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अक्षय तृतीया पर बन रहा सर्वार्थ सिद्धियोग
Updated Mon, 16 Apr 2018 10:44 PM IST
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चंबा (टिहरी)। बैसाख मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया पर 18 अप्रैल को अक्षय तृतीया के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है। ज्योतिषियों के अनुसार इस बार कई सालों बाद अक्षय तृतीया पर सर्वार्थ सिद्धि योग का अद्भुत महासंयोग फलदायी और कल्याणकारी होगा। ऐसे में इस दिन मांगलिक कार्यों के अलावा खरीदारी या शुभ कार्य का विशेष लाभ मिलेगा।
इस वर्ष 18 अप्रैल को कई सालों बाद अक्षय तृतीया पर सर्वार्थ सिद्धि योग के महासंयोग से इस दिन की महत्ता और अधिक बढ़ गई है। शास्त्रों में अक्षय तृतीय का बहुत अधिक महत्व है। मान्यता है कि इस दिन बिना पंचांग देखे ही मांगलिक कार्य किए जा सकते हैं, जिसका विशेष फल मिलता है। वैदिक मान्यता है कि इस दिन विवाह करने वालों का अखंड सौभाग्य रहता है। इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी के पूजन का विधान है। उत्तराखंड विद्वत सभा के पूर्व अध्यक्ष पंडित उदय शंकर भट्ट का कहना है कि इस दिन जो शुभ कार्य किए जाते हैं, उनका अक्षय फल मिलता है। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग होने से भक्तों के लिए अपार सुख, समृद्धि लाने वाला होगा।
सर्वार्थ सिद्धि योग एक अत्यंत शुभ योग है, जो निश्चित वार और निश्चित नक्षत्र के संयोग से बनता है। योग एक बहुत ही शुभ समय है, जो कि नक्षत्र और वार की स्थिति के आधार पर गणना किया जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यदि किसी काम को जल्दी करने में कोई आवश्यक मुहूर्त नहीं मिल रहा हो, तो सर्वार्थ सिद्धि योग में भी कार्य आरंभ किया जा सकता है।
इस वर्ष 18 अप्रैल को कई सालों बाद अक्षय तृतीया पर सर्वार्थ सिद्धि योग के महासंयोग से इस दिन की महत्ता और अधिक बढ़ गई है। शास्त्रों में अक्षय तृतीय का बहुत अधिक महत्व है। मान्यता है कि इस दिन बिना पंचांग देखे ही मांगलिक कार्य किए जा सकते हैं, जिसका विशेष फल मिलता है। वैदिक मान्यता है कि इस दिन विवाह करने वालों का अखंड सौभाग्य रहता है। इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी के पूजन का विधान है। उत्तराखंड विद्वत सभा के पूर्व अध्यक्ष पंडित उदय शंकर भट्ट का कहना है कि इस दिन जो शुभ कार्य किए जाते हैं, उनका अक्षय फल मिलता है। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग होने से भक्तों के लिए अपार सुख, समृद्धि लाने वाला होगा।
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सर्वार्थ सिद्धि योग एक अत्यंत शुभ योग है, जो निश्चित वार और निश्चित नक्षत्र के संयोग से बनता है। योग एक बहुत ही शुभ समय है, जो कि नक्षत्र और वार की स्थिति के आधार पर गणना किया जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यदि किसी काम को जल्दी करने में कोई आवश्यक मुहूर्त नहीं मिल रहा हो, तो सर्वार्थ सिद्धि योग में भी कार्य आरंभ किया जा सकता है।
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