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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Tehri News ›   refugees are living the life of the rural Dunr

शरणार्थियों सा जीवन जी रहे डौंर के ग्रामीण

Thu, 10 Nov 2016 10:23 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई टिहरी
ब्यूरो/अमर उजाला, नई टिहरी Updated Thu, 10 Nov 2016 10:23 PM IST
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 आपदा प्रभावित डौंर के ग्रामीण पांच साल से खानाबदोश जीवन बिताने को मजबूर हैं। कई वादों के बाद भी सरकार प्रभावितों का पुनर्वास नहीं कर पाई है। उन्होंने जल्द पुनर्वास नहीं होने पर कोर्ट की शरण में जाने की चेतावनी दी है।

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मंगलवार को श्रीदेव सुमन पार्क में हुई बैठक में आपदा पीड़ितों ने कहा कि सितंबर 2011 में आई आपदा से डौर गांव का 90 प्रतिशत हिस्सा तबाह हो गया था, जबकि मलबे में दबकर चार लोगों की मौत हो गई थी।
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प्रशासन ने तब प्रभावित 55 परिवारों को नरेंद्रनगर स्थित सरकारी कालोनियों में शिफ्ट किया था, तब उन्हें जल्द स्थायी व्यवस्था बनाने का आश्वासन दिया गया। लेकिन पांच साल बीतने के बाद भी उनकी कोई सुध नहीं ली गई है, जिससे वे शरणार्थियों की तरह जीवन यापन करने को मजबूर हैं।
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प्रधान भवान सिंह कैंतुरा ने कहा कि पुनर्वास को लेकर अब तक हुई कार्रवाई को लेकर गांव के माधव सिंह नेगी ने सरकार से आरटीआई के तहत सूचना मांगी है। वहां से सकारात्मक जवाब नहीं मिलता है, तो उन्हें न्यायालय की शरण में जाने को मजबूर होना पड़ेगा।


बैठक में मंगल सिंह नेगी, दर्मियान सिंह भंडारी, शूरवीर सिंह कैंतुरा, बुद्धि सिंह कैंतुरा, गोवर्द्धन, भजन सिंह कैंतुरा, पूर्णिमा चौहान, अनीता देवी, बसंती देवी, सूरत सिंह नेगी, अजय भंडारी और हुकम सिंह भंडारी आदि मौजूद थे।

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