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Tehri News: टिहरी झील में पैडल-चप्पू बोट संचालन की योजना अधर में लटकी
Tue, 20 Oct 2026 05:45 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, टिहरी
संवाद न्यूज एजेंसी, टिहरी
Updated Tue, 20 Oct 2026 05:45 PM IST
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कोटीगाड में जेटी, रास्ते और बुनियादी सुविधाओं का नहीं हुआ विस्तार
संवाद न्यूज एजेंसी
नई टिहरी। टिहरी झील में पैडल और चप्पू बोट चलाने की योजना दो साल बाद भी धरातल पर नहीं उतर पाई है। पर्यटन को बढ़ावा देने और बांध प्रभावित तिवाड़ गांव के लोगों को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए 16 पैडल-चप्पू बोट समेत कुल 20 बोट के संचालन की योजना बनाई गई थी। स्थानीय लोगों ने बोट खरीद ली और लाइसेंस शुल्क भी जमा कर दिया लेकिन कोटीगाड क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं के अभाव और बोट यूनियन के विरोध के चलते संचालन शुरू नहीं हो सका।
मुख्यमंत्री की घोषणा के तहत उत्तरायणी भागीरथी विकास समिति के माध्यम से तिवाड़ गांव के लोगों के लिए यह योजना शुरू की गई थी। समिति ने आठ पैडल बोट, आठ चप्पू बोट, दो क्याक बोट और दो कैनोपी बोट के संचालन के लिए टिहरी झील विशेष क्षेत्र पर्यटन विकास प्राधिकरण (टाडा) में 40 हजार रुपये लाइसेंस शुल्क जमा किया था। शुल्क जमा होने के बाद टाडा ने कोटीगाड में बोट संचालन की अनुमति भी दे दी थी लेकिन बोट यूनियन के विरोध के बाद वहां संचालन शुरू नहीं हो पाया। कोटीगाड में बोट संचालन के लिए जेटी, रास्ते और अन्य जरूरी सुविधाओं का भी विस्तार नहीं किया गया। उत्तरायणी भागीरथी विकास समिति के अध्यक्ष कुलदीप पंवार का कहना है कि पैडल और चप्पू बोट सेवा शुरू होने से स्थानीय लोगों को स्वरोजगार मिलता और झील में आने वाले पर्यटक भी इनका आनंद ले पाते।
कोट
टिहरी झील में कोटी कॉलोनी और आसपास के क्षेत्र में बोट संचालन की अधिकतम क्षमता पूरी हो चुकी है। रिंग रोड परियोजना के तहत पर्यटन सुविधाओं को बढ़ाने का काम चल रहा है। झील की भार क्षमता के आधार पर ही लाइसेंस जारी किए जाते है। - सोबत सिंह राणा, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी टाडा टिहरी।
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नई टिहरी। टिहरी झील में पैडल और चप्पू बोट चलाने की योजना दो साल बाद भी धरातल पर नहीं उतर पाई है। पर्यटन को बढ़ावा देने और बांध प्रभावित तिवाड़ गांव के लोगों को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए 16 पैडल-चप्पू बोट समेत कुल 20 बोट के संचालन की योजना बनाई गई थी। स्थानीय लोगों ने बोट खरीद ली और लाइसेंस शुल्क भी जमा कर दिया लेकिन कोटीगाड क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं के अभाव और बोट यूनियन के विरोध के चलते संचालन शुरू नहीं हो सका।
मुख्यमंत्री की घोषणा के तहत उत्तरायणी भागीरथी विकास समिति के माध्यम से तिवाड़ गांव के लोगों के लिए यह योजना शुरू की गई थी। समिति ने आठ पैडल बोट, आठ चप्पू बोट, दो क्याक बोट और दो कैनोपी बोट के संचालन के लिए टिहरी झील विशेष क्षेत्र पर्यटन विकास प्राधिकरण (टाडा) में 40 हजार रुपये लाइसेंस शुल्क जमा किया था। शुल्क जमा होने के बाद टाडा ने कोटीगाड में बोट संचालन की अनुमति भी दे दी थी लेकिन बोट यूनियन के विरोध के बाद वहां संचालन शुरू नहीं हो पाया। कोटीगाड में बोट संचालन के लिए जेटी, रास्ते और अन्य जरूरी सुविधाओं का भी विस्तार नहीं किया गया। उत्तरायणी भागीरथी विकास समिति के अध्यक्ष कुलदीप पंवार का कहना है कि पैडल और चप्पू बोट सेवा शुरू होने से स्थानीय लोगों को स्वरोजगार मिलता और झील में आने वाले पर्यटक भी इनका आनंद ले पाते।
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टिहरी झील में कोटी कॉलोनी और आसपास के क्षेत्र में बोट संचालन की अधिकतम क्षमता पूरी हो चुकी है। रिंग रोड परियोजना के तहत पर्यटन सुविधाओं को बढ़ाने का काम चल रहा है। झील की भार क्षमता के आधार पर ही लाइसेंस जारी किए जाते है। - सोबत सिंह राणा, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी टाडा टिहरी।
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