आरक्षण व्यवस्था ने किया देश की व्यवस्था का सत्यानाश: शंकराचार्य
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जगदगुरू शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने आरक्षण व्यवस्था को पूरी तरह से समाप्त करने की वकालत की। उन्होंने कहा कि आरक्षण व्यवस्था से देश की व्यवस्था का सत्यानाश हो रहा है। आरक्षण का लाभ उठाकर डॉक्टर बनने वाले सही इलाज नहीं करते, जज सही न्याय नहीं देते, इंजीनियर पुल नहीं बना सकते, प्रोफेसर पढ़ा नहीं सकते। इसलिए आरक्षण समाप्त करने के बाद ही समाज का कल्याण हो सकता है।
शंकराचार्य ने उत्तरप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती पर भी निशाना साधा। रविवार को हरिद्वार के कनखल स्थित मठ में पत्रकार वार्ता करते हुए जगदगुरू शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने आरक्षण व्यवस्था पर कड़ा प्रहार किया।
उन्होंने यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के खिलाफ बोलते हुए कहा कि पहले मायावती केवल दलित समाज की बात करती थी तो जोड़-तोड़ की सरकार बनती रही, लेकिन जब मायावती ने ब्राहमण सहित सर्व समाज की बात की तो सरकार पूर्ण बहुमत की आयी।
अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जय भीम का नारा देना शुरू कर दिया है तो अब मायावती बौखला गई है। अब मायावती जय भीम कहने की बात कर रही है, लेकिन उसके साथ जुड़े ब्राहम्ण समाज एवं अन्य समाज के लोग जय भीम नहीं कहेंगे। उन्होंने कहा कि यदि दलितों को तरक्की करनी है तो सर्व समाज के साथ मिलकर चलना होगा। रामायण पढ़नी होगी, त्यौहार मनाने होंगे।
उन्होंने दोहाराते हुए कहा कि दलित समाज ने बौद्घ धर्म अपनाकर अपने को अलग कर लिया है। कई जाति मिलकर एक गांव बसता है और गांव में सभी लोग मिल जुलकर रहते हैं। उन्होंने धार्मिक मामलों को सत्ता की सीढ़ी न बनाने की नसीहत दी।
नशा पूरी तरह से बंद हो
शंकराचार्य ने कहा कि पूरे देश में नशा पर पूर्णतया प्रतिबंध लगना चाहिए। नशे से पीढ़ियां बिगड़ रही हैं। स्कूलों के सामने नशीले पदार्थ बेचे जा रहे हैं। जिससे युवा नशे के गर्त में पड़कर पढ़ाई-लिखाई और धर्म से विमुक्त होता जा रहा है।
राम मंदिर पर स्थिति स्पष्ट करें भाजपा
शंकराचार्य ने कहा कि भाजपा की राम मंदिर बनाने के अवधारणा कभी स्पष्ट नहीं रही। भाजपा एवं अन्य घटक दल कहते हैं कि आदर्श राम मंदिर बनाएंगे। इससे साबित होता है कि यह लोग राम को आदर्श मनुष्य मानते हैं, भगवान नहीं।
प्रदेश में आए खुशहाली
शंकराचार्य से दो दिन के अंतराल पर दो पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत एवं विजय बहुगुणा मिलने पहुंचे। दोनों ने अकेले में ही शंकराचार्य से मुलाकात की। दोनों की मुलाकात पर शंकराचार्य ने कहा कि वह उनके शिष्य हैं कोई भी आशीर्वाद प्राप्त कर सकता है।
उन्होंने राजनीति पर चर्चा होने से इंकार किया। बताया कि दोनों से मुलाकात में उन्होंने आदि शंकराचार्य की केदारनाथ में समाधि के जीर्णोद्वार को वार्ता की। लेकिन वह चाहते हैं प्रदेश की खुशहाली के लिए स्थाई प्रतिनिधित्व मिलना जरूरी है।