{"_id":"349f86d1fddf522e75b583d59e1e99e9","slug":"students-reading-under-tin-shade-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"टीन शेड में बैठकर पढ़ रहे छात्र","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
टीन शेड में बैठकर पढ़ रहे छात्र
लंबगांव (टिहरी)
Updated Sun, 10 Jan 2016 10:16 PM IST
विज्ञापन
शिक्षा विभाग के अधिकारियों की उदासीनता इंटर कालेज गरवाणगांव के छात्र-छात्राओं पर भारी पड़ रही है। गरवाणगांव इंटर कालेज स्थापना के 14 साल बाद भी विद्यालय को छत नसीब नहीं हो पाई। छात्र-छात्राएं टीन शेडों के नीचे टाटपट्टी में बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं।
उपली रमोली के गरवाणगांव में वर्ष 1979 में हाईस्कूल की स्थापना हुई थी। छात्र-छात्राओं को क्षेत्र में ही इंटर तक की शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से वर्ष 2002 में विद्यालय का इंटर कालेज के रूप में उच्चीकरण किया गया। उच्चीकरण होने के बाद विद्यालय में सिर्फ टीन शेडों का निर्माण किया गया। पक्के भवन के नाम पर सिर्फ दो ही कमरे हैं। इंटर कालेज में रमोली क्षेत्र के बैल्डोगी, गरवाणगांव, खुरमोला, मुखमालगांव, डांगी, घोंडपुर और सिरवाणी के छात्र-छात्राएं शिक्षा ग्रहण करने आते हैं। विद्यालय में 465 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। अभिभावक संघ के अध्यक्ष राजपाल सिंह राणा कहते हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर शिक्षा देने की सरकार कोरी घोषणाएं कर रही है। सरकारी स्कूलों में सुविधाएं नहीं होने के कारण लोग निजी स्कूलों की ओर से रुख करने को मजबूर हैं।
कोट
उच्चीकृत हुए स्कूलों में भवनों की कमी बनी है। समय-समय पर शासनस्तर पर उच्चीकृत विद्यालयों की समीक्षा की जाती है। गरवाणगांव इंटर कालेज भवन निर्माण का प्रस्ताव शासन स्तर पर लंबित चल रहा है।
विज्ञापन
-दिनेश चंद्र गौड़, सीईओ, टिहरी
विज्ञापन
उपली रमोली के गरवाणगांव में वर्ष 1979 में हाईस्कूल की स्थापना हुई थी। छात्र-छात्राओं को क्षेत्र में ही इंटर तक की शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से वर्ष 2002 में विद्यालय का इंटर कालेज के रूप में उच्चीकरण किया गया। उच्चीकरण होने के बाद विद्यालय में सिर्फ टीन शेडों का निर्माण किया गया। पक्के भवन के नाम पर सिर्फ दो ही कमरे हैं। इंटर कालेज में रमोली क्षेत्र के बैल्डोगी, गरवाणगांव, खुरमोला, मुखमालगांव, डांगी, घोंडपुर और सिरवाणी के छात्र-छात्राएं शिक्षा ग्रहण करने आते हैं। विद्यालय में 465 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। अभिभावक संघ के अध्यक्ष राजपाल सिंह राणा कहते हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर शिक्षा देने की सरकार कोरी घोषणाएं कर रही है। सरकारी स्कूलों में सुविधाएं नहीं होने के कारण लोग निजी स्कूलों की ओर से रुख करने को मजबूर हैं।
विज्ञापन
कोट
उच्चीकृत हुए स्कूलों में भवनों की कमी बनी है। समय-समय पर शासनस्तर पर उच्चीकृत विद्यालयों की समीक्षा की जाती है। गरवाणगांव इंटर कालेज भवन निर्माण का प्रस्ताव शासन स्तर पर लंबित चल रहा है।
विज्ञापन
-दिनेश चंद्र गौड़, सीईओ, टिहरी