{"_id":"5c0954ffbdec2241505b9b5f","slug":"154411549712-new-tehri-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"दृढ़ इच्छाशक्ति से हर मुकाम हासिल कर सकती है महिलाएं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दृढ़ इच्छाशक्ति से हर मुकाम हासिल कर सकती है महिलाएं
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नई टिहरी। अमर उजाला अपराजिता: 100 मिलियन स्माइल महाअभियान के तहत चंबा विकास खंड के ग्राम पंचायत भाटुसैण मेें पर्वतीय क्षेत्र में बेमौसमी सब्जी उत्पादन और रोजगार की संभावनाएं विषय पर गोष्ठी आयोजित की गई। वक्ताओं ने कहा कि कीवी, मशरूम, आंवला, सेब, आडू और फूलों की खेती कर आजीविका के संसाधनों को दोगुना तक बढ़ाया जा सकता है।
भाटुसैण के पंचायत भवन में आयोजित गोष्ठी में महिलाओं ने अपनी समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। कहा आजीविका बढ़ाने के लिए वे परंपरागत फसलों के अलावा माल्टा, नीबू, मटर, टमाटर का उत्पादन कर रहे हैं, लेकिन बंदर फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। सबसे पहले बंदरों को पकड़ने की कार्य योजना बनाए जाने की जरूरत है। सहायक उद्यान निरीक्षक हरेंद्र बिष्ट ने कहा कि बंदर कीवी, आंवला, अदरक, हल्दी, फूलों को नुकसान नहीं पहुंचता है। भाटुसैण क्षेत्र में कीवी की अच्छी खेती की जा सकती है। मनरेगा के तहत कीवी के पौधे नि:शुल्क उपलब्ध कराए जाते है।
राड्स संस्था की कुंभीबाला भट्ट ने कहा कि यदि महिलाएं माल्टा, सेब, आंवला का उत्पादन करती है, तो गांव में ही जूस, आचार और जेम-जैली बनाने का नि:शुल्क प्रशिक्षण दिया जाएगा। गोष्ठी में सबिता डबराल, चंादनी, सरिता, कौशल्या, जशोदा देवी, शैला देवी, प्रेमा देवी, मुन्नी देवी, लक्ष्मी देवी, सुमित्रा देवी, मधु कुकरेती, सुशीला देवी, भुवनेश्वरी देवी, उर्मिला, शशि देवी, अनीता देवी आदि उपस्थित रही।
विज्ञापन
हम दिनभर खेतों में मेहनत करते हैं, लेकिन जब जंगली जानवर उसे नुकसान पहुंचाते हैं, तो कुछ भी हाथ नहीं लगता है। इससे हमारी मेहनत बेकार चली जाती है। खेती को बचाने के लिए सबसे पहले काश्तकारों को जंगली जानवरों ने निजात दिलाना जरूरी है।
-कविता डबराल, महिला मंगल दल अध्यक्ष भाटुसैण
गांवों में बेहतर ढंग से काम करने के लिए अच्छा माहौल तैयार करना जरूरी है। आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं की दशा में सुधारने के लिए गांव में ही प्रशिक्षण की व्यवस्था होनी चाहिए। उत्पादित सब्जियों और फलों की बिक्री के लिए गांव में सरकार के स्तर पर विपणन की व्यवस्था भी जरूरी है।
-सविता डबराल, आंगनबाड़ी कार्यकत्री भाटुसैण
कृषि-बागवानी को प्रोत्साहन देने के लिए सबसे पहले पानी की व्यवस्था जरूरी है। हमारे गांव में सभी प्रकार की सब्जियों की पैदावार होती है, लेकिन गर्मियों के दिनों में पानी का संकट होने से उत्पादन नहीं हो पाता है।
-शैला देवी, गृहणी भाटुसैण
विज्ञापन
भाटुसैण के पंचायत भवन में आयोजित गोष्ठी में महिलाओं ने अपनी समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। कहा आजीविका बढ़ाने के लिए वे परंपरागत फसलों के अलावा माल्टा, नीबू, मटर, टमाटर का उत्पादन कर रहे हैं, लेकिन बंदर फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। सबसे पहले बंदरों को पकड़ने की कार्य योजना बनाए जाने की जरूरत है। सहायक उद्यान निरीक्षक हरेंद्र बिष्ट ने कहा कि बंदर कीवी, आंवला, अदरक, हल्दी, फूलों को नुकसान नहीं पहुंचता है। भाटुसैण क्षेत्र में कीवी की अच्छी खेती की जा सकती है। मनरेगा के तहत कीवी के पौधे नि:शुल्क उपलब्ध कराए जाते है।
विज्ञापन
राड्स संस्था की कुंभीबाला भट्ट ने कहा कि यदि महिलाएं माल्टा, सेब, आंवला का उत्पादन करती है, तो गांव में ही जूस, आचार और जेम-जैली बनाने का नि:शुल्क प्रशिक्षण दिया जाएगा। गोष्ठी में सबिता डबराल, चंादनी, सरिता, कौशल्या, जशोदा देवी, शैला देवी, प्रेमा देवी, मुन्नी देवी, लक्ष्मी देवी, सुमित्रा देवी, मधु कुकरेती, सुशीला देवी, भुवनेश्वरी देवी, उर्मिला, शशि देवी, अनीता देवी आदि उपस्थित रही।
विज्ञापन
हम दिनभर खेतों में मेहनत करते हैं, लेकिन जब जंगली जानवर उसे नुकसान पहुंचाते हैं, तो कुछ भी हाथ नहीं लगता है। इससे हमारी मेहनत बेकार चली जाती है। खेती को बचाने के लिए सबसे पहले काश्तकारों को जंगली जानवरों ने निजात दिलाना जरूरी है।
-कविता डबराल, महिला मंगल दल अध्यक्ष भाटुसैण
गांवों में बेहतर ढंग से काम करने के लिए अच्छा माहौल तैयार करना जरूरी है। आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं की दशा में सुधारने के लिए गांव में ही प्रशिक्षण की व्यवस्था होनी चाहिए। उत्पादित सब्जियों और फलों की बिक्री के लिए गांव में सरकार के स्तर पर विपणन की व्यवस्था भी जरूरी है।
-सविता डबराल, आंगनबाड़ी कार्यकत्री भाटुसैण
कृषि-बागवानी को प्रोत्साहन देने के लिए सबसे पहले पानी की व्यवस्था जरूरी है। हमारे गांव में सभी प्रकार की सब्जियों की पैदावार होती है, लेकिन गर्मियों के दिनों में पानी का संकट होने से उत्पादन नहीं हो पाता है।
-शैला देवी, गृहणी भाटुसैण