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बांध प्रभावित 62 परिवारों के जख्मों पर नमक छिड़क रहा पुनर्वास विभाग
Updated Sun, 01 Oct 2017 10:43 PM IST
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कंडीसौड़ (टिहरी)। टिहरी बांध प्रभावित थौलधार ब्लॉक के 62 परिवारों को पुनर्वास विभाग की ओर से अभी तक पैतृक भवनों का प्रतिकर नहीं दिया गया। प्रभावित परिवारों को 12 साल पहले पुनर्वास विभाग ने यहां से 150 से 200 किमी दूर हरिद्वार और देहरादून क्षेत्रों में कृषि एवं आवासीय भूखंड तो आवंटित कर दिए, लेकिन पैतृक भवनों का प्रतिकर देने से हाथ पीछे खींच लिए। जल्द भवनों का प्रतिकर न मिलने पर प्रभावित लोगों ने शासन-प्रशासन के खिलाफ आरपार की लड़ाई शुरू करने का निर्णय लिया है।
टिहरी बांध के लिए ग्रामीणों ने अपनी भूमि तो दी लेकिन उन ग्रामीणों का न तो पुनर्वास किया गया और न ही मुआवजा दिया गया। टिहरी बांध से प्रभावित पूर्ण डूब क्षेत्र की पात्रता रखने वालों को कृषि और आवासीय भूखंड के साथ ही भवन प्रतिकर का लाभ भी दिया जाता है। पूर्ण डूब क्षेत्र की पात्रता रखने वाले सरोट-डोभन के 13 परिवार, खांड बिडकोट के 11, रमोलगांव के 5, भल्डियाना के 13, उप्पू के 17 और स्यांसू के 3 परिवारों को हरिद्वार के पथरी, बहादराबाद और देहरादून के फूलसैणी में पुनर्वास किया गया। उन्हें पुनर्वास के तहत वर्ष 2005 में कृषि और आवासीय भूखंड तो दिया, लेकिन निदेशालय उनके मकान टिहरी झील के आरएल 835 मीटर से बाहर होने का तर्क देकर उन्हें भवन प्रतिकर का भुगतान नहीं कर रहा है। बांध प्रभावित सुमेर सिंह गुसाईं, प्रताप सिंह, भाग सिंह, शूरवीर सिंह राणा, सुंदर सिंह गुसाईं का कहना है कि भवन प्रतिकर नहीं मिलने से आर्थिक रूप से कमजोर लोग विस्थापित क्षेत्र में मकान नहीं बना पा रहे हैं, जिससे ग्रामीण झील के कारण जर्जर हो चुके मकानों में ही रहने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि विस्थापित क्षेत्र देहरादून और हरिद्वार में मकान नहीं होने से वह गांव से 150 से 200 किमी दूर खेती-बाड़ी कैसे कर सकते हैं। यदि जल्द भवन प्रतिकर भुगतान नहीं किया तो क्षेत्र के लोग दीपावली के बाद पुनर्वास कार्यालय में भूख हड़ताल पर बैठने को बाध्य होगे।
कोट
मेरे संज्ञान में अभी इस तरह का कोई भी मामला नहीं आया है। पत्रावली देखने के बाद स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। यदि भवनों का प्रतिकर नहीं मिला है तो शासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा। - सोनिका, डीएम और पुनर्वास निदेशक टिहरी।
टिहरी बांध के लिए ग्रामीणों ने अपनी भूमि तो दी लेकिन उन ग्रामीणों का न तो पुनर्वास किया गया और न ही मुआवजा दिया गया। टिहरी बांध से प्रभावित पूर्ण डूब क्षेत्र की पात्रता रखने वालों को कृषि और आवासीय भूखंड के साथ ही भवन प्रतिकर का लाभ भी दिया जाता है। पूर्ण डूब क्षेत्र की पात्रता रखने वाले सरोट-डोभन के 13 परिवार, खांड बिडकोट के 11, रमोलगांव के 5, भल्डियाना के 13, उप्पू के 17 और स्यांसू के 3 परिवारों को हरिद्वार के पथरी, बहादराबाद और देहरादून के फूलसैणी में पुनर्वास किया गया। उन्हें पुनर्वास के तहत वर्ष 2005 में कृषि और आवासीय भूखंड तो दिया, लेकिन निदेशालय उनके मकान टिहरी झील के आरएल 835 मीटर से बाहर होने का तर्क देकर उन्हें भवन प्रतिकर का भुगतान नहीं कर रहा है। बांध प्रभावित सुमेर सिंह गुसाईं, प्रताप सिंह, भाग सिंह, शूरवीर सिंह राणा, सुंदर सिंह गुसाईं का कहना है कि भवन प्रतिकर नहीं मिलने से आर्थिक रूप से कमजोर लोग विस्थापित क्षेत्र में मकान नहीं बना पा रहे हैं, जिससे ग्रामीण झील के कारण जर्जर हो चुके मकानों में ही रहने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि विस्थापित क्षेत्र देहरादून और हरिद्वार में मकान नहीं होने से वह गांव से 150 से 200 किमी दूर खेती-बाड़ी कैसे कर सकते हैं। यदि जल्द भवन प्रतिकर भुगतान नहीं किया तो क्षेत्र के लोग दीपावली के बाद पुनर्वास कार्यालय में भूख हड़ताल पर बैठने को बाध्य होगे।
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मेरे संज्ञान में अभी इस तरह का कोई भी मामला नहीं आया है। पत्रावली देखने के बाद स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। यदि भवनों का प्रतिकर नहीं मिला है तो शासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा। - सोनिका, डीएम और पुनर्वास निदेशक टिहरी।
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