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अनुसंधान को स्थानीय स्तर पर दें बढ़ावा : डोभाल
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नई टिहरी पीजी कॉलेज में आयोजित सेमिनार में प्रतिभाग करते छात्र-छात्राएं।
- फोटो : NEW TEHRI
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कंजर्वेशन एंड सस्टेनेबल डेवलपमेंट ऑफ हिमालयन वॉटर एंड इको सिस्टम इन उत्तराखंड विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार के दूसरे दिन विभिन्न विश्वविद्यालयों से आए 65 छात्र-छात्राओं ने शोध पत्र प्रस्तुत किए। मुख्य अतिथि यूकॉस्ट के महानिदेशक डा. आरपी डोभाल ने कहा कि अनुसंधान को स्थानीय स्तर पर बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
उत्तराखंड स्टेट काउंसिल फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी (यूकॉस्ट) और पीजी कॉलेज नई टिहरी के जंतु व वनस्पति विज्ञान विभाग की संयुक्त पहल पर सेमिनार का आयोजन किया गया है। विशिष्ट अतिथि वानिकी महाविद्यालय रानीचौरी के डा. एसपी सती ने कहा कि उच्च हिमालयी क्षेत्रों में जलविद्युत परियोजनाओं के निर्माण से भूगर्भीय और पर्यावरणीय आपदाएं आ रही हैं। इसके लिए कठोर नियमावली बनाई जाए।
प्राचार्य डा. रेनू नेगी ने कहा कि इस तरह के आयोजनों से शोधार्थियों को अनुभव मिलता है। यूकॉस्ट के सहायक निदेशक डा. डीपी उनियाल ने विभागीय प्रोजेक्ट की जानकारी दी। डा. वीपी सेमवाल ने कांफ्रेंस की उपयोगिता और विचार विमर्श के निष्कर्ष पर चर्चा की। जंतु विज्ञान की विभागाध्यक्ष डा. कविता काला और वनस्पति विज्ञान की विभागाध्यक्ष डा. आशा डोभाल ने कहा विज्ञान के विद्यार्थियों को व्यवहारिक ज्ञान के लिए क्षेत्रों का भ्रमण करना चाहिए। इस मौके पर डा. डा. आरती खंडूड़ी, डा. सुमन गुसाईं, डा. केके बंगवाल, डा. बीएस बुटोला, डा. डीपीएस भंडारी, डा. एएम पैन्यूली, डा. बीडीएस नेगी, डा. सतेंद्र ढौंडियाल, डा. पीसी पैन्यूली, डा. प्रीति शर्मा, डा. साक्षी शुक्ला, डा. भारती जायसवाल, डा. मुकेश नैथानी, डा. बद्रीश बडोनी, डा. ममता रावत, डा. नवीन रावत, डा. डीएस तोपवाल, डा. पुष्पा पंवार, डा. संजीव नेगी, डा. गुरुपद गुसाईं, डा. पदमा वशिष्ठ आदि मौजूद रहे।
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उत्तराखंड स्टेट काउंसिल फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी (यूकॉस्ट) और पीजी कॉलेज नई टिहरी के जंतु व वनस्पति विज्ञान विभाग की संयुक्त पहल पर सेमिनार का आयोजन किया गया है। विशिष्ट अतिथि वानिकी महाविद्यालय रानीचौरी के डा. एसपी सती ने कहा कि उच्च हिमालयी क्षेत्रों में जलविद्युत परियोजनाओं के निर्माण से भूगर्भीय और पर्यावरणीय आपदाएं आ रही हैं। इसके लिए कठोर नियमावली बनाई जाए।
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प्राचार्य डा. रेनू नेगी ने कहा कि इस तरह के आयोजनों से शोधार्थियों को अनुभव मिलता है। यूकॉस्ट के सहायक निदेशक डा. डीपी उनियाल ने विभागीय प्रोजेक्ट की जानकारी दी। डा. वीपी सेमवाल ने कांफ्रेंस की उपयोगिता और विचार विमर्श के निष्कर्ष पर चर्चा की। जंतु विज्ञान की विभागाध्यक्ष डा. कविता काला और वनस्पति विज्ञान की विभागाध्यक्ष डा. आशा डोभाल ने कहा विज्ञान के विद्यार्थियों को व्यवहारिक ज्ञान के लिए क्षेत्रों का भ्रमण करना चाहिए। इस मौके पर डा. डा. आरती खंडूड़ी, डा. सुमन गुसाईं, डा. केके बंगवाल, डा. बीएस बुटोला, डा. डीपीएस भंडारी, डा. एएम पैन्यूली, डा. बीडीएस नेगी, डा. सतेंद्र ढौंडियाल, डा. पीसी पैन्यूली, डा. प्रीति शर्मा, डा. साक्षी शुक्ला, डा. भारती जायसवाल, डा. मुकेश नैथानी, डा. बद्रीश बडोनी, डा. ममता रावत, डा. नवीन रावत, डा. डीएस तोपवाल, डा. पुष्पा पंवार, डा. संजीव नेगी, डा. गुरुपद गुसाईं, डा. पदमा वशिष्ठ आदि मौजूद रहे।
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