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एक-एक शिक्षकों के भरोसे चल रहे संस्कृत स्कूल

Tue, 25 Jan 2022 10:54 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Tue, 25 Jan 2022 10:54 PM IST
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Sanskrit schools running on the basis of one teacher
नई टिहरी स्थित राजकीय संस्कृत महाविद्यालय। - फोटो : NEW TEHRI
संस्कृत शिक्षा यहां बुरे दौर से गुजर रही है। जिले में संचालित चार संस्कृत स्कूलों में शिक्षकों का खासा अभाव बना हुआ है। सभी स्कूल एक-एक शिक्षकों के ही भरोसे चल रहे हैं। प्रतापनगर के सेममुखेम में संचालित स्कूल को पांच साल पहले बंद ही हो गया था। संस्कृत निदेशालय से स्वीकृत पदों के सापेक्ष शिक्षकों की नियुक्ति होने पर ही संस्कृत शिक्षा व्यवस्था पटरी पर आ सकती है।
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संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए टिहरी जिले में दो राजकीय संस्कृत महाविद्यालय और दो संस्कृत विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं। महाविद्यालय में कक्षा छह से आचार्य तक और संस्कृत विद्यालय में कक्षा छह से 12वीं तक की शिक्षा प्रदान की जाती है। स्कूलों में भवन तो है, लेकिन शिक्षक नहीं हैं। जिला मुख्यालय स्थित राजकीय संस्कृत महाविद्यालय की बात करें। तो पहले छह पदों के सापेक्ष संस्कृत निदेशालय बनने के बाद यहां के लिए शिक्षकों के 17 पद स्वीकृत हैं, लेकिन अभी तक एक भी पद पर नियुक्ति नहीं हो पाई है। जिससे महाविद्यालय में पढ़ रहे करीब 30 छात्रों की पढ़ाई व्यवस्था एक शिक्षक के भरोसे है। संस्कृत महाविद्यालय चंबा की भी यही स्थिति है, वहां भी 32 छात्र दो शिक्षकों के भरोसे हैं। वहां 12 पद स्वीकृत हैं। संस्कृत विद्यालय आमणी और सौडू की स्थिति भी बदहाल है। दोनों संस्कृत स्कूल एक-एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं, दोनों स्कूलों में सात-सात शिक्षकों के पद स्वीकृत हैं। राजकीय संस्कृत महाविद्यालय नई टिहरी के प्रभारी प्रधानाचार्य विनोद प्रसाद बेंजवाल का कहना है कि संस्कृत स्कूलों में छात्र तो हैं, लेकिन शिक्षक नहीं होने से लगातार संख्या घट रही है।
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जनपद के संस्कृत विद्यालयों में है शिक्षकों का टोटा
उत्तरकाशी। जनपद में तीन सरकारी संस्कृत विद्यालय हैं, जिनमें एक महाविद्यालय व दो उत्तर माध्यमा विद्यालय शामिल हैं। सभी संस्कृत विद्यालयों में शिक्षकों का टोटा बना हुआ है। वहीं पुरोला में संचालित हो रहा श्रीकमल संस्कृत विद्यालय छात्रावास में संचालित हो रहा है। यहां छात्र बरामदे में पढ़ने को मजबूर हैं। इस विद्यालय की स्थापना 1973 में हुई थी। विद्यालय में 2 नियमित, 4 राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान दिल्ली व 3 शिक्षक मानदेय पर नियुक्त हैं। इसके अलावा श्री सरस्वती संस्कृत विद्यालय जोगत चिन्यालीसौड़ में संचालित हो रहा है। विद्यालय की स्थापना 1957 में हुई थी। यहां दो शिक्षक नियमित, 3 शिक्षक राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान नई दिल्ली व 3 शिक्षक मानदेय पर नियुक्त किए गए हैं। जनपद मुख्यालय के समीप उजेली में श्री विश्वनाथ संस्कृत महाविद्यालय संचालित हो रहा है। महाविद्यालय की स्थापना 1953 में हुई थी। महाविद्यालय में 1 शिक्षक नियमित, 4 शिक्षक राष्ट्री संस्कृत संस्थान दिल्ली, 2 शिक्षक प्रबंधकीय तंत्र की ओर से और 7 शिक्षक मानदेय पर नियुक्त किए गए हैं। संवाद
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