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ऐसे खाने से छोटी सी उम्र में लग रहे जानलेवा रोग
भास्कर पोखरियाल/ अमर उजाला, रुद्रपुर
Updated Thu, 07 Apr 2016 01:24 PM IST
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कभी अन्न का दाना हर प्राणी को जीवन देता था, आज वही अन्न रासायनिक पदार्थों के कारण धीमा जहर बनता जा रहा है।
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आज हालात यह हो गए हैं कि खाद्य पदार्थ जानलेवा बीमारियों को जन्म दे रहे हैं। तेजी से बढ़ती जानलेवा बीमारियों पर अब डॉक्टर्स भी चिंता में हैं। अगर जानलेवा बीमारियां इसी तेजी से बढ़ती रहीं तो आने वाला समय बड़े खतरे का संकेत हैं।
आयुर्वेदिक से लेकर एलोपैथिक और होम्योपैथिक डॉक्टरों का मानना है कि वर्तमान में हमारे जीवन में गलत खानपान और फूड्स मिलाया जा रहा केमिकल ही युवाओं और मासूम बच्चों की जान पर बन आया है। रुद्रपुर के कुछ डॉक्टरों से बातचीत की गई तो उन्होंने ने युवा वर्ग पर बढ़ती बीमारी में चौंकाने वाले तथ्य सामने रखे।
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जंक फूड खाने से ब्लाक हो जाता है हार्ट का वॉल्व
होम्योपैथी के प्रसिद्ध डॉक्टर ज्ञान प्रकाश भारद्वाज कहते हैं कि उनके पास वर्तमान में अधिकांश मरीज युवा वर्ग और मासूम बच्चे आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि हाल ही में सात वर्ष के एक बच्चे के परिजन जब बच्चे को लेकर आए तो जांच में उस बच्चे में शुगर की बीमारी पाई गई।
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आजकल अधिकांश युवा वर्ग ज्यादातर जंक फूड खा रहा है। उसमें केमिकल की मिलावट भी होती है इस कारण हार्ट की बीमारी अधिक हो रही है। जंक फूड से हार्ट के वाल्व ब्लाक होने लगते हैं और फिर अचानक हार्ट इंजेक्ट हो जाता है। इन बीमारियों से बचाव के लिए डॉ. भारद्वाज कहते हैं कि दैनिक जीवन में व्यायाम बहुत जरूरी है, प्रतिदिन सुबह कम से कम आधा घंटा व्यायाम करने से बहुत सी बीमारियों से बचा जा सकता है।
जीवनशैली में बढ़ता बदलाव है बीमारी का कारण
शहर के प्रसिद्ध एलोपैथिक डॉक्टर रंजीत सिंह गिल कहते हैं कि जीवनशैली में तेजी से आ रहे बदलाव और असंतुलित खानपान, व्यायाम से परहेज, पैदल चलने के बजाए वाहनों पर निर्भरता डायबिटीज और हार्ट अटैक जैसी घातक बीमारियों से लोग ग्रसित हो रहे हैं।
उन्होंने इन बीमारियों से बचने के लिए कम फैट्स का भोजन, फलों का अधिक उपयोग और नियमित व्यायाम के साथ ही रेगुलर स्वास्थ्य परीक्षण की सलाह दी है।
बढ़ते प्रदूषण से बढ़ रही सांस की बीमारी
जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. एमके तिवारी ने बताया कि आम तौर पर सांस की बीमारी 40 वर्ष से ऊपर आयु वर्ग के लोगों में देखी जाती थी, लेकिन वातावरण में तेजी से बढ़ते प्रदूषण और समय से पहले मौसम में बदलाव के चलते यह बीमारी अब बच्चों में भी आम होने लगी है।
दस से 15 वर्ष के बच्चों में भी सांस की बीमारी पाई जा रही है। उन्होंने कहा कि हार्ट की बीमारी से भी 20 से 30 वर्ष के युवा अकाल मौत का शिकार हो रहे हैं। उन्होंने भी इन सब बीमारियों के लिए खानपान में गड़बड़ी और तनावपूर्ण कार्यशैली को ही जिम्मेदार बताया है।