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महिलाओं को अपने अधिकार मांगने की जरूरत नहीं
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चंबा (टिहरी)। एसआरटी परिसर बादशाहीथौल के बीएड विभाग में अमर उजाला अपराजिता महाअभियान के तहत बृहस्पतिवार महिला अधिकार और आत्म सुरक्षा विषय पर गोष्ठी आयोजित की गई। वक्ताओं ने कहा कि ईश्वर ने महिलाओं को शक्तिशाली बनाया है। जरूरत है जुनून और संवेदनशीलता के साथ अपनी ताकत को पहचानने की। सफलता पाने के लिए जज्बा और जुनून होना चाहिए।
अधिवक्ता बीना राणा ने कहा कि परिवार से लेकर समाज की जिम्मेदारी संभालने में महिलाएं पुरुषों से कहीं ज्यादा सक्षम है। महिलाओं को अपने अधिकार पुरुषों से मांगने की जरूरत नहीं है। ईश्वर ने उन्हें शक्तिशाली बनाया है। यदि महिला ने अपनी शक्ति को सही तरह से पहचान लिया, तो उसे आगे बढ़ने से कोई रोक नहीं सकता है। कामयाबी पाने के लिए जुनून और संवेदनशीलता बेहद जरूरी है।
अधिवक्ता शांति प्रसाद भट्ट ने कहा कि महिलाएं आज हर क्षेत्र में अपनी मौजूदगी दर्ज कर रही हैं। जमीन से लेकर अंतरिक्ष तक महिलाओं के कदमों की छाप मौजूद है। महिलाओं की जागरूकता से वर्तमान दौर में हत्या, दहेज हत्या और घरेलू हिंसा के मुकदमों में कमी आई है, लेकिन साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं, जो भविष्य के लिए सुखद नहीं है।
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परिसर निदेशक प्रो. आरसी रमोला ने कहा कि महिला और पुरुष दोनों एक दूसरे के पूरक हैं। संचालन पुस्तकालयाध्यक्ष हंसराज बिष्ट ने किया। गोष्ठी में उपस्थित प्रतिभागियों ने नारी गरिमा की रक्षा के लिए शपथपत्र भरकर महिला अपराधों के विरुद्ध चुप्पी तोड़ने का संकल्प लिया। इस मौके पर प्रो. सुनीता गोदियाल, प्रो. प्रभा पंत, प्रो. बीना जोशी, प्रो. गीताली पडियार, प्रो. अर्चना शाह, डा. निधि सजवाण, दीप्ति राणा, शिवानी पंवार, अल्का नेगी, छात्र संघ अध्यक्ष अंकित सजवाण, अक्षत बिजल्वाण आदि उपस्थित रहे।
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अधिवक्ता बीना राणा ने कहा कि परिवार से लेकर समाज की जिम्मेदारी संभालने में महिलाएं पुरुषों से कहीं ज्यादा सक्षम है। महिलाओं को अपने अधिकार पुरुषों से मांगने की जरूरत नहीं है। ईश्वर ने उन्हें शक्तिशाली बनाया है। यदि महिला ने अपनी शक्ति को सही तरह से पहचान लिया, तो उसे आगे बढ़ने से कोई रोक नहीं सकता है। कामयाबी पाने के लिए जुनून और संवेदनशीलता बेहद जरूरी है।
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अधिवक्ता शांति प्रसाद भट्ट ने कहा कि महिलाएं आज हर क्षेत्र में अपनी मौजूदगी दर्ज कर रही हैं। जमीन से लेकर अंतरिक्ष तक महिलाओं के कदमों की छाप मौजूद है। महिलाओं की जागरूकता से वर्तमान दौर में हत्या, दहेज हत्या और घरेलू हिंसा के मुकदमों में कमी आई है, लेकिन साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं, जो भविष्य के लिए सुखद नहीं है।
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परिसर निदेशक प्रो. आरसी रमोला ने कहा कि महिला और पुरुष दोनों एक दूसरे के पूरक हैं। संचालन पुस्तकालयाध्यक्ष हंसराज बिष्ट ने किया। गोष्ठी में उपस्थित प्रतिभागियों ने नारी गरिमा की रक्षा के लिए शपथपत्र भरकर महिला अपराधों के विरुद्ध चुप्पी तोड़ने का संकल्प लिया। इस मौके पर प्रो. सुनीता गोदियाल, प्रो. प्रभा पंत, प्रो. बीना जोशी, प्रो. गीताली पडियार, प्रो. अर्चना शाह, डा. निधि सजवाण, दीप्ति राणा, शिवानी पंवार, अल्का नेगी, छात्र संघ अध्यक्ष अंकित सजवाण, अक्षत बिजल्वाण आदि उपस्थित रहे।