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राहु और शनि की चाल का नतीजा है 'मुजफ्फरनगर दंगा'
अमर उजाला, हरिद्वार
Updated Thu, 12 Sep 2013 03:42 PM IST
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ग्रहों की स्थिति कुछ विचित्र योग बना रही है। माना जा रहा है कि वर्तमान में अचानक बढ़े संकट के पीछे ग्रहों की यही स्थिति है। विशेष रूप से भारतीय ज्योतिष तंत्र तो क्रूर ग्रहों की दशा देखकर चिंतित है।
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हाल ही में कई घटनाक्रम सामने आए। उत्तराखंड की आपदा, रुपये का अवमूल्यन, संतों की गिरफ्तारी, चरमराई अर्थव्यवस्था आदि के पीछे क्या है, यह जानने का प्रयत्न वैज्ञानिक भी कर रहे हैं और ज्योतिषी भी।
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स्वाति नक्षत्र में एक साथ
ज्योतिष के अनुसार वर्तमान दशा का कारण ग्रहों की युतियों में छिपा हुआ है। वर्तमान में शनि और राहु जैसे क्रूर माने जाने वाले ग्रह एक ही स्वाति नक्षत्र में एक साथ चल रहे हैं।
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शनि की पूर्ण दृष्टि मंगल पर पड़ रही है। मंगल की संपूर्ण दृष्टि शनि और राहु पर है। 15 सितंबर के बाद सूर्य भी राहू और शनि के साथ एक ही क्रम में आ जाएंगे।
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ज्योतिषीय दृष्टि इसे खराब
ज्योतिषीय दृष्टि से इसे खराब माना जाता है। मंगल अपनी नीच राशि कर्क से उग्र सिंह राशि में आ जाएंगे। पांच अक्तूबर को मंगल का प्रवेश सिंह राशि में होगा और महंगाई बहुत अधिक बढ़ जाएगी। सोने का बाजार भी तेज हो जाएगा।
15 नवंबर को शनि, राहू और सूर्य एक ही राशि में आने से गुरु और शुक्र आमने-सामने आ जाएंगे। इससे भी विचित्र संयोग बनेगा। याद रहे कि गुरु बृहस्पति देवों के गुरु हैं तो शुक्र असुरों के। दोनों का आमने-सामने आना कभी भी शुभ नहीं माना जाता। यह दौर संकट का है और ज्योतिषियों के अनुसार आपदाएं कई प्रकार से आएंगी।
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इनकी भी सुनिए
वर्तमान में मंगल का शनि से संबंध, राहु और शनि का एक नक्षत्र में आना अशुभ माना गया है। रुपये के अवमूल्यन और आर्थिक हालात बदलने का यह मुख्य कारण है।
जब-जब ऐसा हुआ है सीमा पर तनाव बढ़ा है और जवानों की जान गई है। हाल के दंगे भी उसी का परिणाम हैं। तुला, मेष और मकर राशि वालों के लिए अगले दो महीने काफी प्रतिकूल रहेंगे। यात्राओं के लिए भी यह अच्छा नहीं होगा। वास्तव में अप्रैल 2014 के बाद आकाशीय चक्र सुधरेगा।
- डा. प्रतीक मिश्रपुरी, अध्यक्ष-भारतीय प्राच्य विद्या सोसायटी
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यह ब्रह्मांड अनंत है। ब्रह्मांड में ग्रहों की स्थिति कई बार संसार चक्र का नियंत्रण करती है। श्रीमद्भागवत में भी ऐसा साफ-साफ लिखा है। निश्चित रूप से ग्रह उसी प्रकार प्रभाव डालते हैं जैसे चुंबक का प्रभाव लोहे पर पड़ता है। ग्रहों के आधार पर चूंकि सभी कार्य पृथ्वी पर होते हैं, अत: ग्रहों की चाल निश्चय ही माहौल बिगाड़ेगी।
- पंडित रवि शंकर जोशी, ज्योतिषाचार्य