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गीत संगीत के माध्यम से गुंजन कर रहे संस्कृति का प्रचार
Updated Wed, 24 Jan 2018 10:20 PM IST
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नई टिहरी। लोक गायक एवं संगीतकार गुंजन डंगवाल का गीत ‘नंदु मामा’ नए संगीत में दर्शकों के बीच पहुंच गया है। गीत को मशकबीन, गिटार और ढोल-दमाऊं को ड्रम बीट्स के साथ जोड़कर संगीत से सजाया गया है। 20 जनवरी को गीत के यू-ट्यूब पर आते ही लोगों ने खूब पसंद किया है। चार दिन में करीब 20 हजार से अधिक लोगों ने गीत देख लिया है।
ट्रांस म्यूजिक के माहिर गुंजन डंगवाल ने नंदू मामा गीत को ‘मस्का टाऊंस’ नाम दिया है। यह गीत मूलत: विलुप्ति की कगार पर बैठी बाद्दी गीत परंपरा का हिस्सा है। इससे पहले गुंजन डंगवाल ने अपना एक नवाचारी प्रायोगिक गीत ‘मै तैं पता ना’ गढ़वाली और कुमाऊंनी भाषा में भी मोहित तिवारी के साथ गाया है। साथ ही गुंजन डंगवाल बाद्दी गायन शैली में नौनी किरपी, सयाणु वीर सिंघ, रैणा की मुरुली आदि शानदार गीतों की प्रस्तुति दे चुके हैं। गुंजन ने गोविंद बल्लभ पंत विवि घुड़दौड़ी से बीटेक करने के बाद वर्तमान में नौकरी का मोह त्याग कर शिलौंग (मेघालय) और दिल्ली में गढ़वाली गीतों के साथ अपने बैंड ‘लास्ट ट्रेन टु पैराडाइस’ के साथ अंग्रेजी भाषा के गीतों को संगीतों भी संगीत दे रहे हैं।
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ट्रांस म्यूजिक के माहिर गुंजन डंगवाल ने नंदू मामा गीत को ‘मस्का टाऊंस’ नाम दिया है। यह गीत मूलत: विलुप्ति की कगार पर बैठी बाद्दी गीत परंपरा का हिस्सा है। इससे पहले गुंजन डंगवाल ने अपना एक नवाचारी प्रायोगिक गीत ‘मै तैं पता ना’ गढ़वाली और कुमाऊंनी भाषा में भी मोहित तिवारी के साथ गाया है। साथ ही गुंजन डंगवाल बाद्दी गायन शैली में नौनी किरपी, सयाणु वीर सिंघ, रैणा की मुरुली आदि शानदार गीतों की प्रस्तुति दे चुके हैं। गुंजन ने गोविंद बल्लभ पंत विवि घुड़दौड़ी से बीटेक करने के बाद वर्तमान में नौकरी का मोह त्याग कर शिलौंग (मेघालय) और दिल्ली में गढ़वाली गीतों के साथ अपने बैंड ‘लास्ट ट्रेन टु पैराडाइस’ के साथ अंग्रेजी भाषा के गीतों को संगीतों भी संगीत दे रहे हैं।
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