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Rudraprayag News: तुंगनाथ के बुग्यालों की सुरक्षा को गांव, मंदिर और प्रशासन ने एक साथ कसी कमर
Mon, 03 Aug 2026 10:56 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रुद्र प्रयाग
संवाद न्यूज एजेंसी, रुद्र प्रयाग
Updated Mon, 03 Aug 2026 10:56 PM IST
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तुंगनाथ से चंद्रशिला ट्रैक पर बांस व जूट की रस्सी से हो बैरिकेडिंग
ऊखीमठ। तृतीय केदार तुंगनाथ से चंद्रशिला तक फैले हिमालय के बुग्यालों को बचाने के लिए तुंगनाथ घाटी में जनभागीदारी की पहल की गई है। यहां बढ़ते पर्यटकों और वर्षा से हो रहे भूमि कटाव के बीच स्थानीय ग्रामीणों, मंदिर समिति और जिला आपदा प्रबंधन रुद्रप्रयाग एक साथ बुग्याल संरक्षण की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। इस पहल से हिमालय की दुर्लभ जैव विविधता को बचाने की कोशिश की जा रही है।
इस पहल के तहत तुंगनाथ से चंद्रशिला तक करीब एक किलोमीटर पैदल मार्ग पर बांस और रस्सी से बैरिकेडिंग तैयार की जा रही है। इस व्यवस्था से अब यहां श्रद्धालु और पर्यटक निर्धारित ट्रैक पर ही चल सकेंगे और बुग्याली क्षेत्र में प्रवेश नहीं कर सकेंगे। साथ ही
बुग्यालों को बारिश से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए ढलानों पर चटाइयां बिछाई जा रही हैं। तेज जल प्रवाह को नियंत्रित करने के लिए क्षतिग्रस्त पुश्तों का निर्माण और जल मोड़ नालियां बनाई जा रही है। जिससे मिट्टी का कटाव कम होगा और बुग्यालों की प्राकृतिक बनावट सुरक्षित बनी रहेगी। पं अभिषेक मैठाणी ने बताया कि 14 जुलाई को जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने मंदिर परिसर में स्थानीय लोगों को संरक्षण कार्यों का प्रशिक्षण दिया। इसके बाद 16 जुलाई से बुग्याल संरक्षण का अभियान शुरू किया गया। पहले चरण में तुंगनाथ से चंद्रशिला तक एक वर्ग किलोमीटर से अधिक बुग्याली क्षेत्र को संरक्षित किया जा रहा है। दूसरे चरण में तुंगनाथ से चोपता तक करीब साढ़े तीन किलोमीटर लंबे बुग्याली क्षेत्र में सुधार कार्य किए जाएंगे।
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ऊखीमठ। तृतीय केदार तुंगनाथ से चंद्रशिला तक फैले हिमालय के बुग्यालों को बचाने के लिए तुंगनाथ घाटी में जनभागीदारी की पहल की गई है। यहां बढ़ते पर्यटकों और वर्षा से हो रहे भूमि कटाव के बीच स्थानीय ग्रामीणों, मंदिर समिति और जिला आपदा प्रबंधन रुद्रप्रयाग एक साथ बुग्याल संरक्षण की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। इस पहल से हिमालय की दुर्लभ जैव विविधता को बचाने की कोशिश की जा रही है।
इस पहल के तहत तुंगनाथ से चंद्रशिला तक करीब एक किलोमीटर पैदल मार्ग पर बांस और रस्सी से बैरिकेडिंग तैयार की जा रही है। इस व्यवस्था से अब यहां श्रद्धालु और पर्यटक निर्धारित ट्रैक पर ही चल सकेंगे और बुग्याली क्षेत्र में प्रवेश नहीं कर सकेंगे। साथ ही
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बुग्यालों को बारिश से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए ढलानों पर चटाइयां बिछाई जा रही हैं। तेज जल प्रवाह को नियंत्रित करने के लिए क्षतिग्रस्त पुश्तों का निर्माण और जल मोड़ नालियां बनाई जा रही है। जिससे मिट्टी का कटाव कम होगा और बुग्यालों की प्राकृतिक बनावट सुरक्षित बनी रहेगी। पं अभिषेक मैठाणी ने बताया कि 14 जुलाई को जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने मंदिर परिसर में स्थानीय लोगों को संरक्षण कार्यों का प्रशिक्षण दिया। इसके बाद 16 जुलाई से बुग्याल संरक्षण का अभियान शुरू किया गया। पहले चरण में तुंगनाथ से चंद्रशिला तक एक वर्ग किलोमीटर से अधिक बुग्याली क्षेत्र को संरक्षित किया जा रहा है। दूसरे चरण में तुंगनाथ से चोपता तक करीब साढ़े तीन किलोमीटर लंबे बुग्याली क्षेत्र में सुधार कार्य किए जाएंगे।
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