{"_id":"590619404f1c1b2165441197","slug":"damage-to-crops-due-to-typhoon-and-hailstorm","type":"story","status":"publish","title_hn":"आंधी-तूफान व ओलावृष्टि से फसलों का नुकसान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आंधी-तूफान व ओलावृष्टि से फसलों का नुकसान
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, नई टिहरी
Updated Sun, 30 Apr 2017 10:35 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शनिवार देर रात को तेज आंधी-तूफान और ओलावृष्टि के साथ हुई झमाझम बारिश ने काश्तकारों के अरमानों पर पानी फेर दिया। ओलावृष्टि से चंबा मसूरी फल पट्टी में गेहूं, आलू और मटर की पैदावार बर्बाद हो गई।
विज्ञापन
सेब, आडू और पुलम के फलदार पेड़ों को भारी नुकसान पहुंचा है। पेड़ों से फूल झड़ गए हैं। मौसम में आए इस बदलाव से तापमान में भी गिरावट आई है। टिहरी जिले में पांच एमएम बारिश हुई है। कृषि वैज्ञानिकों ने काश्तकारों को खेतों में पक कर तैयार गेहूं की फसल को जल्द काटने की सलाह दी है।
विज्ञापन
चंबा-मसूरी फलपट्टी और नागणी क्षेत्र में बड़ी मात्रा में गेहूं, मटर, सेब, पुलम, आलू का उत्पादन होता है। अप्रैल माह में कम बारिश नहीं होने के कारण फसलें सूखने लगी थी। शनिवार देर रात को मौसम के एकाएक करवट बदलने से क्षेत्र में तेज आंधी, तूफान, बारिश और ओलावृष्टि हुई है।
विज्ञापन
हालांकि नागणी क्षेत्र में ओलावृष्टि न होने से काश्तकारों को राहत मिली है, लेकिन फलपट्टी में बारिश के साथ जमकर ओलावृष्टि हुई। इन दिनों सेब, आडू और पुलम के पेड़ फूलों से लकदक भरे थे।
काश्तकार रामचंद्र डबराल, रमेश कुमार का कहना है कि तेज आंधी और ओलावृष्टि से सेब के फल और फूल जमीन पर गिर गए हैं। साथ ही मटर और अन्य सब्जियां भी बर्बाद हो गई हैं। देर रात से सुबह 10 बजे तक बारिश का सिलसिला जारी रहा।
शनिवार को नई टिहरी का अधिकतम तापमान 24 डिग्री और न्यूनतम तापमान 16 डिग्री था। बारिश के बाद रविवार को अधिकतम तापमान 16 डिग्री और न्यूनतम तापमान 9 डिग्री पहुंच गया है। औद्यानिकी एवं वानिकी विवि रानीचौरी परिसर मौसम विज्ञान के तकनीकी अधिकारी डा. प्रकाश नेगी ने बताया कि गर्मी बढ़ने के कारण मौसम में दबाव बढ़ने के कारण तेज हवाएं चली हैं। जिले में पांच मिमी बारिश हुई है।
ओलावृष्टि से सेब की फसल को नुकसान
पहले फ्लावरिंग और अब फ्रूटिंग अवधि बीतने के बाद अप्रैल में दो बार की ओलावृष्टि ने गंगोत्री घाटी के उपला टकनौर क्षेत्र में सेब की फसल को तहस-नहस कर दिया है। रविवार सुबह व दोपहर में कई दौर की ओलावृष्टि से सेब के पेड़ों से फल-फूल झड़ गए हैं।
सुक्की, झाला, जसपुर, पुराली, बगोरी, हर्षिल, मुखबा, धराली आठ ग्राम पंचायतें मुख्य रूप से सेब से जुड़ी आजीविका पर निर्भर है। मुखबा की प्रधान अनीता, धराली के महेश पंवार, हर्षिल के डा. नागेंद्र सिंह तथा सुक्की के मोहन सिंह बताते है कि पहले पांच-छह अप्रैल की रात को करीब आठ घंटे तक जमकर ओलावृष्टि हुई थी। इस समय सुक्की, झाला, मुखबा आदि कम ऊंचाई तथा गर्म ढाल वाले बगीचों में फलावरिंग चल रही थी। इससे सुक्की गांव के नीचे वाले करीब 20 परिवारों के बगीचों के पेड़ों के फल-फूल झड़ गए हैं। इस समय देर से फ्लवारिंग वाले कुछ गांवों के बगीचों को ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचा। इस बार फ्रूटिंग अवधि में सेब के दाने मटर के आकार के हो गए थे, जिन्हें रविवार की ओलावृष्टि ने चौपट कर