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अक्षय, सौर, पवन ऊर्जा का होगा डाटाबेस तैयार
ब्यूरो/अमर उजाला, टिहरी
Updated Wed, 27 Jan 2016 09:06 PM IST
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टीएचडीसी हाइड्रो पावर एवं प्रौद्योगिकी संस्थान भागीरथीपुरम में अनुसंधान एवं विकास केंद्र शुरू हो गया है। केंद्र के माध्यम से अक्षय ऊर्जा, सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जल विद्युत और जैव ईंधन का डाटाबेस तैयार कर ऊर्जा की नई संभावनाओं की तलाशने का काम करेगा।
संस्थान के निदेशक डा. चिन्नपन्न भास्कर ने बताया कि विवि के कुलपति प्रो. पीके गर्ग के निर्देशन में टीएचडीसी हाइड्रो पावर संस्थान में बुधवार को अनुसंधान एवं विकास केंद्र शुरू किया गया है।
जिसका उद्देश्य उत्तराखंड तकनीकी विवि से संबद्ध संस्थानों एवं अन्य संस्थानों के वैज्ञानिकों एवं इंजीनियरों के सहयोग से राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संगोष्ठी, कार्यशालाएं, सूक्ष्म अवधि पाठ्यक्रम का आयोजन कर अक्षय ऊर्जा, सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जल विद्युत ऊर्जा, जैव ईधन आदि का डाटाबेस कर ऊर्जा क्षेत्र की नई संभावनाओं को तलाशना है।
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साथ ही छात्र-छात्राओं, शिक्षकों को नई प्रणाली के अनुसार विदेशी विवि एवं एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित करना है। अनुसंधान एवं विकास केंद्र के सुचारु संचालन के लिए एक कमेटी का गठन भी किया गया है।
जिसमें विवि के कुलपति प्रो. पीके गर्ग को अध्यक्ष, निदेशक डा. भास्कर मुख्य समन्वयक, प्रीती जोशी समन्वयक, ज्योति सेमवाल, उप समन्वयक, डा. ऋचा बिजल्वाण सचिव, आशीष जोशी सदस्य, अनुप्सी जौहरी, श्रीजा गैरोला, बनित नेगी को सदस्य बनाया गया है।
साथ ही सौर ऊर्जा एवं जैव कचरे से ऊर्जा बनने पर शोध करने वाले वैज्ञानिकों, छात्रों को 50 हजार की राशि प्रोत्साहन के रूप में अनुसंधान केंद्र प्रदान करेगा।
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संस्थान के निदेशक डा. चिन्नपन्न भास्कर ने बताया कि विवि के कुलपति प्रो. पीके गर्ग के निर्देशन में टीएचडीसी हाइड्रो पावर संस्थान में बुधवार को अनुसंधान एवं विकास केंद्र शुरू किया गया है।
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जिसका उद्देश्य उत्तराखंड तकनीकी विवि से संबद्ध संस्थानों एवं अन्य संस्थानों के वैज्ञानिकों एवं इंजीनियरों के सहयोग से राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संगोष्ठी, कार्यशालाएं, सूक्ष्म अवधि पाठ्यक्रम का आयोजन कर अक्षय ऊर्जा, सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जल विद्युत ऊर्जा, जैव ईधन आदि का डाटाबेस कर ऊर्जा क्षेत्र की नई संभावनाओं को तलाशना है।
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साथ ही छात्र-छात्राओं, शिक्षकों को नई प्रणाली के अनुसार विदेशी विवि एवं एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित करना है। अनुसंधान एवं विकास केंद्र के सुचारु संचालन के लिए एक कमेटी का गठन भी किया गया है।
जिसमें विवि के कुलपति प्रो. पीके गर्ग को अध्यक्ष, निदेशक डा. भास्कर मुख्य समन्वयक, प्रीती जोशी समन्वयक, ज्योति सेमवाल, उप समन्वयक, डा. ऋचा बिजल्वाण सचिव, आशीष जोशी सदस्य, अनुप्सी जौहरी, श्रीजा गैरोला, बनित नेगी को सदस्य बनाया गया है।
साथ ही सौर ऊर्जा एवं जैव कचरे से ऊर्जा बनने पर शोध करने वाले वैज्ञानिकों, छात्रों को 50 हजार की राशि प्रोत्साहन के रूप में अनुसंधान केंद्र प्रदान करेगा।