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चारधाम यात्रा को सुगम व सरल बनाने की कवायद
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चारधाम यात्रा को सुगम और सरल बनाने की मुहिम शुरू हो गई है। केंद्र सरकार के निर्देश पर सरकार ने लोनिवि ने पौराणिक पैदल यात्रा का मुख्य मार्ग रहे भटवाड़ी (बेलक) झाला-बूढ़ाकेदार-विनयखाल-हटकुणी-घुत्तू-पंवालीकांठा त्रियुगीनारायण तक सड़क निर्माण की डीपीआर भेजने के निर्देश दिए हैं। लोनिवि की ओर से तैयार की जा रही डीपीआर को यदि केंद्र सरकार स्वीकृति दे देती है, तो चारधाम आने वाले यात्रियों को करीब 60 किमी की दूरी कम तय करनी पड़ेगी।
यात्रा के लिए जब सड़क नहीं थे, तो भटवाड़ी (बेलक) झाला-बूढ़ाकेदार-विनयखाल-हटकुणी-घुत्तू-पंवालीकांठा त्रियुगीनारायण से केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री से पैदल यात्रा करते थे। इसके लिए यात्रियों को कई दिनों का पैदल सफर करना पड़ता था। वर्तमान में यात्रियों को केदारनाथ जाने के लिए भटवाड़ी से सोनप्रयाग जाने के लिए सड़क मार्ग से करीब 255 किमी की यात्रा तय करनी पड़ रही है, लेकिन यदि पैदल मार्ग को सड़क में तब्दील किया जाएगा तो यात्रियों को करीब 60 किमी की कम दूरी तय करनी पड़ेंगी। सरकार ने केंद्र सरकार की पहल पर इस पौराणिक पैदल यात्रा मार्ग पर सड़क निर्माण की तैयारियां शुरू कर दी है। सरकार ने लोनिवि को छह लाख की धनराशि देते हुए पैदल यात्रा मार्ग का सर्वेक्षण कर इस पर होने वाले खर्च की डीपीआर भेजने के निर्देश दिए हैं।
लोनिवि घनसाली ने भी 95 किमी लंबे मोटर मार्ग का सर्वे करने के लिए एक प्राइवेट एजेंसी को काम दिया है। एजेंसी ने भी बेलक से झाला तक का सर्वे पूरा कर दिया है, जबकि अवशेष का कार्य चल रहा है। एजेंसी को छह माह में सर्वे कार्य पूरा करके लोनिवि को देना है। यदि समय पर लोनिवि मार्ग का सर्वे करवाकर डीपीआर केंद्र सरकार को भेजता है, तो चारधाम यात्रियों को आवागमन में करीब 60 किमी का कम दूरी तय करनी पड़ेगी।
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भटवाड़ी (बेलक) झाला-बूढ़ाकेदार-विनयखाल-हटकुणी-घुत्तू-पंवालीकांठा-त्रियुगीनारायण मोटर मार्ग का सर्वे चल रहा है। अभी तक झाला तक सर्वे हो चुका है। सर्वे कार्य पूरा होने के बाद केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। यह मार्ग चारधाम यात्रा के लिए महत्वपूर्ण होगा।
-डीसी नौटियाल, अधिशासी अभियंता, लोनिवि घनसाली।
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यात्रा के लिए जब सड़क नहीं थे, तो भटवाड़ी (बेलक) झाला-बूढ़ाकेदार-विनयखाल-हटकुणी-घुत्तू-पंवालीकांठा त्रियुगीनारायण से केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री से पैदल यात्रा करते थे। इसके लिए यात्रियों को कई दिनों का पैदल सफर करना पड़ता था। वर्तमान में यात्रियों को केदारनाथ जाने के लिए भटवाड़ी से सोनप्रयाग जाने के लिए सड़क मार्ग से करीब 255 किमी की यात्रा तय करनी पड़ रही है, लेकिन यदि पैदल मार्ग को सड़क में तब्दील किया जाएगा तो यात्रियों को करीब 60 किमी की कम दूरी तय करनी पड़ेंगी। सरकार ने केंद्र सरकार की पहल पर इस पौराणिक पैदल यात्रा मार्ग पर सड़क निर्माण की तैयारियां शुरू कर दी है। सरकार ने लोनिवि को छह लाख की धनराशि देते हुए पैदल यात्रा मार्ग का सर्वेक्षण कर इस पर होने वाले खर्च की डीपीआर भेजने के निर्देश दिए हैं।
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लोनिवि घनसाली ने भी 95 किमी लंबे मोटर मार्ग का सर्वे करने के लिए एक प्राइवेट एजेंसी को काम दिया है। एजेंसी ने भी बेलक से झाला तक का सर्वे पूरा कर दिया है, जबकि अवशेष का कार्य चल रहा है। एजेंसी को छह माह में सर्वे कार्य पूरा करके लोनिवि को देना है। यदि समय पर लोनिवि मार्ग का सर्वे करवाकर डीपीआर केंद्र सरकार को भेजता है, तो चारधाम यात्रियों को आवागमन में करीब 60 किमी का कम दूरी तय करनी पड़ेगी।
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भटवाड़ी (बेलक) झाला-बूढ़ाकेदार-विनयखाल-हटकुणी-घुत्तू-पंवालीकांठा-त्रियुगीनारायण मोटर मार्ग का सर्वे चल रहा है। अभी तक झाला तक सर्वे हो चुका है। सर्वे कार्य पूरा होने के बाद केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। यह मार्ग चारधाम यात्रा के लिए महत्वपूर्ण होगा।
-डीसी नौटियाल, अधिशासी अभियंता, लोनिवि घनसाली।