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मांसाहारी व शाकाहारी जीवों की होगी गणना
नई टिहरी
Updated Mon, 07 Dec 2015 09:04 PM IST
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मध्य हिमालय क्षेत्र में वन्य जीवों के चिह्नों की गणना के लिए तीन रेंजों के वन वीट अधिकारियों को गणना की ट्रेनिंग दी गई, जिसमें बताया गया कि गुलदार और अन्य परभक्षियों के होने, उपयोग की सघनता के चिह्नों के आंकलन के आंकडे़ किस तरह से तैयार किए जाएं इसकी जानकारी दी गई। गणना कार्य 10 से 13 दिसंबर तक जिले के विभिन्न रेजों में की जाएगी।
सोमवार को वन चेतना केंद्र में टिहरी, लंबगांव और पौखाल रेंजों के वन वीट अधिकारियों की वन्य जीवों की गणना का प्रशिक्षण दिया गया। सहायक वन संरक्षक वीके सिंह ने बताया कि वन्य जीवों की गणना अनुमान से ही लगाई जा सकती है। इसके लिए वन क्षेत्र और उसके प्राकृतिक वास का वैज्ञानिक प्रबंधन, संबंधित क्षेत्र में कितनी प्रजाति के वन्य प्राणी हैं, मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं की रोकथाम की रणनीति और जंगल की जैव विविधता का अनुमान जरूरी है। बताया कि इस दौरान सावधानी बरतना जरूरी है। कहा कि प्रत्येक बीट में पांच किमी के दायरे में गुलदार और अन्य मांस भक्षियों के पद चिह्नों की खोज की जानी चाहिए। बताया कि आंकडे़ ईमानदारी से एकत्रित करें। गणना के दौरान कोई चिह्न नहीं मिलता है, तो उसे भी प्रपत्र पर दर्ज करें। टिहरी वन क्षेत्राधिकारी एनएल डोभाल ने बताया कि मांस भक्षियों में गुलदार, भालू, जैकाल, लोमड़ी और शाकाहारियों में काकड़, सांभर, घुरल, सुअरों के अलावा बंदरों व लंगूरों की गणना भी की जानी है। इस मौके पर रेंज अधिकारी लंबगांव बिजेंद्र दत्त तिवाड़ी, शरत सिंह नेगी, हुकम लाल आदि मौजूद थे।
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सोमवार को वन चेतना केंद्र में टिहरी, लंबगांव और पौखाल रेंजों के वन वीट अधिकारियों की वन्य जीवों की गणना का प्रशिक्षण दिया गया। सहायक वन संरक्षक वीके सिंह ने बताया कि वन्य जीवों की गणना अनुमान से ही लगाई जा सकती है। इसके लिए वन क्षेत्र और उसके प्राकृतिक वास का वैज्ञानिक प्रबंधन, संबंधित क्षेत्र में कितनी प्रजाति के वन्य प्राणी हैं, मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं की रोकथाम की रणनीति और जंगल की जैव विविधता का अनुमान जरूरी है। बताया कि इस दौरान सावधानी बरतना जरूरी है। कहा कि प्रत्येक बीट में पांच किमी के दायरे में गुलदार और अन्य मांस भक्षियों के पद चिह्नों की खोज की जानी चाहिए। बताया कि आंकडे़ ईमानदारी से एकत्रित करें। गणना के दौरान कोई चिह्न नहीं मिलता है, तो उसे भी प्रपत्र पर दर्ज करें। टिहरी वन क्षेत्राधिकारी एनएल डोभाल ने बताया कि मांस भक्षियों में गुलदार, भालू, जैकाल, लोमड़ी और शाकाहारियों में काकड़, सांभर, घुरल, सुअरों के अलावा बंदरों व लंगूरों की गणना भी की जानी है। इस मौके पर रेंज अधिकारी लंबगांव बिजेंद्र दत्त तिवाड़ी, शरत सिंह नेगी, हुकम लाल आदि मौजूद थे।
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