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श्रद्धालुओं की संख्या बढने पर अब 16 ट्रालियों होने लगी संचालित
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सिद्धपीठ सुरकंडा देवी मंदिर के लिए रोपवे सेवा शुरू होने के बाद से श्रद्धालुओं की संख्या निरंतर बढ़ती जा रही है। दो माह में लगभग 75 हजार से अधिक श्रद्धालु रोपवे से सुरकंडा मंदिर में दर्शनों के लिए पहुंच चुके हैं। श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने पर ट्रालियों की संख्या भी 12 से बढ़कर 16 हो गई है। एक घंटे में लगभग दो सौ श्रद्धालु कद्दूखाल से आसानी से मंदिर पहुंच रहे हैं, लेकिन कद्दूखाल में पार्किंग सुविधा नहीं होने के कारण सुरकंडा की यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पार्किंग के अभाव में वाहन चालक सड़क किनारे आड़े-तिरछे वाहन खड़े करने को मजबूर हैं। इससे कद्दूखाल में कई बार जाम की समस्या उत्पन्न हो रही है।
रोपवे सेवा शुरू होने से पहले श्रद्धालुओं को सुरकंडा मंदिर पहुंचने के लिए कद्दूखाल से लगभग डेढ़ किमी की खड़ी चढ़ाई पार करनी पड़ती थी, जिसमें एक घंटे का वक्त लग जाता था। 32 करोड़ की लागत से तैयार सुरकंडा देवी रोपवे बीते 21 अप्रैल सेे पीपीपी मोड में संचालित होने लगा था। एक मई को सीएम पुष्कर सिंह धामी ने सुरकंडा पहुंचकर विधिवत रोपवे सेवा का शुभारंभ किया था।
तब से दो माह के अंतर्गत लगभग 75 हजार श्रद्धालु रोपवे से दर्शनों के लिए सिद्धपीठ सुरकंडा मंदिर पहुंच चुके हैं। मंदिर तक आनेजाने के लिए रोपवे पर 16 ट्रालियां लगाई गई थी, लेकिन पहले श्रद्धालुओं की संख्या कम होने के कारण 12 ट्रालियां संचालित की जा रही थी। श्रद्धालुओं की संख्या में इजाफा होने के बाद रोपवे प्रोजेक्ट कंपनी ने अब सभी 16 ट्रालियों की सेवा शुरू कर दी है।
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सुरकंडा देवी रोपवे प्रोजेक्ट के निदेशक समीर शूरी ने बताया कि सुरकंडा आने वाले श्रद्धालुओं को उच्च स्तरीय सुविधाएं देने का प्रयास किया जा रहा है। चाय, काफी की सुविधा भी श्रद्धालुओं को मुहैया कराई जाएगी। यात्री प्रतिक्षालय का विस्तार किया जा रहा है। सुरकंडा मंदिर समिति के अध्यक्ष जितेंद्र नेगी ने बताया कि रोपवे सेवा शुरू होने के बाद श्रद्धालुओं की संख्या काफी बढ़ी है। पहले लगभग चार से पांच सौ श्रद्धालु प्रतिदिन पहुंचते थे, अब रोपवे सेवा शुरू होने के बाद सात से आठ सौ श्रद्धालु प्रतिदिन मंदिर में दर्शनों के लिए पहुंच रहे हैं। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए कद्दूखाल में वाहन पार्किंग का निर्माण करना जरूरी है।
कद्दूखाल में वाहन पार्किंग के लिए जगह तलाश की गई है। जल्द ही भूमि का प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा। फिलहाल वैकल्पिक व्यवस्था के तहत कद्दूखाल में लोनिवि अतिथि गृह के सामने पार्किंग की व्यवस्था बनाई गई है।
-अपूर्वा सिंह, उप जिलाधिकारी, नई टिहरी टिहरी
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रोपवे सेवा शुरू होने से पहले श्रद्धालुओं को सुरकंडा मंदिर पहुंचने के लिए कद्दूखाल से लगभग डेढ़ किमी की खड़ी चढ़ाई पार करनी पड़ती थी, जिसमें एक घंटे का वक्त लग जाता था। 32 करोड़ की लागत से तैयार सुरकंडा देवी रोपवे बीते 21 अप्रैल सेे पीपीपी मोड में संचालित होने लगा था। एक मई को सीएम पुष्कर सिंह धामी ने सुरकंडा पहुंचकर विधिवत रोपवे सेवा का शुभारंभ किया था।
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तब से दो माह के अंतर्गत लगभग 75 हजार श्रद्धालु रोपवे से दर्शनों के लिए सिद्धपीठ सुरकंडा मंदिर पहुंच चुके हैं। मंदिर तक आनेजाने के लिए रोपवे पर 16 ट्रालियां लगाई गई थी, लेकिन पहले श्रद्धालुओं की संख्या कम होने के कारण 12 ट्रालियां संचालित की जा रही थी। श्रद्धालुओं की संख्या में इजाफा होने के बाद रोपवे प्रोजेक्ट कंपनी ने अब सभी 16 ट्रालियों की सेवा शुरू कर दी है।
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सुरकंडा देवी रोपवे प्रोजेक्ट के निदेशक समीर शूरी ने बताया कि सुरकंडा आने वाले श्रद्धालुओं को उच्च स्तरीय सुविधाएं देने का प्रयास किया जा रहा है। चाय, काफी की सुविधा भी श्रद्धालुओं को मुहैया कराई जाएगी। यात्री प्रतिक्षालय का विस्तार किया जा रहा है। सुरकंडा मंदिर समिति के अध्यक्ष जितेंद्र नेगी ने बताया कि रोपवे सेवा शुरू होने के बाद श्रद्धालुओं की संख्या काफी बढ़ी है। पहले लगभग चार से पांच सौ श्रद्धालु प्रतिदिन पहुंचते थे, अब रोपवे सेवा शुरू होने के बाद सात से आठ सौ श्रद्धालु प्रतिदिन मंदिर में दर्शनों के लिए पहुंच रहे हैं। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए कद्दूखाल में वाहन पार्किंग का निर्माण करना जरूरी है।
कद्दूखाल में वाहन पार्किंग के लिए जगह तलाश की गई है। जल्द ही भूमि का प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा। फिलहाल वैकल्पिक व्यवस्था के तहत कद्दूखाल में लोनिवि अतिथि गृह के सामने पार्किंग की व्यवस्था बनाई गई है।
-अपूर्वा सिंह, उप जिलाधिकारी, नई टिहरी टिहरी