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‘विज्ञान और तकनीकी बेहतर भविष्य के लिए’
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‘विज्ञान और तकनीकी बेहतर भविष्य के लिए’ की थीम पर स्वामी रामतीर्थ परिसर बादशाहीथौल में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर दो दिवसीय सेमिनार का शुभारंभ किया गया।
एसआरटी परिसर में भौतिक एवं गणित विभाग की ओर से आयोजित सेमिनार का शुभारंभ उत्तराखंड विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान केंद्र के निदेशक प्रो. दुर्गेश पंत ने किया। उन्होंने कहा कि महान वैज्ञानिक प्रो. सीवी रमन ने ही कम उम्र में आसमान और समुद्री पानी के नीले रंग की बड़ी पहेली सुलझाने में कामयाब हुए थे। तकनीकी सत्र के मुख्य वक्ता प्रो. आरसी रमोला ने कहा कि बिना विज्ञान के तकनीकी विकसित नहीं हो सकती है। परिसर निदेशक प्रो. एए बौड़ाई ने जीवन में सफलता अर्जित करने के लिए छात्रों को जीवन में लक्ष्य निर्धारित करने की सलाह दी। सेमिनार के संयोजक प्रो. पीडी सेमल्टी ने कहा कि विज्ञान दिवस मनाने का उद्देश्य वैज्ञानिक सोच रखने वाले छात्रों को प्रोत्साहित करना भी है। आयोजक सचिव डा. केसी पेटवाल ने प्रो. रमन के जीवनवृत्त की विस्तृत जानकारी दी। इस मौके पर प्रो. वीना जोशी, प्रो. गीताली पडियार, प्रो. एससी शर्मा, डा. केपी सिंह, डा. यूएस नेगी, डा. आरबी गोदियाल, डा. मुकेश बिजल्वाण, डा. शंकर लाल, डा. शालिनी रावत, डा. गुरूपात गुसाईं, डा. रामनिवास देशवाल, डा. दीवान सिंह राणा और पुस्तकालयाध्यक्ष हंसराज बिष्ट आदि मौजूद थे।
कौन थे प्रो. सीवी रमन
भारत के उत्कृष्ट वैज्ञानिकों में प्रो. सीवी रमन का नाम लिया जाता है। 28 फरवरी 1928 को उन्होंने भौतिकी के गंभीर विषय में एक महत्वपूर्ण खोज की थी, जो रमन प्रभाव के नाम से जानी जाती है। पारदर्शी पदार्थ से गुजरने पर प्रकाश की किरणों में आने वाले बदलाव पर की गई इस महत्वपूर्ण खोज के लिए 1930 में उन्हें भौतिकी के नोबेल पुरस्कार से नवाजा गया था। वह यह पुरस्कार ग्रहण करने वाले वह भारत के नहीं, बल्कि एशिया के पहले वैज्ञानिक थे। इस खोज के सम्मान में 1986 से इस दिवस को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के रूप में मनाया जाता है।
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एसआरटी परिसर में भौतिक एवं गणित विभाग की ओर से आयोजित सेमिनार का शुभारंभ उत्तराखंड विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान केंद्र के निदेशक प्रो. दुर्गेश पंत ने किया। उन्होंने कहा कि महान वैज्ञानिक प्रो. सीवी रमन ने ही कम उम्र में आसमान और समुद्री पानी के नीले रंग की बड़ी पहेली सुलझाने में कामयाब हुए थे। तकनीकी सत्र के मुख्य वक्ता प्रो. आरसी रमोला ने कहा कि बिना विज्ञान के तकनीकी विकसित नहीं हो सकती है। परिसर निदेशक प्रो. एए बौड़ाई ने जीवन में सफलता अर्जित करने के लिए छात्रों को जीवन में लक्ष्य निर्धारित करने की सलाह दी। सेमिनार के संयोजक प्रो. पीडी सेमल्टी ने कहा कि विज्ञान दिवस मनाने का उद्देश्य वैज्ञानिक सोच रखने वाले छात्रों को प्रोत्साहित करना भी है। आयोजक सचिव डा. केसी पेटवाल ने प्रो. रमन के जीवनवृत्त की विस्तृत जानकारी दी। इस मौके पर प्रो. वीना जोशी, प्रो. गीताली पडियार, प्रो. एससी शर्मा, डा. केपी सिंह, डा. यूएस नेगी, डा. आरबी गोदियाल, डा. मुकेश बिजल्वाण, डा. शंकर लाल, डा. शालिनी रावत, डा. गुरूपात गुसाईं, डा. रामनिवास देशवाल, डा. दीवान सिंह राणा और पुस्तकालयाध्यक्ष हंसराज बिष्ट आदि मौजूद थे।
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कौन थे प्रो. सीवी रमन
भारत के उत्कृष्ट वैज्ञानिकों में प्रो. सीवी रमन का नाम लिया जाता है। 28 फरवरी 1928 को उन्होंने भौतिकी के गंभीर विषय में एक महत्वपूर्ण खोज की थी, जो रमन प्रभाव के नाम से जानी जाती है। पारदर्शी पदार्थ से गुजरने पर प्रकाश की किरणों में आने वाले बदलाव पर की गई इस महत्वपूर्ण खोज के लिए 1930 में उन्हें भौतिकी के नोबेल पुरस्कार से नवाजा गया था। वह यह पुरस्कार ग्रहण करने वाले वह भारत के नहीं, बल्कि एशिया के पहले वैज्ञानिक थे। इस खोज के सम्मान में 1986 से इस दिवस को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के रूप में मनाया जाता है।
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