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जंगली जानवरों से लोगों की जान बचाना बड़ी चुनौती
Updated Thu, 10 May 2018 11:12 PM IST
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नई टिहरी। हिंसक हो रहे वन्य जीवों से लोगों की जान बचाना वन विभाग के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। आए दिन होने वाले जानवरों के हमले में स्थानीय लोग आखिर कब तक अपनी जान गवांते रहेंगे। इन दो सालों में ही जंगली जानवरों ने छह लोगों को निवाला बनाया है, जबकि 26 लोगों पर हमला कर उन्हें घायल किया है।
जाखणीधार ब्लॉक के ग्राम कस्तल में बुधवार शाम करीब छह बजे कुछ दूर ही अपने मायके शादी में जा रही एक महिला को गुलदार ने मार डाला, जिससे क्षेत्रवासियों में दहशत है। गांव में ही 20 फरवरी 2017 को गुलदार ने रेणुका पुत्री धर्म सिंह को निवाला बनाया था। दो साल में ही गुलदार ने तीन महिलाओं और दो पुरुषों को मारा है, जबकि 14 लोगों को घायल किया है। ढुंग गांव में ही वर्ष 2016 में भालू ने गोमती देवी पर हमला कर उसे मार डाला था और सात लोगों को घायल किया था। जंगली सुअरों के हमले में भी छह लोग घायल हुए हैं। गांव में जंगली जानवरों का भय इस कदर हो गया है कि बच्चों का आंगन में खेलना और महिला-पुरुषों के सामने खेती- बाड़ी का काम करना मुश्किल हो गया है।
कोट
इंसानों पर जानवरों के बढ़ रहे हमलों से हम भी चिंतित हैं। जानवरों का व्यवहार पहचानना मुश्किल है। उनका बस्तियों की ओर आने का कारण ढूंढना बड़ी चुनौती है। जागरूकता और सावधान रहकर ही उनसे बचा जा सकता है।
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-डा. कोको रोसे, डीएफओ टिहरी वन प्रभाग।
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जाखणीधार ब्लॉक के ग्राम कस्तल में बुधवार शाम करीब छह बजे कुछ दूर ही अपने मायके शादी में जा रही एक महिला को गुलदार ने मार डाला, जिससे क्षेत्रवासियों में दहशत है। गांव में ही 20 फरवरी 2017 को गुलदार ने रेणुका पुत्री धर्म सिंह को निवाला बनाया था। दो साल में ही गुलदार ने तीन महिलाओं और दो पुरुषों को मारा है, जबकि 14 लोगों को घायल किया है। ढुंग गांव में ही वर्ष 2016 में भालू ने गोमती देवी पर हमला कर उसे मार डाला था और सात लोगों को घायल किया था। जंगली सुअरों के हमले में भी छह लोग घायल हुए हैं। गांव में जंगली जानवरों का भय इस कदर हो गया है कि बच्चों का आंगन में खेलना और महिला-पुरुषों के सामने खेती- बाड़ी का काम करना मुश्किल हो गया है।
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कोट
इंसानों पर जानवरों के बढ़ रहे हमलों से हम भी चिंतित हैं। जानवरों का व्यवहार पहचानना मुश्किल है। उनका बस्तियों की ओर आने का कारण ढूंढना बड़ी चुनौती है। जागरूकता और सावधान रहकर ही उनसे बचा जा सकता है।
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-डा. कोको रोसे, डीएफओ टिहरी वन प्रभाग।