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शिकायतकर्ता को 60 हजार रुपये का भुगतान करे कंपनी
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जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने कोलकाता की क्लेहॉर्न मोटर्स कंपनी पर शिकायतकर्ता को 50 हजार आर्थिक क्षति, 10 हजार मानसिक क्षतिपूर्ति और छह सीटर बोट उपलब्ध कराने को कहा है। आयोग ने जून 2019 से छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से भुगतान करने के आदेश दिए हैं।
अधिवक्ता जयप्रकाश पांडेय ने बताया कि शिकायतकर्ता जगत सिंह बिष्ट निवासी 9डी बौराड़ी ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग को दिए शिकायती पत्र में बताया था कि उन्होंने क्लेहॉर्न मोटर्स से जून 2017 में 15 हॉर्सपावर का वाटर स्कूटर खरीदा था, जिसकी छह माह की वारंटी थी। जुलाई 2017 में स्कूटर प्राप्त करने पर टिहरी बांध की झील में संचालित किया गया, तो उसमें कई तकनीकी खामियां मिलने पर कंपनी के मालिक कृष्णा कुमार शाह जल्द ठीक करने का आश्वासन दिया, लेकिन कंपनी स्कूटर अपने साथ ले गई और बदले में एक लाख रुपये अतिरिक्त लेकर 30 एचपी की छह सीटर बोट बताकर भेजी गई। लेकिन कंपनी ने फर्जीवाड़ा कर बोट पर पुराने स्कूटर का 15 एचपी का इंजन लगाकर भेज दी। टिहरी झील विशेष क्षेत्र पर्यटन विकास प्राधिकरण (टाडा) द्वारा वह बोट पांच सीटर में पास की गई। कंपनी के इंजीनियर ने बोट का परीक्षण करने के बाद सूचना देने के लिए कंपनी के मालिक को फोन किया, लेकिन उन्होंने कोई उत्तर नहीं दिया। अधिवक्ता पांडेय ने इस बाबत आयोग के समक्ष कई साक्ष्य प्रस्तुत कर 19 लाख 17 हजार रुपये की क्षतिपूर्ति का दावा प्रस्तुत किया गया। आयोग ने विपक्षी कंपनी को अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस भेजा, लेकिन वह उपस्थित नहीं हुए। जिस पर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष व जिला जज अनुज कुमार संगल, सदस्य विनोद रतूड़ी और गीतांजलि सजवाण ने मामले का एकपक्षीय निस्तारण करते हुए कहा कि कंपनी शिकायतकर्ता को 50 हजार रुपये छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ आर्थिक क्षति और 10 हजार रुपये मानसिक क्षतिपूर्ति का भुगतान करे।
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अधिवक्ता जयप्रकाश पांडेय ने बताया कि शिकायतकर्ता जगत सिंह बिष्ट निवासी 9डी बौराड़ी ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग को दिए शिकायती पत्र में बताया था कि उन्होंने क्लेहॉर्न मोटर्स से जून 2017 में 15 हॉर्सपावर का वाटर स्कूटर खरीदा था, जिसकी छह माह की वारंटी थी। जुलाई 2017 में स्कूटर प्राप्त करने पर टिहरी बांध की झील में संचालित किया गया, तो उसमें कई तकनीकी खामियां मिलने पर कंपनी के मालिक कृष्णा कुमार शाह जल्द ठीक करने का आश्वासन दिया, लेकिन कंपनी स्कूटर अपने साथ ले गई और बदले में एक लाख रुपये अतिरिक्त लेकर 30 एचपी की छह सीटर बोट बताकर भेजी गई। लेकिन कंपनी ने फर्जीवाड़ा कर बोट पर पुराने स्कूटर का 15 एचपी का इंजन लगाकर भेज दी। टिहरी झील विशेष क्षेत्र पर्यटन विकास प्राधिकरण (टाडा) द्वारा वह बोट पांच सीटर में पास की गई। कंपनी के इंजीनियर ने बोट का परीक्षण करने के बाद सूचना देने के लिए कंपनी के मालिक को फोन किया, लेकिन उन्होंने कोई उत्तर नहीं दिया। अधिवक्ता पांडेय ने इस बाबत आयोग के समक्ष कई साक्ष्य प्रस्तुत कर 19 लाख 17 हजार रुपये की क्षतिपूर्ति का दावा प्रस्तुत किया गया। आयोग ने विपक्षी कंपनी को अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस भेजा, लेकिन वह उपस्थित नहीं हुए। जिस पर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष व जिला जज अनुज कुमार संगल, सदस्य विनोद रतूड़ी और गीतांजलि सजवाण ने मामले का एकपक्षीय निस्तारण करते हुए कहा कि कंपनी शिकायतकर्ता को 50 हजार रुपये छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ आर्थिक क्षति और 10 हजार रुपये मानसिक क्षतिपूर्ति का भुगतान करे।
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