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शीतकालीन गद्दी पर विराजमान हुए तुंगनाथ
अमर उजाला ब्यूरो/ रुद्रप्रयाग
Updated Wed, 09 Nov 2016 08:38 PM IST
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बुधवार को विधि-विधान के साथ खुले तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ के कपाट। इस मौके पर एक हजार से अधिक भक्त मौजूद रहे।
- फोटो : Amar Ujala
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तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ बुधवार को विशेष पूजा-अर्चना के बीच अपने शीतकालीन गद्दीस्थल मार्कंडेय मंदिर मक्कूमठ में विराजमान हो गए हैं। इस मौके पर सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
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भगवान की चल विग्रह उत्सव डोली दो बजे मार्कंडेय मंदिर में पहुंची। इस मौके पर पूरा क्षेत्र भगवान तुंगनाथ के जयकारों से गूंज उठा। भगवान की डोली ने मंदिर की तीन बार परिक्रमा की और खतौड़ा स्थित भूतनाथ मंदिर पहुंची। निरीक्षण के बाद डोली पुन: मूल मंदिर में पहुंची और यज्ञ कुंड की तीन बार परिक्रमा करने के बाद मंदिर परिसर में विराजमान हो गई। इस अवसर पर मक्कू गांव के ग्रामीणों ने भगवान को अर्घ्य लगाकर आरती उतारी।
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धार्मिक अनुष्ठान की औपचारिकताएं पूरी करने के बाद विधि विधान से भगवान तुंगनाथ की भोग मूर्ति को छह माह की पूजा-अर्चना के लिए गर्भगृह में प्रतिष्ठापित कर दिया गया। इस मौके पर पूर्व विधायक आशा नौटियाल, मंदिर के सीईओ बीडी सिंह, मठापति राम प्रसाद मैठाणी, प्रबंधक प्रकाश पुरोहित, डीएम राघव लंगर, गजेंद्र चौधरी, कुलदीप रावत, सुमंत तिवारी सहित कई ग्रामीण मौजूद थे।
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इससे पूर्व भुनकुन गुफा में मुख्य पुजारी मुकेश मैठाणी और चंद्रबल्लभ मैठाणी ने भगवान तुंगनाथ की पूजा-अर्चना का महाभिषेक किया। प्रात: साढ़े दस बजे डोली अपने शीतकालीन गद्दीस्थल के लिए प्रस्थान करते हुए ग्वाड़ पहुंची। ग्रामीणों ने देवता को अर्घ्य लगाया। राक्षी नदी (राकेश्वरी) के तट पर स्नान के बाद भगवान की डोली मलथर धार में पहुंची, जहां पर मक्कू के ग्रामीणों ने देवता का जोरदार स्वागत किया। धार्मिक परंपराओं के तहत आराध्य को अर्घ्य लगाया गया।
यहां पर न्योजा-निषाणों और वाद्य यंत्रों के साथ मार्कंडेय मंदिर के पुजारी रामेश्वर प्रसाद मैठाणी ने भगवान की अगुवाई की और उन्हें मूल मंदिर तक ले गए। मार्कंडेय मंदिर में पुरोहित माहेश्वर प्रसाद मैैठाणी, सुरेंद्र प्रसाद मैठाणी और विजय भारत ने पूजा अर्चना कराई।