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यहां गर्भवती महिलाओं की जान को खतरा है
अमर उजाला, नई टिहरी
Updated Sat, 28 Sep 2013 05:32 PM IST
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गर्भवती महिलाओं के लिए टिहरी जिले के गांव खतरनाक साबित हो रहे हैं। जिले में महिला चिकित्सकों की खासी कमी बनी हुई है। जिसके चलते दूरस्थ क्षेत्र की महिलाओं को प्रसव के लिए ऋषिकेश या देहरादून के चिकित्सालयों की शरण लेनी पड़ती है। ऐसे में खर्च तो बढ़ता ही है जान का जोखिम भी बना रहता है।
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बांध प्रभावित प्रतापनगर और भिलंगना प्रखंड में एक भी महिला चिकित्सक नहीं है। एएनएम के भरोसे ही प्रसव कराए जाते है। जिसमें कई बार महिलाओं को जान भी गवानी पड़ती है।
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कई सालों से महिला डॉक्टरों का संकट
टिहरी जिले के सभी क्षेत्रों में सरकारी चिकित्सालय तो है, लेकिन पांच-छह सालों से महिला डॉक्टरों का संकट बना हुआ है। जिले में महिला चिकित्सकों के 27 पद स्वीकृत हैं। लेकिन वर्तमान में जिला अस्पताल बौराड़ी में दो, अतिक्ति प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नई टिहरी, नरेंद्रनगर और हिंडोलाखाल में एक-एक महिला चिकित्सक सेवारत है।
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22 पद अब भी खाली है। जौनपुर, भिलंगना, प्रतापनगर, जाखणीधार विकास खंडों के चिकित्सालयों में कोई भी महिला चिकित्सक नहीं है।
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इसका सबसे ज्यादा खामियाजा गर्भवती महिलाओं को भुगतना पड़ रहा है। गर्भधारण के बाद बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में जानकारी न होने के कारण महिलाओं की जान पर बन आती है।
सबसे ज्यादा परेशानी उस समय होती है जब महिलाओं को प्रसव के लिए ऋषिकेश या देहरादून ले जाया जाता है। इतनी दूर ले जाने में ग्रामीणों को ज्यादा खर्च करना पड़ता है। कई बार तो रास्ते में ही महिलाओं की मौत हो जाती है।
हो जाती है अकाल मौत
31 दिसंबर 2011 को भिलंगना के सुनारगांव की एक गर्भवती महिला को परिजन प्रसव के लिए देहरादून ले जा रहे थे। चंबा में वाहन दुर्घटना में गर्भवती महिला सहित परिवार के चार सदस्यों की अकाल मौत हो गई थी।
अगस्त 2011 में देवप्रयाग के खडोली की एक महिला को प्रसव के लिए हिंडोलाखाल लाया जा रहा था। खडोली गांव से हिंडोलाखाल की पैदल दूरी 5 कि.मी होने के कारण प्रसव पीड़ा से कराहते हुए महिला ने आधे रास्ते में ही दम तोड़ दिया था।
5 जनवरी 2013 को लचर स्वास्थ्य सेवाओं के अभाव में लंबगांव अतिक्ति प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में गलियाखेत गावं के राजेंद्र की पत्नी कविता ने बच्चे को जन्म देने के बाद दम तोड़ दिया था।
एनेस्थेटिक्स नहीं तो आपरेशन भी नहीं
बौराड़ी जिला चिकित्सालय में दो महिला चिकित्साधिकारी तैनात हैं। लेकिन एनेस्थेटिक्स एक भी नहीं है। ऐसे में जिला चिकित्सालय में ऑपरेशन ही नहीं हो पाते हैं। यदि किसी गर्भवती महिला का ऑपरेशन से बच्चा होना है तो उसे भी दर्द से कहराते हुए आपरेशन के लिए यहां से 80 कि.मी. दूर ऋषिकेश ही जाना पड़ता है।
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