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Tehri News: पिराडी गांव के 50 परिवार जंगल रास्ते आवागमन करने को मजबूर

Mon, 03 Mar 2025 04:48 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, टिहरी
संवाद न्यूज एजेंसी, टिहरी Updated Mon, 03 Mar 2025 04:48 PM IST
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50 families of Piradi village are forced to travel through the forest
ब्लॉक मुख्यालय से महज दो किमी दूर पिराड़ी गांव के लोग सड़क से हैं वंचित
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कंडीसौड़ (टिहरी)। टिहरी बांध विस्थापितों के पुनर्वास के बाद भी मूलभूत सुविधाओं का अभाव बना है। थौलधार ब्लॉक के पिराडी गांव ब्लॉक मुख्यालय से महज दो किमी की दूरी पर स्थित है, लेकिन आज भी सड़क से वंचित है। गांव में निवासरत 50 परिवारों के बच्चों से लेकर बीमार व बुजुर्गों को स्कूल और बाजार पहुंचने के लिए जंगल के रास्ते से होकर गुजरना पड़ता है।
सड़क के अभाव में पिराडी गांव से ब्लॉक मुख्यालय की दूरी लगभग तीन किमी हो जाती है। ग्रामीण लंबे समय से सड़क निर्माण की मांग कर रहे हैं। गांव के पूर्व प्रधान भोला दास, भारत लाल ने बताया कि सड़क नहीं होने से सबसे ज्यादा दिक्कत छोटे बच्चों को होती है। पिछली सर्दियों में जंगल के रास्ते में गुलदार के हमले की आशंका के कारण एक सप्ताह तक बच्चे स्कूल नहीं जा पाए थे।
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जंगली जानवरों के भय से ग्रामीणों को शाम होते ही घरों में दुबकने को मजबूर है। यदि गांव तक सड़क होती, तो वाहनों से लोग आसानी से पहुंच पाते। गांव के दिल सिंह कुमाईं, राजेंद्र सिंह कुमाईं ने बताया कि उनका मूल गांव छाम था। जो 2005 में टिहरी बांध में डूब गया था। पुनर्वास के तहत 50 परिवारों ने अपनी ही भूमि पर पिराडी तोक में मकान बनाए, लेकिन सड़क नहीं होने की समस्या आज भी जस की तस बनी हुई है।
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10 साल पहले सड़क निर्माण का प्रस्ताव भेजा था, जिस पर क्षेत्रीय विधायक प्रीतम सिंह पंवार ने अधिशासी अभियंता ग्रामीण विकास विभाग को पत्र भी लिखा था। अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। भोला दास, कुशाल सिंह, मदन सिंह, सोबत सिंह, उमेद सिंह, आनंद सिंह, चतर सिंह, वैशाख सिंह राणा ने जल्द सड़क निर्माण करने की मांग की है। ग्रामीण विकास विभाग के सहायक अभियंता अनिल कुमार का कहना है कि यदि भारत सरकार के मानक के अनुसार 2011 की जनगणना में यदि पिराडी गांव की आबादी 250 से अधिक होती, तो सड़क योजना स्वीकृत हो सकती थी।
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