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नगर पंचायत को ढूंढे नहीं मिल रही जमीन
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नगर पंचायत चमियाला की राह में भूमि का अभाव बाधा बन गया। चमियाला आसपास भवन निर्माण के लिए नगर पंचायत को ढूंढे भूमि नहीं मिल रही है, जबकि भवन निर्माण के लिए शासन की ओर से आठ माह पूर्व एक करोड़ की धनराशि जारी की गई है। नगर पंचायत का अपना भवन न होने के कारण मिनी सरकार की व्यवस्थाएं पटरी पर नहीं आ पा रही है।
चमियाला को 2016 में नगर पंचायत का दर्जा मिल गया था, लेकिन इन पांच वर्षों में नगर पंचायत अपने लिए स्थायी ठोर ठिकाने की व्यवस्था नहीं तलाश पाया है। किराये के भवन पर नगर पंचायत की व्यवस्था जैसे तैसे संचालित हो रही है। नवगठित नगर पंचायत में आय के स्रोत कम होने के कारण शासन को किराये के रूप में प्रतिमाह 18 हजार का अतिरिक्त व्यय भार वहन करना पड़ रहा है। छह कमरों के किराये के भवन पर चल रहे नगर पंचायत में सबसे बड़ी समस्या कर्मचारियों के बैठने की है। स्टोर रूम न होने पर अधिकांश सामान जगह-जगह डंप करना पड़ रहा है। नगर पंचायत भवन की आवश्यकता को देखते हुए शासन ने बीते मार्च में एक करोड़ की धनराशि जारी की थी, लेकिन भूमि का अभाव नगर पंचायत की राह में बाधा बनता जा रहा है। श्रीकोट गदेरे के समीप भवन निर्माण के लिए नगर पंचायत ने काफी मशक्कत के बाद भूमि तलाशी, लेकिन वहां राजस्व विभाग की भूमि नगर पंचायत के नाम दर्ज होने से पहले ही विरोध के स्वर मुखर हो गए हैं। श्रीकोट गदेरे के पास जिस स्थान पर भूमि का चयन किया गया, वहां तक सड़क का अभाव है। गदेरे के इस पार श्रीकोट गांव के लोगों के खेत हैं। गांव के लोगों ने सड़क निर्माण के लिए अपने खेत देने से स्पष्ट इनकार कर दिया।
नगर पंचायत अध्यक्ष ममता पंवार ने बताया कि श्रीकोट के अलावा कांगड़ा मोटर मार्ग पर मठियाली तोक के समीप भी भवन निर्माण के लिए 0.1 हेक्टेयर राजस्व भूमि चिह्नित की गई है। मठियाली तोक की भूमि विभाग के नाम हस्तांतरण करने के लिए डीएम को अक्तूबर में प्रस्ताव भेजा गया है। जिला प्रशासन से अनुमति मिलने के बाद भवन निर्माण शुरू किया जाएगा। नगर पंचायत क्षेत्र में सबसे बड़ी समस्या पार्किंग सुविधा का अभाव है। पार्किंग के लिए हवा घर के समीप भूमि चिह्नित कर शहरी विकास विभाग को डीपीआर बनाकर भेजी गई है। यदि हवाघर के समीप पार्किंग बन जाती है, तो चमियाला में जाम की समस्या कभी भी आड़े नहीं आएगी।
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चमियाला को 2016 में नगर पंचायत का दर्जा मिल गया था, लेकिन इन पांच वर्षों में नगर पंचायत अपने लिए स्थायी ठोर ठिकाने की व्यवस्था नहीं तलाश पाया है। किराये के भवन पर नगर पंचायत की व्यवस्था जैसे तैसे संचालित हो रही है। नवगठित नगर पंचायत में आय के स्रोत कम होने के कारण शासन को किराये के रूप में प्रतिमाह 18 हजार का अतिरिक्त व्यय भार वहन करना पड़ रहा है। छह कमरों के किराये के भवन पर चल रहे नगर पंचायत में सबसे बड़ी समस्या कर्मचारियों के बैठने की है। स्टोर रूम न होने पर अधिकांश सामान जगह-जगह डंप करना पड़ रहा है। नगर पंचायत भवन की आवश्यकता को देखते हुए शासन ने बीते मार्च में एक करोड़ की धनराशि जारी की थी, लेकिन भूमि का अभाव नगर पंचायत की राह में बाधा बनता जा रहा है। श्रीकोट गदेरे के समीप भवन निर्माण के लिए नगर पंचायत ने काफी मशक्कत के बाद भूमि तलाशी, लेकिन वहां राजस्व विभाग की भूमि नगर पंचायत के नाम दर्ज होने से पहले ही विरोध के स्वर मुखर हो गए हैं। श्रीकोट गदेरे के पास जिस स्थान पर भूमि का चयन किया गया, वहां तक सड़क का अभाव है। गदेरे के इस पार श्रीकोट गांव के लोगों के खेत हैं। गांव के लोगों ने सड़क निर्माण के लिए अपने खेत देने से स्पष्ट इनकार कर दिया।
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नगर पंचायत अध्यक्ष ममता पंवार ने बताया कि श्रीकोट के अलावा कांगड़ा मोटर मार्ग पर मठियाली तोक के समीप भी भवन निर्माण के लिए 0.1 हेक्टेयर राजस्व भूमि चिह्नित की गई है। मठियाली तोक की भूमि विभाग के नाम हस्तांतरण करने के लिए डीएम को अक्तूबर में प्रस्ताव भेजा गया है। जिला प्रशासन से अनुमति मिलने के बाद भवन निर्माण शुरू किया जाएगा। नगर पंचायत क्षेत्र में सबसे बड़ी समस्या पार्किंग सुविधा का अभाव है। पार्किंग के लिए हवा घर के समीप भूमि चिह्नित कर शहरी विकास विभाग को डीपीआर बनाकर भेजी गई है। यदि हवाघर के समीप पार्किंग बन जाती है, तो चमियाला में जाम की समस्या कभी भी आड़े नहीं आएगी।
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