा के कहर से मैदानी क्षेत्रों में 14822 हेक्टेयर में बोई गई गन्ने की फसल तबाह हो चुकी है, वहीं पहाड़ी क्षेत्रों में 734 हेक्टेअर भूमि पर मंडुवे और 604 हेक्टेयर पर बोई गई झंगोरे की फसल नदी, गाड़-गदेरों के उफान से खत्म हो गई है।
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आपदा ने प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। एक तरफ केदारघाटी और अन्य इलाकों में कई लोग काल के गाल में समाए हैं, वहीं पूरे प्रदेश में नदियों के उफान ने आवासीय मकान, दुकानों के साथ हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि को भी फसल सहित लील लिया है।
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किसानों की सालभर की मेहनत पर पानी फिरने से वे कंगाल हो गए हैं। प्रदेश सरकार ने अभी तक मुआवजे का कोई मानक तैयार नहीं किया है।
वहीं अनाज और नगदी फसलों के पूरी तरह से नष्ट होने पर अब आम आदमी को भी आपदा के बाद महंगाई की मार झेलनी पड़ सकती है। क्योंकि अब उन्हें और भी मंहगे दामों पर अनाज, दालें और अन्य सामग्री खरीदनी पड़ सकती है।
कृषि निदेशालय देहरादून के अनुसार अभी तक 20 हजार 609 हेक्टेयर भूमि कटाव और मलबे से खत्म हो चुकी है, लेकिन जिस तरह के हालात अभी तक बने हैं, यह आंकड़ा और भी बढ़ सकता है।
मंडल में सैकड़ों हेक्टेयर भूमि तबाह
गढ़वाल मंडल में नदी और गाड़-गदेरों के उफान से कटाव के साथ ही भूस्खलन, मलबे से हरिद्वार जनपद में 17, 889 हेक्टेयर, रुद्रप्रयाग में 11 सौ हेक्टेयर, चमोली में 427.6 हेक्टेयर, पौड़ी में 8.25 हेक्टेयर, उत्तरकाशी में 155.18 हेक्टेयर, टिहरी में 406 हेक्टेयर, देहरादून में 563 हेक्टेयर भूमि अभी तक तबाह हो चुकी है।
क्या कहतें हैं अधिकारी
'आपदा से अभी तक 20 हजार हेक्टेयर से अधिक कृषि और अन्य भूमि खत्म हो चुकी है। जनपदों में अभी भी सर्वेक्षण जारी है। इन हालातों में किसानों के साथ आम लोगों की मुश्किलें भी बढ़ गई है। शासन को फसलों के नुकसान के साथ ही अन्य प्रकार की क्षति के बारे में भी अवगत करा दिया गया है।'
महीधर सिंह तोमर, उप कृषि निदेशक देहरादून
'जिस भूमि पर मलबा गिरा है। उसे साफ करना इतना आसान नहीं है। मलबे में रेत और सिल्ट है। ऐसे में उस भूमि पर धान, गेहूं या अन्य प्रकार की फसलों का उत्पादन होना संभव नहीं है। बारिश में ये रेत या सिल्ट अगर और बह जाए, तो तब कुछ उम्मीद हो सकती है कि इसमें खीरा, तोरई आदि अन्य सब्जियों का उत्पादन हो सके।'
डा. उमा नौलिया, प्रभारी कृषि एवं विज्ञान केंद्र ग्वालदम
उत्तराखंड में आपदा से नष्ट हुई फसलों का ब्योरा
| फसल | हेक्टेयर में |
| गन्ना | 14822 |
| धान
| 1404 |
| मंडुवा | 735 |
| झंगोरा | 604 |
| सब्जियां
| 1100 |
| फूल और मशाले
| 111 |
| मक्का | 59 |
| सोयाबीन | 63.0 |
| उड़द दाल
| 56.5 |
| उगल
| 14.5 |
| राजमा
| 72.49 |
| चौलाई
| 6.0 |
| अरहर
| 4.6 |
| भट्ट (दाल)
| 3.1 |