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किश्त मिलने के बाद भी काम नहीं किया शुरू
रुद्रप्रयाग
Updated Fri, 26 Feb 2016 10:16 PM IST
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आपदा में प्रभावित आवासीय मकानों की मरम्मत/निर्माण के लिए ओडीसीएच में चयनित 860 परिवारों मेें 27 परिवारों ने पहली किश्त मिलने के बाद भी निर्माण शुरू नहीं किया है। प्रशासन ने कोर्ट के माध्यम से इन्हें नोटिस भेजा हैं।
16/17 जून 2013 को आई केदारनाथ आपदा में जनपद में सैकड़ों आवासीय मकान क्षतिग्रस्त हुए थे। सर्वे के बाद 860 परिवारों के मकान मरम्मत योग्य पाए। इन्हें विश्व बैंक पोषित आवासीय योजना ओडीसीएच (ऑनर ड्रिबन कंस्ट्रक्सन ऑफ हाउसेज) में शामिल किया गया। पीआईयू हाउसिंग से प्रति परिवार पांच लाख रुपये चार किश्तों में उपलब्ध कराई जा रही है। सभी परिवारों को दो वर्ष पहले पहली किश्त के रूप में डेढ़-डेढ़ लाख रुपये जारी किए गए थे। इनमें 27 परिवारों ने मकान के नाम पर अब तक एक भी नई ईंट नहीं जोड़ी। कुछ का कहना है कि आपदा से पैदा हुई तंगहाली में मिली पराशि से अपने लिए राशन खरीद लिया। जबकि कुछ भूमि चयन की बात कह रहे हैं। जिले में ओडीसीएच के तहत सिर्फ 498 परिवारों के मकानों का काम अंतिम चरण में है। इन्हें चौथी किश्त के रूप में 50-50 हजार भी दिए जा चुके हैं। जबकि 101 परिवारों को तीसरी और शेष को दूसरी किश्त दी गई है। कार्यदायी संस्था सुधा के जिला परियोजना समन्वयक पीएस बिष्ट का कहना है कि भवन स्वामियों द्वारा काम सुस्त गति से किया जा रहा है। पहली किश्त देेने के बाद भी काम शुरू नहीं करने पर 27 परिवारों को नोटिस जारी किए गए हैं।
31 परिवारों को नहीं हुए शामिल
860 परिवारों के अतिरिक्त नवंबर 2014 में 31 परिवारों द्वारा भी ओडीसीएच में शामिल करने के लिए आवेदन किए गए थे। लेकिन शासन द्वारा 2 दिसंबर 2014 को यह कहा गया कि राज्य का निर्धारित लक्ष्य पूरा होने के कारण इन परिवारों को शामिल नहीं किया जा सकता है।
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इनका कहना है -
ओडीसीएच के तहत बन रहे आवासीय भवनों के निर्माण प्रगति धीमी चल रह है। बीते दिनों हुई समीक्षा बैठक में कार्यदायी संस्था व संबंधित अधिकारियों को इस संबंध में जरूरी निर्देश जारी किए गए हैं। मैं स्वयं भी समय-समय पर स्थलीय निरीक्षण कर रहा हूं।
-- डा. राघव लंगर, जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग
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16/17 जून 2013 को आई केदारनाथ आपदा में जनपद में सैकड़ों आवासीय मकान क्षतिग्रस्त हुए थे। सर्वे के बाद 860 परिवारों के मकान मरम्मत योग्य पाए। इन्हें विश्व बैंक पोषित आवासीय योजना ओडीसीएच (ऑनर ड्रिबन कंस्ट्रक्सन ऑफ हाउसेज) में शामिल किया गया। पीआईयू हाउसिंग से प्रति परिवार पांच लाख रुपये चार किश्तों में उपलब्ध कराई जा रही है। सभी परिवारों को दो वर्ष पहले पहली किश्त के रूप में डेढ़-डेढ़ लाख रुपये जारी किए गए थे। इनमें 27 परिवारों ने मकान के नाम पर अब तक एक भी नई ईंट नहीं जोड़ी। कुछ का कहना है कि आपदा से पैदा हुई तंगहाली में मिली पराशि से अपने लिए राशन खरीद लिया। जबकि कुछ भूमि चयन की बात कह रहे हैं। जिले में ओडीसीएच के तहत सिर्फ 498 परिवारों के मकानों का काम अंतिम चरण में है। इन्हें चौथी किश्त के रूप में 50-50 हजार भी दिए जा चुके हैं। जबकि 101 परिवारों को तीसरी और शेष को दूसरी किश्त दी गई है। कार्यदायी संस्था सुधा के जिला परियोजना समन्वयक पीएस बिष्ट का कहना है कि भवन स्वामियों द्वारा काम सुस्त गति से किया जा रहा है। पहली किश्त देेने के बाद भी काम शुरू नहीं करने पर 27 परिवारों को नोटिस जारी किए गए हैं।
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31 परिवारों को नहीं हुए शामिल
860 परिवारों के अतिरिक्त नवंबर 2014 में 31 परिवारों द्वारा भी ओडीसीएच में शामिल करने के लिए आवेदन किए गए थे। लेकिन शासन द्वारा 2 दिसंबर 2014 को यह कहा गया कि राज्य का निर्धारित लक्ष्य पूरा होने के कारण इन परिवारों को शामिल नहीं किया जा सकता है।
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इनका कहना है -
ओडीसीएच के तहत बन रहे आवासीय भवनों के निर्माण प्रगति धीमी चल रह है। बीते दिनों हुई समीक्षा बैठक में कार्यदायी संस्था व संबंधित अधिकारियों को इस संबंध में जरूरी निर्देश जारी किए गए हैं। मैं स्वयं भी समय-समय पर स्थलीय निरीक्षण कर रहा हूं।
-- डा. राघव लंगर, जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग