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उत्तराखंड के ज्वलंत मुद्दे समझने को टिहरी पहुंची सद्भावना यात्रा
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कुली और बेगार आंदोलन के शताब्दी वर्ष और आजादी के अमृत महोत्सव के तहत संचालित की जा रही सद्भावना यात्रा का टिहरी पहुंचने पर विभिन्न संगठनों ने स्वागत किया। यात्रा का समापन 18 जून को देहरादून में होगा। उसके बाद वहां 20 और 21 जून को सम्मेलन का आयोजित किया जाएगा।
सोमवार को सद्भावना यात्रा के टिहरी पहुंचने पर यात्रा के संयोजक भुवन पाठक और सदस्यों ने पत्रकार वार्ता में बताया कि 8 मई को यात्रा शुरू की गई थी। 30 दिनों में यात्रा से जुड़े लोगों ने प्रदेश के विभिन्न गांवों, नगरों और कस्बों का भ्रमण कर लोगों से रूबरू हुए। यात्रा के दौरान सबसे महत्वपूर्ण पहलू सामने आया कि उत्तराखंड में सार्वजनिक निर्माण सबसे घटिया किस्म में किया जा रहा है। गांवों की स्थिति ठीक नहीं है। पलायन, बेरोजगारी और बंजर होती जमीन परेशानी का सबब बन रही है। जो लोग खेती करना चाहते हैं, वह जंगली जानवर बंदर, सूअर और भालू के डर से खेती छोड़ने को मजबूर हैं। उन्होंने बताया कि यात्रा वीसी गबर सिंह स्मारक चंबा और श्रीदेव सुमन के गांव जौल से होते हुए हेंवल घाटी पहुंचेगी। इस मौके पर सर्वोदय मंडलाध्यक्ष इस्लाम हुसैन, रीता इस्लाम, साब सिंह सजवाण, गोपाल भाई, सुरेंद्र बरोलिया, प्रेम बहुखंडी और देवेंद्र नौडियाल आदि मौजूद थे।
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सोमवार को सद्भावना यात्रा के टिहरी पहुंचने पर यात्रा के संयोजक भुवन पाठक और सदस्यों ने पत्रकार वार्ता में बताया कि 8 मई को यात्रा शुरू की गई थी। 30 दिनों में यात्रा से जुड़े लोगों ने प्रदेश के विभिन्न गांवों, नगरों और कस्बों का भ्रमण कर लोगों से रूबरू हुए। यात्रा के दौरान सबसे महत्वपूर्ण पहलू सामने आया कि उत्तराखंड में सार्वजनिक निर्माण सबसे घटिया किस्म में किया जा रहा है। गांवों की स्थिति ठीक नहीं है। पलायन, बेरोजगारी और बंजर होती जमीन परेशानी का सबब बन रही है। जो लोग खेती करना चाहते हैं, वह जंगली जानवर बंदर, सूअर और भालू के डर से खेती छोड़ने को मजबूर हैं। उन्होंने बताया कि यात्रा वीसी गबर सिंह स्मारक चंबा और श्रीदेव सुमन के गांव जौल से होते हुए हेंवल घाटी पहुंचेगी। इस मौके पर सर्वोदय मंडलाध्यक्ष इस्लाम हुसैन, रीता इस्लाम, साब सिंह सजवाण, गोपाल भाई, सुरेंद्र बरोलिया, प्रेम बहुखंडी और देवेंद्र नौडियाल आदि मौजूद थे।
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