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गांवों में लगने वाले मेले-थौलों से प्रशासन अंजान
ब्यूरो/अमर उजाला टिहरी
Updated Wed, 20 Apr 2016 10:04 PM IST
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बैशाख माह शुरू होते ही पहाड़ के अधिकतर क्षेत्रों में मेले शुरू हो जाते हैं। इस दौरान काफी खाद्य पदार्थों की दुकानें भी लगती हैं, लेकिन वह सेहत के लिए कितने शुद्ध है। इसकी किसी को जानकारी नहीं है। स्वास्थ्य विभाग भी ऐसे मेलों से अनजान हैं। ऐसे में अपने फायदे के लिए दुकानदार मिलावटी सामान बेचने से परहेज नहीं करेंगे।
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ग्रामीण क्षेत्रों में इन दिनों मेलों की धूम है। मेले-थौलों में खासी भीड़ उमड़ने से चाय, पकोड़ी, जलेबी, मिठाई, छोले-भटूरे और आइसक्रीम की दुकानें भी खूब सजती हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ऐसे बड़े आयोजनों से अनजान हैं। जिससे ऐसे मौकों पर मिलावट की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है।
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विभागीय लापरवाही का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि विभाग के पास बड़े कुछ चुनिंदा मेलों के अलावा कोई जानकारी ही नही है। यहां तक चंबा में चल रहे तीन दिवसीय मेले की जानकारी भी स्वास्थ्य विभाग को नहीं है।
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मुख्य मेलों का पता लगने पर वहां जाते हैं, लेकिन अधिकतर लगने वाले मेलों की जानकारी हमारे पास नहीं है। प्रशासन से भी कोई सूचना नहीं मिल पाती है। जिले में कहां-कहां मेले लगते हैं, इसका संज्ञान लेकर फूड सेफ्टी इंस्पेक्टर को नजर रखने के लिए निर्देशित किया जाएगा।
-आरएस पाल, जिला अभिहित अधिकारी, टिहरी।