स्वास्थ्य विभाग से हटाए गए आउटसोर्स कर्मियों की सेवा बहाली की मांग जोर पकड़ती जा रही है। सेवा बहाली की एक सूत्री मांग को लेकर हटाए गए कर्मियों ने सीएमओ कार्यालय परिसर में प्रदर्शन किया। एनएचएम कर्मियों सहित विभिन्न राजनीतिक संगठनों से जुड़े जन प्रतिनिधियों ने धरना स्थल पर पहुंचकर आंदोलन को पूर्ण समर्थन दिया। उन्होंने सरकार पर प्रशिक्षित युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने का आरोप लगाया। कहा कि विधानसभा चुनाव में भाजपा ने युवाओं को रोजगार देने का वादा किया लेकिन अब कार्मिकों के लिए रोजगार के दरवाजे बंद किए जा रहे हैं। हटाए गए कर्मियों ने मांग के समर्थन में शनिवार (आज) से अनिश्चितकालीन कालीन धरना शुरू करने का निर्णय लिया है।
कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए 2020 में स्वास्थ्य विभाग ने आउटसोर्स के माध्यम से कोविड केयर सेंटरों, कोविड अस्पतालों, सीएचसी, पीएचसी में स्टॉफ नर्स, डीईओ, वाहन चालक, लैब तकनीशियन, हाउस कीपर के पदों पर जिले के 180 लोगों को नियुक्ति दी थी। आज सभी कर्मियों की सेवाएं समाप्त कर दी गई है। इससे आक्रोशित कर्मियों ने सीएमओ कार्यालय परिसर में सेवा बहाली की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। कहा पिछले दो साल से न्यूनतम मानदेय पर अस्पतालों में सेवाएं दीं लेकिन अब सरकार ने सेवाएं समाप्त कर बेरोजगारी की लाइन में धकेल दिया। धरना स्थल पर पहुंचकर एनएचएम कर्मचारी संगठन के प्रदेश अध्यक्ष सुनील भंडारी, नगर पालिकाध्यक्ष सीमा कृषाली, प्रतापनगर ब्लॉक प्रमुख प्रदीप चंद रमोला, आकाश कृषाली, मोहन सिंह रावत, मुरारी लाल खंडवाल, कांग्रेस जिलाध्यक्ष राकेश राणा ने आंदोलन को समर्थन दिया। कहा कि किसी भी कर्मचारी के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। इस दौरान कैलाश रावत, कविता, निर्मला, प्रदीप थपलियाल, रूचि, सतपाल सिंह, पंकज सोनी आदि शामिल रहे।