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बंदरों के डर से तिसरियाड़ा के ग्रामीणों ने छोड़ी खेती करनी
Updated Thu, 03 May 2018 11:04 PM IST
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नई टिहरी। सरकार खेती के जरिए किसानों की आय दोगुनी करने पर जोर दे रही है, लेकिन बंदरों, सुअरों से फसलों को बचाने के उपाय नहीं करने से ग्रामीण खेती करना ही छोड़ रहे हैं। जिले के कई गांवों में ग्रामीणों ने जंगली जानवरों की डर से खेती करनी छोड़ दी है, जिससे सैकड़ों नाली सिंचित जमीन बंजर पड़ी है।
भिलंगना ब्लाक के तिसरियाड़ा गांव के क्यारी नामे तोक में स्थित करीब पांच सौ नाली सिंचित भूमि पर ग्रामीण खेती करते थे, लेकिन बंदरों द्वारा फसलों को नुकसान पहुंचाने से परेशान लोगों ने खेती छोड़ दी है। प्रतापनगर के कुडी, लिखवार गांव, रावत गांव में धान, गेहूं की अच्छी फसल होती थी, लेकिन ग्रामीणों ने बंदरों और सुअरों की डर से खेती छोड़ दी है। तीन गांवों में करीब 15 हेक्टेयर सिंचित एवं असिंचित भूमि बंजर पड़ी हुई है। यही स्थिति थौलधार ब्लाक के नकोट, बगोडी की भी है। यहां भी एक हजार से अधिक नाली भूमि बंजर पड़ी है। वन क्षेत्राधिकारी आरडी कुड़ियाल का कहना है कि पूर्व में बंदरों को पकड़ने को पिंजरा लगाया गया था। यदि फिर से बंदर बढ़ रहे हैं, तो दोबारा इनकों पकड़ा जाएगा।
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भिलंगना ब्लाक के तिसरियाड़ा गांव के क्यारी नामे तोक में स्थित करीब पांच सौ नाली सिंचित भूमि पर ग्रामीण खेती करते थे, लेकिन बंदरों द्वारा फसलों को नुकसान पहुंचाने से परेशान लोगों ने खेती छोड़ दी है। प्रतापनगर के कुडी, लिखवार गांव, रावत गांव में धान, गेहूं की अच्छी फसल होती थी, लेकिन ग्रामीणों ने बंदरों और सुअरों की डर से खेती छोड़ दी है। तीन गांवों में करीब 15 हेक्टेयर सिंचित एवं असिंचित भूमि बंजर पड़ी हुई है। यही स्थिति थौलधार ब्लाक के नकोट, बगोडी की भी है। यहां भी एक हजार से अधिक नाली भूमि बंजर पड़ी है। वन क्षेत्राधिकारी आरडी कुड़ियाल का कहना है कि पूर्व में बंदरों को पकड़ने को पिंजरा लगाया गया था। यदि फिर से बंदर बढ़ रहे हैं, तो दोबारा इनकों पकड़ा जाएगा।
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