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हत्या के दोषियों और पुलिस के खिलाफ करें कड़ी कार्रवाई
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नैनबाग (टिहरी)। विवाह समारोह में हुई मारपीट से घायल अनुसूचित जाति के युवक की मौत से गुस्साए परिजन दोषियों और पुलिस के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग को लेकर रविवार देर शाम तक देहरादून कोरोनेशन अस्पताल में धरने पर डटे रहे। शव को लेकर सीएम आवास जाने की भनक लगते ही पुलिस ने उन्हें रोक दिया और मामला नैनबाग पुलिस चौकी क्षेत्र का बताकर शव को लेकर रवाना हो गए। परिजनों का आरोप है कि पुलिस चौकी जाने के बजाए रात को ही शव को लेकर गांव पहुंच गई। परिजनों ने इस पर कड़ा विरोध जताया। सोमवार सुबह नैनबाग पहुंचे धनोल्टी एसडीएम रजा अब्बास ने परिजनों के साथ वार्ता कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिया। उसके बाद दोपहर एक बजे यमुना नदी घाट पर युवक का दाह संस्कार किया गया।
जौनपुर ब्लॉक के श्रीकोट गांव में दस दिन पहले एक विवाह समारोह में दबंगों की पिटाई से घायल जितेंद्र दास (23) निवासी बसाण गांव ने उपचार के दौरान देहरादून अस्पताल में दम तोड़ दिया था। घटना से गुस्साए परिजनों ने अस्पताल में धरना देते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने और मामले में लापरवाही बरतने वाले पुलिस कर्मियों की बर्खास्तगी की मांग को लेकर कोरोनेशन अस्पताल में धरना दिया। पुलिस ने घटनास्थल नैनबाग क्षेत्र बताकर शव को लेकर नैनबाग निकल गए। परिजनों ने आरोप लगाया कि पुलिस शव को पुलिस चौकी ले जाने के बजाए गांव ले जाने लगी। इसका विरोध करते हुए परिजन नैनबाग में एंबुलेंस से उतर गए। बावजूद पुलिस शव को लेकर गांव पहुंच गई, लेकिन गांव में शव की सुपुर्दगी लेना वाला कोई नहीं मिला। इस बीच सोमवार को नैनबाग पहुंचे धनोल्टी एसडीएम को भी ग्रामीणों के विरोध का सामना करना पड़ा। परिजनों ने कहा कि मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई होने के बाद ही दाह संस्कार किया जाएगा। काफी देर तक चली वार्ता के बाद परिजन शव का दाह संस्कार करने को राजी हो गए।
पीड़ित परिवार ने एसडीएम को दिए ज्ञापन में कहा कि कैंपटी थाना पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया है। हत्या का मुकदमा हल्की धाराओं में दर्ज किया गया है। अनुसूचित जाति जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के सेक्शन 4 (1) और सेक्शन 4 (2) (बी) के तहत मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए था। एसडीएम को दिए ज्ञापन में दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी करने, थानाध्यक्ष और सीओ नरेंद्रनगर को बर्खास्त करने, पीड़ित परिवार के सदस्य को नौकरी और परिवार को आर्थिक मदद देने की मांग की गई है। एसडीएम ने बताया कि परिजनों का ज्ञापन उच्चाधिकारियों को प्रेषित किया गया है। आदेशानुसार अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।
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न्याय की गुहार लगाई
परिजनों ने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग भारत सरकार के सदस्य डा. स्वराज विद्वान को पत्र लिखकर मामले में हस्तक्षेप करने की गुहार लगाते हुए पीड़ित पक्ष को न्याय दिलाने की मांग की। परिजनों ने विद्वान से गांव का स्थलीय मुआयना कर घटना की जानकारी जुटाने की मांग भी है।
33 घंटे बाद हुआ दाह संस्कार
लंबी जद्दोजहद के बाद युवक की मौत के 33 घंटे बाद शव का दाह संस्कार किया गया। पूर्व खेल मंत्री नारायण सिंह राणा, राजेंद्र कोहली, शेर सिंह डोगरा, जबर सिंह वर्मा, चमन दास, मोहनलाल निराला, बचन दास, मदन दास आदि लोग शामिल हुए। वहीं, राज्यसभा सांसद प्रदीप टम्टा ने श्रीकोट गांव में हुई युवक की मौत पर दुख व्यक्त करते हुए घटना को शर्मनाक बताया। उन्होंने डीएम, एसएसपी से फोन पर वार्ता कर आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए। कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश संयोजक संपत लाल शाह, जिला सर्वोदय मंडल के संयोजक साहब सिंह सजवाण ने आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।
जौनपुर ब्लॉक के श्रीकोट गांव में दस दिन पहले एक विवाह समारोह में दबंगों की पिटाई से घायल जितेंद्र दास (23) निवासी बसाण गांव ने उपचार के दौरान देहरादून अस्पताल में दम तोड़ दिया था। घटना से गुस्साए परिजनों ने अस्पताल में धरना देते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने और मामले में लापरवाही बरतने वाले पुलिस कर्मियों की बर्खास्तगी की मांग को लेकर कोरोनेशन अस्पताल में धरना दिया। पुलिस ने घटनास्थल नैनबाग क्षेत्र बताकर शव को लेकर नैनबाग निकल गए। परिजनों ने आरोप लगाया कि पुलिस शव को पुलिस चौकी ले जाने के बजाए गांव ले जाने लगी। इसका विरोध करते हुए परिजन नैनबाग में एंबुलेंस से उतर गए। बावजूद पुलिस शव को लेकर गांव पहुंच गई, लेकिन गांव में शव की सुपुर्दगी लेना वाला कोई नहीं मिला। इस बीच सोमवार को नैनबाग पहुंचे धनोल्टी एसडीएम को भी ग्रामीणों के विरोध का सामना करना पड़ा। परिजनों ने कहा कि मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई होने के बाद ही दाह संस्कार किया जाएगा। काफी देर तक चली वार्ता के बाद परिजन शव का दाह संस्कार करने को राजी हो गए।
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पीड़ित परिवार ने एसडीएम को दिए ज्ञापन में कहा कि कैंपटी थाना पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया है। हत्या का मुकदमा हल्की धाराओं में दर्ज किया गया है। अनुसूचित जाति जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के सेक्शन 4 (1) और सेक्शन 4 (2) (बी) के तहत मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए था। एसडीएम को दिए ज्ञापन में दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी करने, थानाध्यक्ष और सीओ नरेंद्रनगर को बर्खास्त करने, पीड़ित परिवार के सदस्य को नौकरी और परिवार को आर्थिक मदद देने की मांग की गई है। एसडीएम ने बताया कि परिजनों का ज्ञापन उच्चाधिकारियों को प्रेषित किया गया है। आदेशानुसार अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।
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न्याय की गुहार लगाई
परिजनों ने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग भारत सरकार के सदस्य डा. स्वराज विद्वान को पत्र लिखकर मामले में हस्तक्षेप करने की गुहार लगाते हुए पीड़ित पक्ष को न्याय दिलाने की मांग की। परिजनों ने विद्वान से गांव का स्थलीय मुआयना कर घटना की जानकारी जुटाने की मांग भी है।
33 घंटे बाद हुआ दाह संस्कार
लंबी जद्दोजहद के बाद युवक की मौत के 33 घंटे बाद शव का दाह संस्कार किया गया। पूर्व खेल मंत्री नारायण सिंह राणा, राजेंद्र कोहली, शेर सिंह डोगरा, जबर सिंह वर्मा, चमन दास, मोहनलाल निराला, बचन दास, मदन दास आदि लोग शामिल हुए। वहीं, राज्यसभा सांसद प्रदीप टम्टा ने श्रीकोट गांव में हुई युवक की मौत पर दुख व्यक्त करते हुए घटना को शर्मनाक बताया। उन्होंने डीएम, एसएसपी से फोन पर वार्ता कर आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए। कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश संयोजक संपत लाल शाह, जिला सर्वोदय मंडल के संयोजक साहब सिंह सजवाण ने आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।