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रवि योग और पुष्य नक्षत्र के संयोग में मनाया जाएगा अक्षय तृतीया
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चंबा (टिहरी)। भगवान विष्णु को समर्पित अक्षय तृतीया का महापर्व बैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाता है। इस साल अक्षय तृतीया पर रवि योग और रोहिणी नक्षत्र का अद्भुत संयोग बन रहा है, जिससे इस दिन किए गए गंगा स्नान, जप, तप, हवन और दान का फल बहुत अधिक बढ़ जाता है। साथ ही इस दिन सूर्य, शुक्र और चंद्र अपनी उच्च राशि में गोचर करेंगे। इस दिन बिना मुहूर्त विचार किए हुए नए काम की शुरुआत उन्नतिकारक होती है।
सभी 12 महीनों की शुक्ल पक्ष तृतीया शुभ मानी जाती है, लेकिन बैशाख माह की तिथि स्वयंसिद्ध मुहूर्तों में मानी गई है। वहीं इस वर्ष कई दशक बाद मंगलवार (आज) पड़ रही अक्षय तृतीया पर ग्रहों का विशेष संयोग बन रहा है, जो हर राशि के लिए अच्छा रहेगा। अक्षय तृतीया पर रवि योग और रोहिणी नक्षत्र की दुर्लभ जोड़ी के साथ ही सूर्य, शुक्र और चंद्र अपनी उच्च राशि में गोचर करेंगे। लक्ष्मी पूजन का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त सुबह सूर्योदय से शुरू होकर दोपहर 12.17 बजे तक रहेगा। वेद-पुराणों के अनुसार इस दिन जो भी शुभ कर्म किए जाते हैं, उनका अक्षय फल मिलता है। इसी कारण इसे अक्षय तृतीया कहा जाता है।
मान्यता है कि इस दिन बिना कोई पंचांग देखे कोई भी शुभ व मांगलिक कार्य जैसे विवाह, यज्ञोपवीत, नामकरण, मुंडन, गृह प्रवेश, घर-भूखंड आदि की खरीदारी से संबंधित कार्य किए जा सकते हैं। पुराणों में लिखा है कि इस दिन पितरों के निमित्त तर्पण, पिंडदान का विशेष महत्व है। इस दिन गंगा स्नान करने और भगवत पूजन करने से पापों का क्षय होता है। यदि यह तिथि रोहिणी नक्षत्र के दिन आए तो इस दिन किए गए दान, जप, तप, हवन का पुण्य लाभ कई गुना अधिक मिलता है। अक्षय तृतीया के दिन ही भगवान विष्णु ने परशुराम के रूप में धरती पर छठा अवतार लिया था। इस दिन धन की देवी मां लक्ष्मी के साथ विष्णु की पूजा की जाती है। भविष्य पुराण के अनुसार सतयुग और त्रेतायुग का प्रारंभ इसी तिथि से हुआ था। उत्तराखंड विद्वत सभा के पूर्व अध्यक्ष पं. उदय शंकर भट्ट का कहना है कि अक्षय तृतीया पर गंगा स्नान, भगवत पूजन और दान का विशेष महत्व है। इस साल रोहिणी नक्षत्र और रवि योग का संयोग होने से श्रद्धालुओं को जप तप हवन का फल कई गुणा मिलेगा।
सभी 12 महीनों की शुक्ल पक्ष तृतीया शुभ मानी जाती है, लेकिन बैशाख माह की तिथि स्वयंसिद्ध मुहूर्तों में मानी गई है। वहीं इस वर्ष कई दशक बाद मंगलवार (आज) पड़ रही अक्षय तृतीया पर ग्रहों का विशेष संयोग बन रहा है, जो हर राशि के लिए अच्छा रहेगा। अक्षय तृतीया पर रवि योग और रोहिणी नक्षत्र की दुर्लभ जोड़ी के साथ ही सूर्य, शुक्र और चंद्र अपनी उच्च राशि में गोचर करेंगे। लक्ष्मी पूजन का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त सुबह सूर्योदय से शुरू होकर दोपहर 12.17 बजे तक रहेगा। वेद-पुराणों के अनुसार इस दिन जो भी शुभ कर्म किए जाते हैं, उनका अक्षय फल मिलता है। इसी कारण इसे अक्षय तृतीया कहा जाता है।
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मान्यता है कि इस दिन बिना कोई पंचांग देखे कोई भी शुभ व मांगलिक कार्य जैसे विवाह, यज्ञोपवीत, नामकरण, मुंडन, गृह प्रवेश, घर-भूखंड आदि की खरीदारी से संबंधित कार्य किए जा सकते हैं। पुराणों में लिखा है कि इस दिन पितरों के निमित्त तर्पण, पिंडदान का विशेष महत्व है। इस दिन गंगा स्नान करने और भगवत पूजन करने से पापों का क्षय होता है। यदि यह तिथि रोहिणी नक्षत्र के दिन आए तो इस दिन किए गए दान, जप, तप, हवन का पुण्य लाभ कई गुना अधिक मिलता है। अक्षय तृतीया के दिन ही भगवान विष्णु ने परशुराम के रूप में धरती पर छठा अवतार लिया था। इस दिन धन की देवी मां लक्ष्मी के साथ विष्णु की पूजा की जाती है। भविष्य पुराण के अनुसार सतयुग और त्रेतायुग का प्रारंभ इसी तिथि से हुआ था। उत्तराखंड विद्वत सभा के पूर्व अध्यक्ष पं. उदय शंकर भट्ट का कहना है कि अक्षय तृतीया पर गंगा स्नान, भगवत पूजन और दान का विशेष महत्व है। इस साल रोहिणी नक्षत्र और रवि योग का संयोग होने से श्रद्धालुओं को जप तप हवन का फल कई गुणा मिलेगा।
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