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टिहरी बांध की झील का रेत, पत्थर नहीं आ रहा काम
Updated Sun, 04 Mar 2018 10:40 PM IST
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घनसाली (टिहरी)। 42 वर्ग किमी में फैली टिहरी बांध की झील में प्रत्येक वर्ष बड़ी मात्रा में रेत बहकर आ रही, लेकिन झील किनारे बिखरे पड़े रेत के चुगान की अनुमति नहीं होने से वह बेकार पड़ी है। इससे सरकार को करोड़ के राजस्व का नुकसान होने के साथ ही आने वाले समय में झील में गाद का रूप भी ले सकता है, जबकि लोग अपने निजी भवन से लेकर सरकारी संपत्तियों के निर्माण हेतु 70-80 किमी की अतिरिक्त दूरी तय कर रेत लाने को मजबूर हैं।
वर्ष 2005 में बनी टिहरी बांध की झील में भागीरथी घाटी के चिन्यालीसौड़ से लेकर भिलंगना घाटी के पिलखी तक फैली हुई है। बरसात में प्रत्येक वर्ष हजारों टन रेत, पत्थर बहकर आता है। गर्मियों के दौरान जलस्तर कम होने से झील के दोनों ओर रेत की सफेद चादर बिछ जाती है। 12 साल बाद भी सरकार ने झील में बहकर आ रहे रेत, पत्थर के चुगान को कोई नीति नहीं बनाई है, जबकि टिहरी बांध से प्रभावित भिलंगना, प्रतापनगर, चंबा, जाखणीधार, थौलधार ब्लाक और नई टिहरी शहर के लोग निजी और सरकारी निर्माण कार्यों के लिए 70-80 किमी दूर ऋषिकेश, श्रीनगर, हरिद्वार, चिन्यालीसौड़ से रेत लाने को मजबूर हैं। इसके लिए प्रत्येक ट्रक का 10 से 12 हजार भाड़ा देना पड़ रहा है। ऐसे में यदि राज्य सरकार टिहरी बांध की झील के आसपास बिखरे पड़े रेत को चुगान के लिए ठोस नीति बनाती या अनुमति दे देती तो, स्थानीय लोगों को सस्ते दरों पर रेत मिलेगा। साथ ही सरकार को भी प्रत्येक वर्ष करोड़ों का राजस्व मिलेगा। पूर्व जिला पंचायत सदस्य डा. नरेंद्र डंगवाल आनंद व्यास, बचन सिंह रावत, बीर सिंह, भीमराज सिंह ने सरकार एवं टीएचडीसी से स्थानीय लोगों को रेत, पत्थर चुगान की अनुमति देने की मांग की है।
कोट
झील किनारे पड़ी रेत और बजरी उठाने के लिए प्रशासन और टीएचडीसी को नीति तैयार करनी चाहिए। ताकि झील में गाद न भरे और स्थानीय लोगों को सस्ते दरों पर रेत मिल सके। जल्द ही इस संबंध में शासन स्तर पर उचित निर्णय लिया जाएगा।
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धन सिंह नेगी, विधायक टिहरी
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वर्ष 2005 में बनी टिहरी बांध की झील में भागीरथी घाटी के चिन्यालीसौड़ से लेकर भिलंगना घाटी के पिलखी तक फैली हुई है। बरसात में प्रत्येक वर्ष हजारों टन रेत, पत्थर बहकर आता है। गर्मियों के दौरान जलस्तर कम होने से झील के दोनों ओर रेत की सफेद चादर बिछ जाती है। 12 साल बाद भी सरकार ने झील में बहकर आ रहे रेत, पत्थर के चुगान को कोई नीति नहीं बनाई है, जबकि टिहरी बांध से प्रभावित भिलंगना, प्रतापनगर, चंबा, जाखणीधार, थौलधार ब्लाक और नई टिहरी शहर के लोग निजी और सरकारी निर्माण कार्यों के लिए 70-80 किमी दूर ऋषिकेश, श्रीनगर, हरिद्वार, चिन्यालीसौड़ से रेत लाने को मजबूर हैं। इसके लिए प्रत्येक ट्रक का 10 से 12 हजार भाड़ा देना पड़ रहा है। ऐसे में यदि राज्य सरकार टिहरी बांध की झील के आसपास बिखरे पड़े रेत को चुगान के लिए ठोस नीति बनाती या अनुमति दे देती तो, स्थानीय लोगों को सस्ते दरों पर रेत मिलेगा। साथ ही सरकार को भी प्रत्येक वर्ष करोड़ों का राजस्व मिलेगा। पूर्व जिला पंचायत सदस्य डा. नरेंद्र डंगवाल आनंद व्यास, बचन सिंह रावत, बीर सिंह, भीमराज सिंह ने सरकार एवं टीएचडीसी से स्थानीय लोगों को रेत, पत्थर चुगान की अनुमति देने की मांग की है।
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कोट
झील किनारे पड़ी रेत और बजरी उठाने के लिए प्रशासन और टीएचडीसी को नीति तैयार करनी चाहिए। ताकि झील में गाद न भरे और स्थानीय लोगों को सस्ते दरों पर रेत मिल सके। जल्द ही इस संबंध में शासन स्तर पर उचित निर्णय लिया जाएगा।
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धन सिंह नेगी, विधायक टिहरी