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विदाई के समय भक्तों की छलकी ऑखें
Updated Sun, 25 Mar 2018 10:44 PM IST
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चंबा (टिहरी)। चैत्र नवरात्र में जड़धार गांव में आठ दिन के प्रवास के बाद सिद्धपीठ सुरकंडा की डोली अपने मूल स्थान सुरकुट पर्वत स्थित सुरकंडा मंदिर लौट गई। देवी को विदाई देते समय स्थानीय लोगों की आंखें नम हो गई। भावुक क्षणों में मां सुरकंडा की डोली से लिपटकर भक्तों ने जल्दी आने का आग्रह किया।
रविवार ब्रहम मुहूर्त में सिद्धपीठ सुरकंडा देवी की प्रतिमूर्ति की वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच विशेष पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद गांव स्थित मंदिर में बोए गए जौ (हरियाली) को काटकर श्रद्धालुओं में बांटा गया। सुबह दस बजे तक देवी के दर्शन करने के लिए आसपास के गांवों के सैकड़ों श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा। दोपहर विदाई से पहले देवी का मंडाण लगते ही जागरों और भजन-कीर्तन से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठा। डोली से लिपट-लिपटकर भक्त अपना प्यार जताते रहे। स्थानीय लोगों ने धन-धान्य, पूरी, हलवा, मिठाई, कलेऊ के साथ देवी को विदा किया। इस अवसर पर मनवीर जड़धारी, विपिन जड़धारी, धन सिंह, प्रमोद सिंह, तेजेंद्र ङ्क्षसह व रमेश सिंह आदि उपस्थित रहे।
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रविवार ब्रहम मुहूर्त में सिद्धपीठ सुरकंडा देवी की प्रतिमूर्ति की वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच विशेष पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद गांव स्थित मंदिर में बोए गए जौ (हरियाली) को काटकर श्रद्धालुओं में बांटा गया। सुबह दस बजे तक देवी के दर्शन करने के लिए आसपास के गांवों के सैकड़ों श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा। दोपहर विदाई से पहले देवी का मंडाण लगते ही जागरों और भजन-कीर्तन से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठा। डोली से लिपट-लिपटकर भक्त अपना प्यार जताते रहे। स्थानीय लोगों ने धन-धान्य, पूरी, हलवा, मिठाई, कलेऊ के साथ देवी को विदा किया। इस अवसर पर मनवीर जड़धारी, विपिन जड़धारी, धन सिंह, प्रमोद सिंह, तेजेंद्र ङ्क्षसह व रमेश सिंह आदि उपस्थित रहे।
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